HomeBlogशून्य से शिखर तक का सफर: पुनाराम साहू की एक महागाथा

शून्य से शिखर तक का सफर: पुनाराम साहू की एक महागाथा

अध्याय 1: प्रस्तावना – एक साधारण शुरुआत में छिपी असाधारण संभावना

भारत के हृदय स्थल छत्तीसगढ़ में अनेकों ऐसी कहानियां छिपी हैं जो मिट्टी से जुड़ी हैं, लेकिन जिनके सपने आसमान को छूते हैं। ऐसी ही एक कहानी है श्री पुनाराम साहू की। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि यह उस हर एक युवा की कहानी है जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आता है, जिसके पास संसाधनों का अभाव है, लेकिन जिसकी आँखों में कुछ कर गुजरने की चमक है।

पुनाराम साहू का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सफलता विरासत में नहीं मिलती, बल्कि उसे अपने पसीने, संघर्ष और अटूट संकल्प से छीनना पड़ता है। 18 अगस्त 1996 का दिन ग्राम तोरा के लिए एक सामान्य दिन रहा होगा, लेकिन साहू परिवार के लिए यह एक विशेष दिन था, जब पुनाराम का जन्म हुआ। एक साधारण परिवेश, सीमित संसाधन और ग्रामीण जीवन की चुनौतियाँ—यही वह भट्टी थी जिसने पुनाराम के व्यक्तित्व को तपाकर कुंदन बनाया।

आज के दौर में जब युवा छोटी-छोटी असफलताओं से निराश हो जाते हैं, पुनाराम साहू का जीवन एक ‘केस स्टडी’ है कि कैसे कमजोर शुरुआत के बावजूद एक मजबूत अंत की पटकथा लिखी जा सकती है। खेती-किसानी से लेकर कंप्यूटर की स्क्रीन तक, और एक नौकरीपेशा व्यक्ति से लेकर एक उद्यमी (Entrepreneur) बनने तक का उनका सफर रोमांचक भी है और शिक्षाप्रद भी। इस विस्तृत आलेख में, हम उनके जीवन की परतों को खोलेंगे और जानेंगे कि कैसे एक साधारण गाँव के लड़के ने डिजिटल दुनिया में अपनी जगह बनाई।


अध्याय 2: प्रारंभिक जीवन और ग्रामीण परिवेश (1996 – 2005)

जन्म और पृष्ठभूमि
पुनाराम साहू का जन्म 18 अगस्त 1996 को छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम तोरा में हुआ। 90 का दशक भारत में बदलाव का दौर था, लेकिन ग्रामीण भारत में जीवन तब भी धीमा और संघर्षपूर्ण था। साहू परिवार, जो अपनी मेहनत और ईमानदारी के लिए जाना जाता था, ने पुनाराम को बचपन से ही सादगी और परिश्रम के संस्कार दिए।

ग्राम तोरा, जहाँ उनका बचपन बीता, एक ऐसा स्थान था जहाँ प्रकृति की गोद तो थी, लेकिन आधुनिक सुविधाओं का अभाव था। बिजली की अनिश्चितता, पक्की सड़कों की कमी और शिक्षा के सीमित संसाधन—ये वे चुनौतियाँ थीं जिनका सामना उस समय हर ग्रामीण बच्चे को करना पड़ता था। पुनाराम का बचपन भी इन्हीं गलियों में खेलते-कूदते बीता।

बचपन की चुनौतियाँ
शुरुआती दिनों में, पुनाराम एक औसत बच्चे की तरह थे। शिक्षा के प्रति उनकी रुचि तो थी, लेकिन वे उन “मेधावी” छात्रों में नहीं गिने जाते थे जो बचपन से ही क्लास में टॉप करते हैं। वे पढ़ाई में थोड़े कमजोर थे। यह वह दौर था जब ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का मतलब केवल पास होना माना जाता था। मार्गदर्शन की कमी अक्सर बच्चों की प्रतिभा को कुंठित कर देती है, और पुनाराम के सामने भी यही संकट था।

