HomeBlogछत्तीसगढ़ की भौतिक विशेषताएँ एवं भौगोलिक विस्तार: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका (Physical Features of Chhattisgarh: A Comprehensive Guide)

छत्तीसगढ़ की भौतिक विशेषताएँ एवं भौगोलिक विस्तार: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका (Physical Features of Chhattisgarh: A Comprehensive Guide)

छत्तीसगढ़, जिसे ‘भारत का हृदय स्थल’ और ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, अपनी अद्वितीय भूगर्भिक संरचना, सघन वनों और समृद्ध खनिज संपदा के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। 1 नवंबर, 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर भारत के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया छत्तीसगढ़ आज अपनी भौगोलिक विविधताओं के कारण शोधकर्ताओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इस लेख में हम छत्तीसगढ़ की भौतिक विशेषताओं, स्थिति, विस्तार, पाट प्रदेशों और भूगर्भिक संरचना का 4000 शब्दों की गहराई के साथ विश्लेषण करेंगे।


1. स्थिति एवं विस्तार (Location and Extension)

छत्तीसगढ़ की भौगोलिक अवस्थिति इसे सामरिक और जलवायविक रूप से विशिष्ट बनाती है। यह उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित एशिया महाद्वीप के भारत देश के प्रायद्वीपीय पठार का एक अभिन्न अंग है।

1.1 अक्षांशीय एवं देशांतरीय स्थिति

छत्तीसगढ़ की मुख्य भूमि का विस्तार निम्नलिखित निर्देशांकों के मध्य है:

  • अक्षांशीय विस्तार: 17°46′ उत्तरी अक्षांश से 24°5′ उत्तरी अक्षांश के मध्य।
  • देशांतरीय विस्तार: 80°15′ पूर्वी देशांतर से 84°24′ पूर्वी देशांतर के मध्य।

राज्य की उत्तर से दक्षिण की अधिकतम लंबाई लगभग 700 किमी. है, जबकि पूर्व से पश्चिम की चौड़ाई 435 किमी. है।

1.2 कर्क रेखा और भारतीय मानक समय (IST) का संगम

छत्तीसगढ़ भारत के उन गिने-चुने राज्यों में से है जहाँ से कर्क रेखा और मानक समय रेखा दोनों गुजरती हैं:

  • कर्क रेखा (23½° N): यह राज्य के उत्तरी भाग के तीन जिलों—कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर से होकर गुजरती है।
  • भारतीय मानक समय रेखा (82½° E): यह रेखा छत्तीसगढ़ के 7 जिलों (कोरिया, सूरजपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, महासमुंद और गरियाबंद) से होकर गुजरती है।
  • मिलन बिंदु: कर्क रेखा और भारतीय मानक समय रेखा एक-दूसरे को सूरजपुर (कुछ स्रोतों के अनुसार कोरिया) जिले में काटती हैं। यह बिंदु भौगोलिक अध्ययन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1.3 सीमावर्ती राज्य और क्षेत्रफल

छत्तीसगढ़ का कुल क्षेत्रफल 1,35,192 वर्ग किमी. है, जो भारत के कुल क्षेत्रफल का 4.11% है। क्षेत्रफल के आधार पर यह भारत का 9वाँ सबसे बड़ा राज्य है। इसकी सीमाएँ सात राज्यों को स्पर्श करती हैं:

  1. उत्तर: उत्तर प्रदेश
  2. उत्तर-पूर्व: झारखंड
  3. पूर्व: ओडिशा
  4. दक्षिण: तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश
  5. पश्चिम: महाराष्ट्र
  6. उत्तर-पश्चिम: मध्य प्रदेश

छत्तीसगढ़ एक भू-आवेष्ठित (Landlocked) राज्य है, जिसकी कोई भी सीमा समुद्र या किसी अंतर्राष्ट्रीय सीमा को नहीं छूती, जिससे यह सामरिक दृष्टि से अत्यंत सुरक्षित प्रदेश माना जाता है।


2. भूगर्भिक संरचना (Geological Structure)

छत्तीसगढ़ की भूगर्भिक संरचना में प्राचीनतम से लेकर नवीनतम चट्टानों का समावेश है। यहाँ की मिट्टी और खनिजों का वितरण इन्हीं शैल समूहों पर निर्भर करता है।

2.1 आर्कियन शैल समूह

यह राज्य का प्राचीनतम शैल समूह है, जो लगभग 50% भाग पर विस्तृत है। इसमें ग्रेनाइट और नीस जैसी चट्टानें पाई जाती हैं।

