छत्तीसगढ़, जिसे ‘दक्षिण कोसल’ के नाम से जाना जाता था, भारत के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह भूमि न केवल अपनी प्राकृतिक संपदा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ की मिट्टी में प्राचीन राजवंशों का शौर्य, मराठों की कूटनीति, ब्रिटिश काल का संघर्ष और जनजातीय विद्रोहों की गूँज दफन है।
इस विस्तृत लेख में हम श्री पुनाराम साहू सर के विशेष मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के इतिहास के हर उस पहलू को खंगालेंगे जो इसे भारत का एक अद्वितीय राज्य बनाता है।
🏔️ 1. प्रागैतिहासिक काल: मानव सभ्यता के पदचिह्न (10,000 ईसा पूर्व)
छत्तीसगढ़ में मानव बस्ती के प्रमाण पाषाण युग से ही मिलते हैं। पुरातात्विक खुदाई में प्राप्त साक्ष्य बताते हैं कि यहाँ की गुफाओं में हजारों साल पहले से मनुष्य निवास कर रहे थे।
- प्रमुख स्थल: रायगढ़ जिले का सिंघनपुर और कबरा पहाड़ पाषाणकालीन शैल चित्रों के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। यहाँ पाए गए गेरुए रंग के चित्र शिकार और नृत्य की झांकी प्रस्तुत करते हैं।
- हड्डप्पा सभ्यता के साक्ष्य: छत्तीसगढ़ में हड़प्पा कालीन अवशेषों की खोज सुगौली, बैलाडीला और तारापुर जैसे क्षेत्रों में हुई है, जो इस क्षेत्र की प्राचीनता को प्रमाणित करते हैं।
📜 2. प्राचीन राजवंश: राजर्षितुल्य कुल से सोमवंशी तक
छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास शक्तिशाली राजवंशों की कहानियों से भरा है।
A. राजर्षितुल्य कुल (300 ईस्वी)
यह छत्तीसगढ़ का पहला ज्ञात राजवंश माना जाता है। इनकी राजधानी पद्मावती थी। भीमसेन प्रथम और द्वितीय जैसे शासकों ने इस क्षेत्र को संगठित किया।
B. नल राजवंश (5वीं शताब्दी)
नल वंश के राजाओं ने मुख्य रूप से बस्तर क्षेत्र पर शासन किया। इनकी राजधानी अराक (पुष्करी) थी। राजा भवदत्त वर्मन और अर्थपति इस वंश के प्रतापी राजा थे। इनका संघर्ष वाकाटक राजाओं के साथ हमेशा बना रहा।
C. शरभपुरीय राजवंश (6वीं-7वीं शताब्दी)
इस वंश की स्थापना ‘शरभ’ नामक राजा ने की थी। इनकी राजधानी शरभपुर थी। वे वैष्णव धर्म के अनुयायी थे और उनके स्वर्ण सिक्के आज भी इतिहासकारों के लिए शोध का विषय हैं।
D. पांडु और सोमवंशी (7वीं-12वीं शताब्दी)
पांडु वंश ने सिरपुर और राजिम को अपना केंद्र बनाया। महाशिवगुप्त बालार्जुन का काल छत्तीसगढ़ के इतिहास का “स्वर्ण युग” माना जाता है। इसी समय प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर (सिरपुर) का निर्माण हुआ। इसके बाद सोमवंशियों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
🏛️ 3. कल्चुरी राजवंश: छत्तीसगढ़ का सबसे लंबा शासन (12वीं-18वीं शताब्दी)
कल्चुरी राजवंश ने छत्तीसगढ़ पर लगभग छह शताब्दियों तक शासन किया। उन्होंने इस क्षेत्र को एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक ढांचा दिया।
- राजधानी: कल्चुरियों की मुख्य शाखा रतनपुर में थी, जबकि बाद में एक शाखा रायपुर में स्थापित हुई।
- प्रशासनिक व्यवस्था (गढ़ प्रणाली): कल्चुरियों ने पूरे छत्तीसगढ़ को 36 गढ़ों (किलों) में विभाजित किया था—18 गढ़ रतनपुर के अधीन और 18 गढ़ रायपुर के अधीन। इसी ’36 गढ़ों’ के कारण इस क्षेत्र का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा।
- सांस्कृतिक योगदान: कल्चुरी शासकों ने कई भव्य मंदिरों (जैसे महामाया मंदिर) का निर्माण कराया और साहित्य व कला को बढ़ावा दिया।
🚩 4. मराठा शासन: नागपुर के भोसलों का प्रभाव (1741-1854)
18वीं शताब्दी के मध्य में मराठा सेनापति भास्कर पंत ने कल्चुरियों को पराजित कर छत्तीसगढ़ पर मराठा आधिपत्य स्थापित किया।
- भोसले वंश: नागपुर के राजा बिंबाजी भोसले छत्तीसगढ़ के पहले मराठा शासक बने। उन्होंने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाया।
- प्रशासनिक सुधार (सूबा प्रणाली): मराठों ने छत्तीसगढ़ में ‘सूबा प्रणाली’ लागू की। विट्ठल दिनकर जैसे सूबेदारों ने यहाँ का शासन चलाया। हालाँकि, यह काल भारी करों और आर्थिक शोषण के लिए भी जाना जाता है।
🇬🇧 5. ब्रिटिश संरक्षण और साम्राज्य (1818-1947)
1818 में मराठों की हार के बाद छत्तीसगढ़ ब्रिटिश संरक्षण (Protectorate) में आ गया और अंततः 1854 में ‘व्यपगत का सिद्धांत’ (Doctrine of Lapse) के तहत सीधे ब्रिटिश नियंत्रण में चला गया।
- तहसीलदारी व्यवस्था: अंग्रेजों ने प्रशासनिक सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ को तहसीलों में विभाजित किया। रायपुर, बिलासपुर और धमतरी प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बने।