लेकिन, नियति ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। बचपन की यह कमजोरी ही आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। जब व्यक्ति को अपनी कमियों का अहसास जल्दी हो जाता है, तो सुधार की गुंजाइश बढ़ जाती है। पुनाराम के साथ भी यही हुआ। उन्होंने अपनी कमजोरियों को स्वीकार किया और उन्हें चुनौती के रूप में लिया।


अध्याय 3: शिक्षा का सफर – संघर्ष से समझदारी तक

पुनाराम साहू की शैक्षणिक यात्रा तीन प्रमुख चरणों में विभाजित की जा सकती है, जो उनके व्यक्तित्व विकास के अलग-अलग पड़ावों को दर्शाती है।

3.1 प्राथमिक शिक्षा (नींव का निर्माण)
उनकी शिक्षा की शुरुआत शासकीय प्राथमिक शाला तोरा से हुई। यहाँ उन्होंने कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई की। सरकारी स्कूलों का माहौल, टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करना, और सीमित संसाधनों के बीच अक्षरों का ज्ञान लेना—यह उनका पहला अनुभव था। प्राथमिक शिक्षा ने उनमें अनुशासन और सामाजिकता के बीज बोए। हालाँकि, इस दौरान वे पढ़ाई में बहुत तेज नहीं थे, लेकिन उनमें सीखने की एक ललक थी जो शिक्षकों को नजर आती थी।

3.2 माध्यमिक शिक्षा (किशोरावस्था और बदलाव)
कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई के लिए उन्होंने शासकीय माध्यमिक शाला तोरा में दाखिला लिया। यह वह समय था जब एक बालक किशोरावस्था में प्रवेश करता है। दुनिया को देखने का नजरिया बदलने लगता है। पुनाराम के लिए भी यह आत्म-मंथन का समय था। उन्हें धीरे-धीरे यह समझ आने लगा कि अगर जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो शिक्षा ही एकमात्र हथियार है। जो लड़का पहले पढ़ाई से कतराता था, अब किताबों में अपने सवालों के जवाब ढूंढने लगा था।

3.3 हायर सेकेंडरी शिक्षा (लक्ष्य का निर्धारण)
माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया और शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, अंधियारखोर में प्रवेश लिया। यहाँ उन्होंने कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई की। यह उनके जीवन का ‘टर्निंग पॉइंट’ था।

अंधियारखोर का स्कूल उनके गाँव से दूर था। आने-जाने का संघर्ष, नए दोस्त, और पढ़ाई का बढ़ता बोझ—इन सबने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया। 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं किसी भी भारतीय छात्र के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ समान होती हैं। पुनाराम ने संसाधनों की कमी के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने अपने कमजोर विषयों पर मेहनत की। जो विषय उन्हें डराते थे, उन्होंने उन्हीं पर सबसे ज्यादा समय दिया।

इस दौरान उनके अंदर एक जिजीविषा (Jealousy for success) जागी। उन्होंने देखा कि दुनिया कितनी बड़ी है और वे कहाँ खड़े हैं। हायर सेकेंडरी की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि वे भीड़ का हिस्सा बनकर नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी अलग पहचान बनाएंगे।


अध्याय 4: कौशल विकास (Skill Development) – डिग्री से परे की दुनिया

भारत में अक्सर डिग्री को ही सब कुछ मान लिया जाता है, लेकिन पुनाराम साहू ने समय रहते समझ लिया था कि आने वाला दौर ‘डिग्री’ का नहीं, बल्कि ‘हुनर’ (Skill) का है। अपनी औपचारिक स्कूली शिक्षा के समानांतर, उन्होंने खुद को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने का निर्णय लिया।

