HomeBlogलक्षद्वीप का संपूर्ण इतिहास और प्रशासनिक मार्गदर्शिका: एक लाख द्वीपों का रहस्य और प्राकृतिक स्वर्ग (Lakshadweep Full Guide 2026)

लक्षद्वीप का संपूर्ण इतिहास और प्रशासनिक मार्गदर्शिका: एक लाख द्वीपों का रहस्य और प्राकृतिक स्वर्ग (Lakshadweep Full Guide 2026)

भूमिका (Introduction):
नीलम जैसे नीले समंदर और मखमली सफेद रेत के बीच बसा लक्षद्वीप, भारत का सबसे छोटा लेकिन सबसे खूबसूरत केंद्र शासित प्रदेश है। अरब सागर में बिखरे ये द्वीप केवल पर्यटन का केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये भारत की सामरिक सुरक्षा और समुद्री विरासत का गौरवशाली हिस्सा हैं। हाल के वर्षों में, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद, लक्षद्वीप वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक “हॉटस्पॉट” बनकर उभरा है।

इस वृहद् लेख में हम SERVER IP TECHNOLOGY के विशेष शोध और श्री पुनाराम साहू सर के मार्गदर्शन में लक्षद्वीप के प्रशासनिक विवरण (जिलों, ब्लॉकों और गांवों की संख्या) का सूक्ष्म विश्लेषण करेंगे और इसके उस प्राचीन इतिहास को जानेंगे जिसने इसे विभिन्न संस्कृतियों का संगम बनाया। यदि आप लक्षद्वीप की “Full Jankari” (पूर्ण जानकारी) खोज रहे हैं, तो यह मार्गदर्शिका आपके लिए अंतिम गंतव्य है।


भाग 1: लक्षद्वीप का प्रशासनिक और भौगोलिक ढांचा (Administrative Statistics)

लक्षद्वीप का प्रशासनिक ढांचा बहुत ही अनूठा है। यह एक जिला वाला केंद्र शासित प्रदेश है, जिसका मुख्यालय कवरत्ती (Kavaratti) में स्थित है।

लक्षद्वीप जिला-वार प्रशासनिक डेटा (2026 अपडेटेड)

क्रमांकराज्य/यूटीजिलाब्लॉक्स की संख्यापंचायतों की संख्यागाँवों की संख्याविवरण लिंक
1लक्षद्वीपलक्षद्वीप जिला101010[LAKSHADWEEP FULL JANKARI]
योग1 जिला101010

प्रशासनिक संरचना का विस्तार:

  • प्रशासक (Administrator): चूंकि यह एक केंद्र शासित प्रदेश है, यहाँ का शासन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से चलाया जाता है।
  • आबाद द्वीप: कुल 36 द्वीपों में से केवल 10 द्वीपों पर मानव आबादी निवास करती है (अगत्ती, अमिनी, अन्द्रोत, बिट्रा, चेटलाट, कडमत, कल्पेनी, कवरत्ती, किल्टन और मिनिकॉय)।
  • ब्लॉक और पंचायत: प्रशासन को सुचारू बनाने के लिए इन 10 आबाद द्वीपों को ही 10 ब्लॉकों और 10 ग्राम पंचायतों में विभाजित किया गया है।

भाग 2: लक्षद्वीप का प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास (The Historical Odyssey)

लक्षद्वीप का इतिहास कहानियों, समुद्री व्यापार और धार्मिक परिवर्तनों की एक अद्भुत गाथा है।

2.1 प्रारंभिक निवास और चेरामन पे्रमल की किंवदंती

लक्षद्वीप के शुरुआती इतिहास का लिखित रिकॉर्ड बहुत कम मिलता है, लेकिन मौखिक परंपराओं के अनुसार, यहाँ के पहले निवासी केरल के अंतिम राजा चेरामन पे्रमल के काल में आए थे। कहा जाता है कि जब राजा मक्का की यात्रा पर निकले, तो उन्हें खोजने के लिए निकले जहाज तूफान में फंस गए और इन द्वीपों पर जा पहुँचे। अमिनी द्वीप इनमें से सबसे पहले बसाया गया द्वीप माना जाता है।