2.2 धारवाड़ शैल समूह

यह शैल समूह मुख्य रूप से बस्तर के पठार और दुर्ग संभाग के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। यह लौह अयस्क के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बैलाडीला की खदानें इसी समूह का हिस्सा हैं।

2.3 कड़प्पा शैल समूह

छत्तीसगढ़ के मध्य मैदानी भाग (महानदी बेसिन) में कड़प्पा क्रम की चट्टानें पाई जाती हैं। इस समूह से प्रचुर मात्रा में चूना पत्थर (Limestone) और डोलोमाइट की प्राप्ति होती है।

2.4 गोंडवाना शैल समूह

राज्य के उत्तरी भाग (सरगुजा और बिलासपुर संभाग) में गोंडवाना चट्टानें मिलती हैं। यह समूह कोयला भंडार के लिए जाना जाता है। छत्तीसगढ़ का अधिकांश कोयला इसी संरचना से प्राप्त होता है।


3. भौतिक विभाग (Physical Divisions)

उच्चावच और संरचना के आधार पर छत्तीसगढ़ को चार प्रमुख भौतिक विभागों में विभाजित किया जा सकता है:

  1. पूर्वी बघेलखंड का पठार: राज्य का उत्तरी भाग।
  2. जशपुर-सामरी पाट प्रदेश: उत्तर-पूर्वी भाग।
  3. छत्तीसगढ़ का मैदान (महानदी बेसिन): मध्य भाग।
  4. दंडकारण्य का पठार (बस्तर का पठार): दक्षिणी भाग।

4. पाट प्रदेश: छत्तीसगढ़ का विशिष्ट उच्चावच

पाट प्रदेश पठारी स्थलाकृतियों में स्थित एक ऊँचा मैदान होता है, जिसका शीर्ष भाग सपाट और किनारे तीव्र ढाल वाले होते हैं। छत्तीसगढ़ का उत्तर-पूर्वी भाग (सरगुजा और जशपुर जिला) इसी प्रकार की स्थलाकृतियों से निर्मित है।

4.1 पाट प्रदेश की विशेषताएँ

  • क्षेत्रफल: 6204 वर्ग किमी. (राज्य का 4.59%)।
  • प्रमुख खनिज: बॉक्साइट।
  • प्रमुख फसलें: चाय, लीची, आलू, धान और बागवानी फसलें।
  • मिट्टी: लाल-पीली और लैटेराइट (भाटा) मिट्टी।

4.2 प्रमुख पाट प्रदेशों का विवरण

I. मैनपाट (Mainpat)

इसे “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहा जाता है।

  • विस्तार: सरगुजा जिला।
  • महत्व: 1962 में यहाँ तिब्बती शरणार्थियों को बसाया गया था। यह मांड नदी का उद्गम स्थल है।
  • पर्यटन: टाइगर पॉइंट, फिश पॉइंट और ‘उल्टा पानी’ जैसे प्राकृतिक चमत्कार यहाँ स्थित हैं।

II. सामरीपाट (Samri Pat)

यह छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा पाट प्रदेश है।

  • विशेषता: यहाँ राज्य की सबसे ऊँची चोटी गौरलाटा (1225 मीटर) स्थित है। यह बलरामपुर जिले के अंतर्गत आता है।

III. जशपुर पाट (Jashpur Pat)

  • विशेषता: यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और सबसे लंबा पाट प्रदेश है। यह जशपुर जिले में फैला हुआ है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।

IV. जारंगपाट (Jarang Pat)

  • विस्तार: सरगुजा जिला। यहाँ बॉक्साइट के विशाल भंडार पाए जाते हैं।

V. पेण्ड्रापाट (Pendra Pat)

  • महत्व: यहाँ से ईब और कन्हार जैसी महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम होता है।

5. छत्तीसगढ़ का मैदान एवं दंडकारण्य पठार

5.1 महानदी बेसिन (छत्तीसगढ़ का मैदान)

यह राज्य का सबसे उपजाऊ भाग है। इसकी आकृति एक तश्तरी (Saucer) या कटोरे के समान है। यहाँ कड़प्पा चट्टानों की अधिकता है। शिवनाथ, हसदेव और अरपा जैसी नदियाँ यहाँ कृषि का आधार हैं।

5.2 दंडकारण्य का पठार

यह राज्य का दक्षिणी भाग है, जिसमें बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले आते हैं।