4.1 कंप्यूटर साक्षरता: एक नई भाषा
जब वे स्कूल में थे, तब कंप्यूटर क्रांति धीरे-धीरे गाँवों तक पहुँच रही थी। पुनाराम ने इस मशीन की ताकत को पहचाना। उन्होंने केवल कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान ही नहीं लिया, बल्कि उसकी गहराइयों को समझा। एमएस ऑफिस (MS Office), इंटरनेट सर्फिंग, डेटा मैनेजमेंट—इन सब पर उन्होंने अपनी पकड़ मजबूत की। वे जानते थे कि भविष्य डिजिटल होने वाला है।

4.2 रचनात्मकता का विकास: एडिटिंग और डिजाइनिंग
पुनाराम के अंदर एक कलाकार छिपा था। उन्होंने कंप्यूटर का उपयोग केवल डेटा एंट्री के लिए नहीं, बल्कि सृजन के लिए किया।

  • वीडियो एडिटिंग: उन्होंने वीडियो एडिटिंग की बारीकियां सीखीं। विजुअल स्टोरीटेलिंग कैसे की जाती है, क्लिप्स को कैसे जोड़ा जाता है, और एक साधारण वीडियो को कैसे प्रभावशाली बनाया जाता है—यह सब उन्होंने सीखा।
  • फोटो एडिटिंग: फोटोशॉप और अन्य टूल्स की मदद से तस्वीरों को नया रूप देना उनका शौक बन गया।
  • ग्राफिक डिजाइनिंग: कोरल ड्रा (CorelDraw) और ऑनलाइन सॉफ्टवेयर का उपयोग करके पोस्टर और बैनर डिजाइन करना उनकी एक विशेष योग्यता बन गई।

ये कौशल केवल शौक नहीं थे, बल्कि ये उनके भविष्य के करियर की नींव बन रहे थे। आगे चलकर इन्हीं कौशलों ने उन्हें भीड़ से अलग खड़ा किया और आय के स्रोत प्रदान किए।


अध्याय 5: करियर का उतार-चढ़ाव भरा सफर

12वीं पास करने के बाद का समय हर युवा के लिए भ्रम और दबाव का होता है। पुनाराम साहू के लिए भी यह समय आसान नहीं था। उनके सामने दो रास्ते थे—या तो कॉलेज की रट्टामार पढ़ाई जारी रखें या फिर जीवन के मैदान में उतरकर संघर्ष करें।

5.1 मिट्टी से जुड़ाव: खेती में पसीना
अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के तुरंत बाद, उन्होंने सबसे पहले अपनी जड़ों की ओर रुख किया। उन्होंने कुछ समय तक खेतों में काम किया। एक किसान का जीवन कितना कठिन होता है, धूप और बारिश में फसल कैसे उगाई जाती है—यह अनुभव उन्हें खेतों में मिला। इस अनुभव ने उन्हें ‘श्रम का महत्व’ (Dignity of Labor) सिखाया। उन्हें समझ आया कि पैसा कमाना आसान नहीं है, उसके लिए खून-पसीना एक करना पड़ता है।

5.2 तकनीकी क्षेत्र में पहला कदम
खेतों में काम करने के बाद, उनका मन तकनीक की ओर खींचा। उन्होंने कंप्यूटर के क्षेत्र में कदम रखा। लगभग दो वर्षों तक उन्होंने कंप्यूटर से जुड़े विभिन्न कार्यों को सीखा और किया। यह उनका ‘एप्रेंटिसशिप’ (Apprenticeship) का दौर था। उन्होंने टाइपिंग से लेकर हार्डवेयर की समस्याओं को सुलझाने तक, सब कुछ व्यावहारिक रूप से सीखा।

लेकिन, दो साल बाद उन्हें एक खालीपन महसूस हुआ। उन्हें लगा कि वे एक ही जगह रुक गए हैं। उन्हें आगे बढ़ने का, तरक्की का कोई स्पष्ट रास्ता (Roadmap) नहीं दिख रहा था। यह एक युवा के लिए बहुत निराशाजनक स्थिति होती है जब उसे लगता है कि उसकी मेहनत का सही परिणाम नहीं मिल रहा।