- ब्रिटिश प्रभाव: इसी काल में आधुनिक शिक्षा, रेलवे का विकास और ईसाई मिशनरियों का आगमन हुआ।
👑 6. छत्तीसगढ़ की पूर्व रियासतें और जमीन्दारियां
ब्रिटिश काल के दौरान छत्तीसगढ़ में 14 प्रमुख रियासतें और कई जमीन्दारियाँ थीं। ये रियासतें अर्ध-स्वतंत्र थीं।
- प्रमुख रियासतें: बस्तर, सरगुजा, रायगढ़, कांकेर, राजनांदगांव, जशपुर, खैरागढ़ आदि।
- बस्तर रियासत: यह क्षेत्र का सबसे बड़ा जनजातीय राज्य था, जहाँ काकतीय वंश का शासन था।
- जमीन्दारियाँ: सोनाखान जैसी जमीन्दारियों ने किसानों और स्थानीय जनता के बीच अपनी गहरी पैठ बनाई थी।
🔥 7. 1857 की क्रांति और शहीद वीर नारायण सिंह
छत्तीसगढ़ में 1857 की क्रांति की मशाल शहीद वीर नारायण सिंह ने जलाई।
- सोनाखान का विद्रोह: जब छत्तीसगढ़ में अकाल पड़ा, तो वीर नारायण सिंह ने व्यापारियों के अनाज गोदामों को खोलकर गरीबों में बांट दिया। अंग्रेजों ने उन्हें ‘राजद्रोह’ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जय स्तंभ चौक पर फांसी दे दी। वे छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद कहलाए।
- सैन्य विद्रोह: रायपुर की सैन्य छावनी में हनुमान सिंह ने अंग्रेजी अधिकारी की हत्या कर विद्रोह का नेतृत्व किया, जिन्हें ‘छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे’ कहा जाता है।
🇮🇳 8. छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता आन्दोलन (1900-1947)
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ पूरी तरह सक्रिय रहा।
- प्रमुख नेता: डॉ. खूबचंद बघेल, पंडित रविशंकर शुक्ल, ई. राघवेंद्र राव, वामनराव लाखे और महंत लक्ष्मीनारायण दास।
- प्रमुख घटनाएँ: 1920 का कंडेल नहर सत्याग्रह (जिसमें महात्मा गांधी का प्रथम छत्तीसगढ़ आगमन हुआ), 1930 का जंगल सत्याग्रह और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन।
🚜 9. श्रमिक, कृषक एवं जनजातीय आंदोलन
छत्तीसगढ़ की क्रांति केवल अंग्रेजों के खिलाफ नहीं थी, बल्कि यह शोषण के हर रूप के खिलाफ थी।
- जनजातीय विद्रोह: बस्तर का हलबा विद्रोह (1774), तारापुर विद्रोह, और भूमकाल विद्रोह (1910) (गुंडाधुर के नेतृत्व में) सबसे प्रमुख हैं। ये विद्रोह ‘जल-जंगल-जमीन’ की रक्षा के लिए थे।
- श्रमिक आंदोलन: राजनांदगांव की BNC मिल में हुआ श्रमिक आंदोलन (ठाकुर प्यारेलाल सिंह के नेतृत्व में) भारत के सबसे लंबे चलने वाले हड़तालों में से एक था।
- कृषक आंदोलन: लगान और बेगारी के खिलाफ छत्तीसगढ़ के किसानों ने निरंतर संघर्ष किया।
✨ 10. छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण: एक सपना सच हुआ
छत्तीसगढ़ राज्य की मांग 20वीं सदी की शुरुआत से ही होने लगी थी।
- प्रारंभिक प्रयास: 1924 में रायपुर जिला परिषद में पहली बार अलग राज्य का प्रस्ताव रखा गया। डॉ. खूबचंद बघेल ने छत्तीसगढ़ भातृ संघ का गठन किया।
- राजनीतिक संघर्ष: 1990 के दशक में यह मांग तीव्र हुई। मध्य प्रदेश विधानसभा और फिर भारतीय संसद में प्रस्ताव पारित हुआ।
- गठन: अंततः 1 नवंबर, 2000 को भारत के 26वें राज्य के रूप में ‘छत्तीसगढ़’ अस्तित्व में आया।
💡 निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ का इतिहास संघर्ष और सृजन का एक अनूठा संगम है। यहाँ के राजवंशों ने कला और संस्कृति को ऊंचाइयां दीं, तो यहाँ के क्रांतिकारियों ने स्वाभिमान के लिए प्राणों की आहुति दी। आज छत्तीसगढ़ अपनी इसी गौरवशाली विरासत की नींव पर एक आधुनिक और प्रगतिशील राज्य के रूप में खड़ा है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. छत्तीसगढ़ को ‘छत्तीसगढ़’ क्यों कहा जाता है?
कल्चुरी काल में इस क्षेत्र में 36 गढ़ (किले) थे, जिनके कारण इसका नाम छत्तीसगढ़ पड़ा।
2. छत्तीसगढ़ के ‘मंगल पांडे’ के रूप में किसे जाना जाता है?
रायपुर छावनी के क्रांतिकारी हनुमान सिंह को छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे कहा जाता है।
3. छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना किस तारीख को हुई थी?
1 नवंबर, 2000 को।
4. छत्तीसगढ़ का ‘स्वर्ण युग’ किस राजा के काल को कहा जाता है?
पांडु वंश के राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल को।
5. छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद कौन थे?
सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह।
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