  • अबूझमाड़ की पहाड़ियाँ: नारायणपुर में स्थित ये पहाड़ियाँ सघन वनों और जैव विविधता के लिए जानी जाती हैं।
  • बस्तर का मैदान: बीजापुर और सुकमा जिलों में स्थित यह क्षेत्र इंद्रावती नदी द्वारा सिंचित है।

6. जलवायु और अपवाह तंत्र

6.1 जलवायु (Climate)

छत्तीसगढ़ की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी (Tropical Monsoon) है। कर्क रेखा के प्रभाव के कारण यहाँ गर्मी अधिक पड़ती है। राज्य में वर्षा मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी की शाखा से होती है, हालांकि अरब सागर की शाखा से भी कुछ वर्षा प्राप्त होती है।

6.2 अपवाह तंत्र (Drainage System)

राज्य की नदियाँ पाँच प्रमुख अपवाह तंत्रों में विभाजित हैं:

  1. महानदी अपवाह तंत्र (56.15%): सबसे बड़ा तंत्र।
  2. गोदावरी अपवाह तंत्र (28.64%): इंद्रावती मुख्य नदी।
  3. सोन-गंगा अपवाह तंत्र (13.63%): उत्तरी नदियाँ।
  4. ब्राह्मणी अपवाह तंत्र (1.03%)
  5. नर्मदा अपवाह तंत्र (0.55%): सबसे छोटा तंत्र।

7. परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • समुद्री घोड़े के समान आकृति: छत्तीसगढ़ का मानचित्र समुद्री घोड़े (Seahorse) जैसा दिखाई देता है।
  • Standard Time: 82½° पूर्वी देशांतर रेखा 7 जिलों से गुजरती है।
  • गौरलाटा: छत्तीसगढ़ की सर्वोच्च शिखर (1225 मी), सामरीपाट।
  • मांड नदी: मैनपाट से निकलती है और महानदी में मिलती है।
  • लाल-पीली मिट्टी: इसे स्थानीय भाषा में ‘मटासी’ कहते हैं, यह धान के लिए सर्वोत्तम है।
  • धारवाड़ शैल: टिन और लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध।

8. संभावित अभ्यास प्रश्न (Question Set)

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. छत्तीसगढ़ के भू-आवेष्ठित होने के क्या लाभ हैं?
  2. कर्क रेखा राज्य के किन जिलों से होकर गुजरती है?
  3. ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ किसे और क्यों कहा जाता है?
  4. आर्कियन शैल समूह की क्या विशेषताएं हैं?

मध्यम उत्तरीय प्रश्न (Medium Answer Questions)

  1. छत्तीसगढ़ के पाट प्रदेशों का तुलनात्मक वर्णन कीजिये।
  2. छत्तीसगढ़ की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों को स्पष्ट कीजिये।
  3. महानदी बेसिन की भूगर्भिक संरचना और कृषि पर उसके प्रभाव का वर्णन करें।
  4. दंडकारण्य पठार की भौतिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions – 175 शब्द)

  1. छत्तीसगढ़ की भूगर्भिक संरचना का विस्तृत वर्णन कीजिये: इसमें आर्कियन, धारवाड़, कड़प्पा और गोंडवाना शैल समूहों के वितरण और उनमें पाए जाने वाले खनिजों की चर्चा करें।
  2. छत्तीसगढ़ के भौतिक विभागों में ‘जशपुर-सामरी पाट’ प्रदेश के महत्व को स्पष्ट कीजिये: इसके उप-विभागों (मैनपाट, सामरीपाट आदि) और आर्थिक महत्व (बॉक्साइट एवं बागवानी) का विश्लेषण करें।
  3. छत्तीसगढ़ की स्थिति एवं विस्तार का राज्य की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ता है? विस्तारपूर्वक समझाएं।

9. निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ की भौतिक विशेषताएँ इसे प्राकृतिक संसाधनों का भंडार बनाती हैं। उत्तर में ऊँचे पाट प्रदेश, मध्य में उपजाऊ मैदान और दक्षिण में वनों से आच्छादित पठार इस राज्य को भौगोलिक रूप से पूर्णता प्रदान करते हैं। कर्क रेखा और भारतीय मानक समय रेखा का संगम इस भूमि को वैज्ञानिक रूप से भी विशिष्ट बनाता है। यहाँ की भूगर्भिक संरचना न केवल खनिजों की प्रचुरता सुनिश्चित करती है, बल्कि कृषि और वनस्पति की विविधता का भी आधार है। भविष्य के विकास के लिए इन भौतिक विशेषताओं का संरक्षण और वैज्ञानिक उपयोग अनिवार्य है।


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