5.3 डायरेक्ट सेलिंग और सेफ शॉप (Safe Shop)
इसी उधेड़बुन के दौरान, उनका परिचय ‘सेफ शॉप’ (Safe Shop) नामक डायरेक्ट सेलिंग कंपनी से हुआ। नेटवर्क मार्केटिंग की दुनिया ने उन्हें आकर्षित किया। यहाँ उन्हें न केवल पैसे कमाने का अवसर दिखा, बल्कि व्यक्तित्व विकास, पब्लिक स्पीकिंग और लीडरशिप जैसे गुण सीखने का मौका भी मिला।

सेफ शॉप से जुड़ना उनके जीवन का एक साहसिक फैसला था। यहाँ उन्होंने लोगों से बात करना, रिजेक्शन (अस्वीकृति) को झेलना, और अपनी बात मनवाना सीखा। यह एक ऐसा ‘बिजनेस स्कूल’ था जहाँ कोई फीस नहीं थी, लेकिन सबक बहुत कीमती थे।

5.4 शिक्षक की भूमिका और कोचिंग संस्थान
परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालने के लिए, पुनाराम ने केवल एक काम पर निर्भर रहना उचित नहीं समझा। उन्होंने नौकरी भी शुरू की। इस दौरान, उन्होंने एक कोचिंग संस्थान में काम किया जो सरकारी नौकरी की तैयारी करवाता था।

यहाँ उनकी भूमिका बहुआयामी थी। उन्होंने छात्रों को मार्गदर्शन दिया। इस अनुभव से उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की जटिलताओं, सरकारी नौकरी की तैयारी की प्रक्रियाओं और छात्रों के मनोविज्ञान को समझने का गहरा ज्ञान मिला। एक शिक्षक के रूप में, उन्होंने न केवल विषय पढ़ाए, बल्कि छात्रों को जीवन जीने की कला भी सिखाई।


अध्याय 6: डिजिटल उद्यमिता (Digital Entrepreneurship) की ओर

नौकरी और नेटवर्क मार्केटिंग करते हुए पुनाराम को एक महत्वपूर्ण बात समझ में आ गई थी— “नौकरी से सिर्फ घर चल सकता है, लेकिन सपने पूरे करने के लिए व्यवसाय (Business) करना जरुरी है।”

6.1 ऑनलाइन दुनिया की खोज
लगभग दो साल की नौकरी के दौरान, उन्होंने इंटरनेट की असीम संभावनाओं को पहचाना। उन्होंने देखा कि दुनिया बदल रही है। लोग ऑफिस जाए बिना, केवल लैपटॉप और इंटरनेट की मदद से लाखों कमा रहे हैं।

पुनाराम ने गूगल (Google) और वेबसाइट्स की कार्यप्रणाली को समझना शुरू किया। उन्होंने सीखा कि कंटेंट कैसे काम करता है, डिजिटल मार्केटिंग क्या है, और ऑनलाइन उपस्थिति (Online Presence) कैसे बनाई जाती है।

6.2 कमाई के नए रास्ते
अपने तकनीकी ज्ञान (कंप्यूटर बेसिक, डिजाइनिंग, एडिटिंग) का उपयोग करके उन्होंने ऑनलाइन पैसे कमाना शुरू किया। फ्रीलांसिंग और डिजिटल प्रोजेक्ट्स के माध्यम से उन्होंने आय के अतिरिक्त स्रोत (Passive Income) बनाए। यह उनके लिए एक बड़ी जीत थी। अब वे केवल एक स्थानीय नौकरीपेशा व्यक्ति नहीं थे, बल्कि ‘ग्लोबल मार्केट’ के खिलाड़ी बन रहे थे।