2.2 इस्लाम का आगमन और संत उबैदुल्लाह (7वीं शताब्दी)

लक्षद्वीप के सांस्कृतिक जीवन में सबसे बड़ा बदलाव 7वीं शताब्दी में आया। माना जाता है कि संत उबैदुल्लाह मक्का से समुद्र यात्रा के दौरान तूफान में फंसकर अमिनी द्वीप पहुँचे। उन्होंने यहाँ इस्लाम का प्रचार किया। आज लक्षद्वीप की लगभग 96% आबादी मुस्लिम है, लेकिन उनकी परंपराओं में आज भी प्राचीन केरल के सामाजिक रीति-रिवाजों की झलक मिलती है।

2.3 चोल और हिंदू राजवंशों का प्रभाव

11वीं शताब्दी के दौरान, महान चोल साम्राज्य के राजाओं ने इन द्वीपों पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया। बाद में, यह क्षेत्र केरल के कोल्लम के राजाओं और कन्नूर के अराककल (Arakkal) परिवार के नियंत्रण में रहा। मध्यकाल में यह द्वीप हिंद महासागर के व्यापारिक मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया था।


भाग 3: औपनिवेशिक काल और स्वतंत्रता का संघर्ष

3.1 पुर्तगाली क्रूरता और विद्रोह (16वीं शताब्दी)

पुर्तगाली नाविकों की नज़र लक्षद्वीप के उच्च गुणवत्ता वाले नारियल के रेशों (Coir) पर थी। 1498 में वास्को डी गामा के भारत आने के बाद पुर्तगालियों ने अमिनी द्वीप पर कब्जा कर लिया और स्थानीय लोगों पर अत्याचार किए। अंततः 1545 में द्वीपवासियों ने एकजुट होकर पुर्तगालियों को यहाँ से मार भगाया।

3.2 टीपू सुल्तान और ब्रिटिश राज (18वीं-19वीं शताब्दी)

1787 में अमिनी समूह के द्वीपों के लोगों ने मैसूर के शासक टीपू सुल्तान से मदद मांगी। टीपू सुल्तान ने यहाँ का प्रशासन संभाला, लेकिन 1799 में श्रीरंगपट्टनम की लड़ाई में उनकी वीरगति के बाद, यह द्वीप अंग्रेजों के अधीन आ गए। ब्रिटिश काल में लक्षद्वीप को ‘मालाबार’ प्रशासनिक क्षेत्र का हिस्सा बनाया गया।


भाग 4: स्वतंत्र भारत और आधुनिक लक्षद्वीप

  • 1956 का पुनर्गठन: आजादी के बाद, 1 नवंबर 1956 को भारत सरकार ने इसे एक अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया।
  • नामकरण: पहले इसे ‘लक्कादीव, मिनिकॉय और अमिनीद्वी’ के नाम से जाना जाता था, लेकिन 1973 में इसका नाम आधिकारिक रूप से “लक्षद्वीप” कर दिया गया।
  • विकास: आज लक्षद्वीप डिजिटल साक्षरता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में भारत के अग्रणी क्षेत्रों में से एक है।