उनका सपना एक अपना ‘कंप्यूटर सेंटर’ खोलने का था। हालाँकि, संसाधनों की कमी के कारण वे इसे तुरंत शुरू नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने ऑनलाइन स्पेस को ही अपना ऑफिस बना लिया। वेबसाइट्स के माध्यम से और गूगल की सेवाओं का उपयोग करके उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई।


अध्याय 7: सफलता का दर्शन और जीवन के सबक

पुनाराम साहू की कहानी केवल घटनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा है। उनके जीवन से कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं।

7.1 कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं
पुनाराम ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया। कई बार वे गिरे, कई बार उन्हें लगा कि रास्ते बंद हो गए हैं। लेकिन वे हमेशा परिस्थितियों से सीखते रहे। उन्होंने कई सफल लोगों से मुलाकात की, उनकी जीवनिया पढ़ीं और अंत में इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। सफलता का एकमात्र सूत्र ‘कड़ी मेहनत’ है।

7.2 सफलता की परिभाषा
पुनाराम के लिए सफलता की परिभाषा बहुत स्पष्ट और व्यावहारिक है। वे मानते हैं कि “आप जो चाहते हैं उसे पा लेना सफलता है, लेकिन असली सफलता कहीं पहुँच कर रुक जाना नहीं है।” निरंतर आगे बढ़ते रहना, नए लक्ष्य बनाना और खुद को बेहतर बनाना ही वास्तविक जीवन है।

7.3 धोखे और सीख
जीवन हमेशा सीधा नहीं चलता। पुनाराम को भी अपने सफर में कई बार धोखे मिले। लोगों ने उनके भरोसे का फायदा उठाया। लेकिन उन्होंने इन कड़वे अनुभवों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। इसके विपरीत, इन धोखों ने उन्हें और अधिक सतर्क और समझदार बनाया। वे टूटे नहीं, बल्कि और मजबूती से खड़े हुए। उनकी सहनशक्ति (Resilience) ही उनकी असली पूंजी है।

7.4 नेटवर्क की ताकत
सेफ शॉप में काम करते हुए उन्होंने ‘नेटवर्क’ की ताकत को समझा। वे जान गए थे कि “Your Network is your Net Worth”। अकेले चलने वाला व्यक्ति तेज चल सकता है, लेकिन दूर तक जाने के लिए साथ की जरूरत होती है। उन्होंने लोगों को जोड़ना और उनके साथ मिलकर काम करना सीखा।


अध्याय 8: समाज पर प्रभाव (Social Impact)

एक सफल व्यक्ति वह नहीं है जो केवल अपना घर भरे, बल्कि वह है जो दूसरों के दीपक भी जलाए। पुनाराम साहू ने समाज को वापस देने (Giving back to society) में कभी संकोच नहीं किया।

8.1 युवाओं का कौशल विकास
रायपुर में अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने लगभग 65 से 80 बच्चों को प्रशिक्षित किया। ये वे बच्चे थे जो दिशाहीन थे या जिनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं था। पुनाराम ने उन्हें कंप्यूटर, डिजाइनिंग और अन्य कौशल सिखाए। उनके मार्गदर्शन के कारण आज वे युवा नौकरी करने के योग्य बने और अपने पैरों पर खड़े हैं। यह राष्ट्र निर्माण में उनका एक बड़ा योगदान है।

8.2 आर्थिक मदद
सीमित आय होने के बावजूद, पुनाराम ने जरूरतमंदों की आर्थिक मदद भी की। उनका मानना है कि मदद करने के लिए धन से ज्यादा ‘मन’ की जरूरत होती है। उन्होंने कई लोगों को कठिन समय में सहारा दिया।

8.3 शिक्षा का प्रसार
कोचिंग संस्थान में अपने कार्य के दौरान उन्होंने सैकड़ों छात्रों को सरकारी नौकरी के लिए प्रेरित किया। उन्हें सही दिशा दिखाई और बताया कि तैयारी कैसे करनी है। उनका मार्गदर्शन पाकर कई छात्रों का भविष्य उज्ज्वल हुआ।


अध्याय 9: वर्तमान और भविष्य की रूपरेखा (2024-2027)

आज, पुनाराम साहू एक परिपक्व और अनुभवी व्यक्ति हैं। वे अपनी अतीत की गलतियों से सीख चुके हैं और भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

वर्तमान स्थिति
वे आज भी ‘सेफ शॉप’ कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं, जो उनकी निष्ठा और दृढ़ता को दर्शाता है। इसके साथ ही, वे बाहरी स्रोतों (ऑनलाइन वर्क, डिजाइनिंग) से अच्छी कमाई कर रहे हैं। वे एक ‘मल्टी-टास्कर’ हैं जो नौकरी और साइड हसल (Side Hustle) को बखूबी संतुलित कर रहे हैं।

भविष्य की योजना (Vision 2027)
पुनाराम एक दूरदर्शी व्यक्ति हैं। उन्होंने अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर रखा है।

  • अल्पकालिक लक्ष्य: वे 2024 से 2027 तक अपनी नौकरी और ऑनलाइन कार्यों को जारी रखने की योजना बना रहे हैं। इसका उद्देश्य है—पूंजी जमा करना (Capital Accumulation)।
  • दीर्घकालिक लक्ष्य: उनका अंतिम लक्ष्य उद्यमिता (Entrepreneurship) है। वे अपने कंप्यूटर सेंटर के सपने को साकार करना चाहते हैं और एक बड़ा डिजिटल बिजनेस एम्पायर खड़ा करना चाहते हैं।
  • निरंतर सीखना: वे जानते हैं कि डिजिटल दुनिया तेजी से बदल रही है, इसलिए वे खुद को अपग्रेड करना कभी बंद नहीं करते। AI (Artificial Intelligence), नई मार्केटिंग तकनीकें और सॉफ्टवेयर—वे सब कुछ सीख रहे हैं।

अध्याय 10: निष्कर्ष

पुनाराम साहू की कहानी बेमेतरा के एक छोटे से गाँव तोरा से शुरू होकर डिजिटल दुनिया के असीम आकाश तक फैली है। यह कहानी हमें सिखाती है कि:

  1. शुरुआत मायने नहीं रखती: आप कहाँ पैदा हुए, आपके पास क्या नहीं है—यह सब गौण है। महत्वपूर्ण यह है कि आप कहाँ जाना चाहते हैं।
  2. कौशल ही राजा है: आज के युग में डिग्री से ज्यादा आपके हाथ का हुनर (Skill) आपको पैसा और सम्मान दिलाता है।
  3. हार मत मानो: धोखे, असफलताएं और गरीबी—ये सब रास्ते के पत्थर हैं, इन्हें सीढ़ी बनाना आना चाहिए।

पुनाराम साहू आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर इरादे नेक हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। उनका जीवन एक संदेश है— “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”

यदि आप भी जीवन में संघर्ष कर रहे हैं, या आपको लगता है कि संसाधन कम हैं, तो पुनाराम साहू की इस यात्रा को याद करें। अँधियारखोर के स्कूल से निकलकर डिजिटल दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले इस युवा की कहानी आपको हार न मानने की शक्ति देगी।


संपर्क सूत्र (Contact Details)

यदि आप श्री पुनाराम साहू से संपर्क करना चाहते हैं, उनसे मार्गदर्शन लेना चाहते हैं या उनके कार्यों के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो आप निम्नलिखित माध्यमों से उनसे जुड़ सकते हैं:

  • नाम: पुनाराम साहू (Punaram Sahu)
  • पता: वार्ड नंबर 04, बाबूलाल फैमिली, पुनाराम साहू, अंधियारखोर, नवागढ़, बेमेतरा (छत्तीसगढ़) – 491337
  • मोबाइल: +91-7509018151
  • ईमेल: Sahupunaram35@gmail.com

(नोट: यह जीवनी श्री पुनाराम साहू के संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मानित करने और युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से लिखी गई है।)

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