भाग 5: लक्षद्वीप की सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताएँ

लक्षद्वीप की संस्कृति “मिश्रित विरासत” का उत्कृष्ट उदाहरण है।

  1. मातृवंशीय प्रणाली (Matrilineal System): लक्षद्वीप के समाज में आज भी ‘मरुमक्कथयम’ (Marumakkathayam) जैसी व्यवस्था के अवशेष मिलते हैं, जहाँ संपत्ति और वंश का उत्तराधिकार महिलाओं के माध्यम से चलता है।
  2. भाषा: अधिकांश द्वीपों पर ‘मलयालम’ की एक उपभाषा बोली जाती है, लेकिन मिनिकॉय द्वीप पर ‘माहल’ (Mahl) भाषा बोली जाती है, जो मालदीव की भाषा से मिलती-जुलती है।
  3. लोक नृत्य: ‘लावा’ (Lava) और ‘कोलकाली’ (Kolkali) यहाँ के प्रसिद्ध पारंपरिक नृत्य हैं, जो यहाँ के उत्सवों में जान फूंक देते हैं।
  4. कोरल रीफ (Coral Reefs): लक्षद्वीप पूरी तरह से मूंगा द्वीपों (Atolls) से बना है। इसकी जैव विविधता और रंगीन मछलियाँ इसे गोताखोरी (Scuba Diving) के लिए दुनिया का सर्वश्रेष्ठ स्थान बनाती हैं।

भाग 6: प्रमुख द्वीप और पर्यटन स्थल (Mini Travel Guide)

  • कवरत्ती: लक्षद्वीप की राजधानी, जो अपनी सुंदर मस्जिदों और जल-क्रीड़ाओं के लिए प्रसिद्ध है।
  • अगत्ती: यहाँ लक्षद्वीप का एकमात्र हवाई अड्डा है। इसके लैगून का नीला पानी आपकी आँखों को सुकून देता है।
  • मिनिकॉय: यह दक्षिणतम द्वीप है, जो अपनी विशेष संस्कृति और ऊंचे लाइटहाउस के लिए जाना जाता है।
  • कडमत: यह ‘इको-टूरिज्म’ का केंद्र है, जहाँ सबसे अच्छे कोरल पाए जाते हैं।

भाग 7: भविष्य की चुनौतियाँ और संरक्षण (2026 विजन)

जैसे-जैसे लक्षद्वीप में पर्यटन बढ़ रहा है, पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी चुनौती बन गया है।

  • तटीय कटाव: समुद्र के बढ़ते जलस्तर से द्वीपों को बचाने के लिए कड़े उपाय किए जा रहे हैं।
  • प्लास्टिक मुक्त लक्ष्य: लक्षद्वीप प्रशासन इसे भारत का पहला पूर्णतः प्लास्टिक मुक्त केंद्र शासित प्रदेश बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
  • सतत विकास: ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy) के तहत मछली पालन और समुद्री संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग प्राथमिकता है।

✅ निष्कर्ष (Conclusion)

लक्षद्वीप केवल 32 वर्ग किलोमीटर का भू-भाग नहीं है, बल्कि यह भारत के संकल्प और प्राकृतिक वैभव की कहानी है। 10 द्वीपों और 10 पंचायतों का यह छोटा सा परिवार पुर्तगाली गुलामी से लेकर आधुनिक विकास तक के सफर का साक्षी रहा है। इसका इतिहास समुद्री व्यापार और अदम्य साहस का संगम है।

यदि आप शांति, शुद्ध हवा और नीले समंदर की तलाश में हैं, तो लक्षद्वीप आपका स्वागत करता है। यह भारत का वह अनमोल हीरा है जिसे सहेज कर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – Google Ranking के लिए

1. लक्षद्वीप जाने के लिए परमिट की आवश्यकता क्यों होती है?
स्थानीय जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए गैर-निवासियों को लक्षद्वीप जाने के लिए ‘एंट्री परमिट’ लेना अनिवार्य होता है।

2. लक्षद्वीप की राजधानी क्या है?
लक्षद्वीप की राजधानी कवरत्ती (Kavaratti) है।

3. लक्षद्वीप के लोग कौन सी भाषा बोलते हैं?
यहाँ मुख्य रूप से मलयालम बोली जाती है, लेकिन मिनिकॉय द्वीप पर ‘माहल’ भाषा का प्रयोग होता है।

4. लक्षद्वीप में कुल कितने द्वीप हैं?
लक्षद्वीप में कुल 36 द्वीप हैं, जिनमें से केवल 10 पर आबादी रहती है।

5. लक्षद्वीप पुर्तगालियों से कब मुक्त हुआ?
स्थानीय विद्रोह के बाद 1545 में पुर्तगालियों को यहाँ से भगा दिया गया था।


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