भूमिका:
साहित्य ह समाज के दरपन आय। कोनो भी जुग म साहित्यकार मन अपन लेखनी ले समाज म होवत बदलाव, पीरा अउ उल्लास ल उकेरे के काम करथें। एक समय रिहिसे जब छत्तीसगढ़ी साहित्य म सिरिफ प्रकृति वर्णन अउ भक्ति के गूँज रिहिस, फेर आज के समय म पुनाराम साहू ‘अंधियारखोर’ (नवागढ़, बेमेतरा) अइसन साहित्यकार मन आगू आवत हावयं, जेन मन समाज के नस-नस ल पहिचानथें।
ओकर नवा कहानी संग्रह ‘परसार के गउंदन’ (Prasar Ke Gaundan) म १३ अइसन कहानियाँ हावय, जेन हमर छत्तीसगढ़ी ग्रामीण जीवन के संगे-संग आज के ज्वलंत समस्या मन ऊपर करारा चोट करथे। ये पोस्ट म हम ये कहानी संग्रह के गहिराई म जाबो अउ जानबो कि कइसे एक-एक कहानी ह कोनो न कोनो संदेश देथे।
📚 परसार के गउंदन: कहानी संग्रह के एक नजर म
ये संग्रह म १३ कहानियाँ शामिल हावय:
- परसार के गउंदन (शीर्षक कहानी)
- गोबरहिन डोकरी (सियानी अक्कल अउ संघर्ष)
- चुगलाहा (सामाजिक बुराई ऊपर प्रहार)
- मनटोरा (अधूरी प्रेमकथा अउ त्याग)
- लाली चूरी (बाल विवाह के अभिशाप)
- ईनाम (शिक्षा के अँजोर)
- दनगरा (जमीन दलाल मन के उत्पात)
- मइके के सुरता (माईलोगिन मन के अंतर्मन के पीरा)
- दुरपती
- मया अउ माया
- सुख के दिन
- जंगल के पै (नक्सल समस्या अउ संवेदनशीलता)
- सइताहा
🕯️ प्रमुख कहानियों के विस्तृत विश्लेषण अउ सारांश
1. गोबरहिन डोकरी: सियानी मति ह दरिदरी ल दूरिहा दिस
ये कहानी हमर गाँव के ओ सियान मन के प्रतीक आय, जेन मन पढ़े-लिखे तो नइ राहय फेर ओकर अनुभव के कोठार ह गजब भरे रिथे। सुकवारो डोकरी ह दिन भर गोबर बिन के अपन जिनगी गुजारथे। कहानी म जब गाँव म चोरी होथे अउ ‘मोहर’ के बात आथे, त डोकरी ह अपन बुद्धि ले कइसे चोर मन ल बचाथे अउ ओ धन ल गाँव भर म बाँट के ‘असाढ़’ के भुखमरी ले गाँव ल बचा लेथे, ये देखाय गे हावय।
- संदेश: बुराई ले घलोक भलाई के रद्दा निकाले जा सकथे, बसरते मति (बुद्धि) साफ होना चाहिये।
2. मनटोरा: मया, त्याग अउ बिधाता के लेखा
‘मनटोरा’ एक अइसन प्रेमकथा आय जेन पाठक के हिरदे ल छू लेथे। लछमन अउ मनटोरा के मया ह जब पारिवारिक अउ सामाजिक परिस्थिति के भेंट चढ़ जाथे, त लछमन ह कइसे ‘रमता जोगी’ बन जाथे। अपन मयारु ल अपन छोटे भाई के बहू के रूप म देखना ओकर बर ‘मुड़ म टंगिया परगे’ बरोबर रिहिस।
- भाव: ये कहानी छत्तीसगढ़ी समाज म रिश्ता-नाता अउ ओकर मर्यादा ल सुंदर ढंग ले उकेरे गे हावय।
3. चुगलाहा: समाज ल घुन कस खावत चारी-चुगली
गाँव ल सुनता अउ सद्भावना के जगह माने जाथे, फेर ‘चुगलाहा’ कहानी म कोतवाल अउ थानादार के मिलीभगत ले कइसे छोटे-छोटे घरेलू झगरा मन ल थाना-कचेरी तक ले जाके गाँव के एकता ल छिन्न-भिन्न करे जाथे, तेकर सजीव चित्रण हावय।
- मुद्दा: ये कहानी आज के ‘नियतखोर’ प्रशासन अउ आपसी फूट ऊपर बड़ हमला करथे।
4. मइके के सुरता: बेटी के हिरदे के गूँज
छत्तीसगढ़ी संस्कृति म तीजा-पोरा के बड़ महत्व हावय। सातो नाम के पात्र के माध्यम ले लेखक ह बताइस हे कि कइसे संपत्ति के लालच म भाई-बहिनी के मया म दरार आ जाथे। मइके ले तीजा लेवइया के अगोरा करना अउ अंत म सिरिफ ‘सुरता’ (याद) म चुरना, हर ओ बेटी के पीरा आय जेकर मइके छूट गे हावय।
- संस्कृति: तीजा, पोरा, मातर अउ मड़ई के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी जन-जीवन के झलक।
5. ईनाम: लइका मन के जिद अउ शिक्षा के महत्व
जाड़ के दिन म स्कूल जाय बर नखरा करत किसन अउ ओला मनावत ओकर दाई कुंती। ये कहानी हर घर के किस्सा आय। दाई-ददा भले नइ पढ़े हावयं, फेर लइका ल पढ़ा के ‘ईनाम’ के लायक बनाना ओकर सपना होथे।
- उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्र म शिक्षा के अँजोर फैलाना।
6. लाली चूरी अउ दनगरा: आज के ज्वलंत समस्या
- लाली चूरी: बाल विवाह कइसे आज घलोक अभिशाप बने हावय, तेला उकेरे गे हावय।
- दनगरा: छत्तीसगढ़ राज बने के बाद जमीन के दलाल मन कइसे सीधा-साधा किसान मन ल ठगत हावयं, ये कहानी ओकर ‘चाल-चरित्र’ ल उजागर करथे।
🚩 छत्तीसगढ़ी साहित्य म ‘नक्सल’ समस्या के गूँज
लेखक पुनाराम साहू जी ह अपन लेखनी म सिरिफ मया-पिरीत ल नइ उकेरे हे, बल्कि ‘जंगल के पै’ अइसन कहानी के माध्यम ले राज्य के सबले बड़े समस्या ‘नक्सलवाद’ ऊपर घलोक कलम चलाए हे। एक संवेदनशील साहित्यकार समाज के पीरा ले कइसे अछूता रहि सकथे? ये कहानी ओकर बौद्धिक गहराई ल बताथे।
✍️ लेखक के परिचय: पुनाराम साहू ‘अंधियारखोर’
- पता: ग्राम अंधियारखोर, नवागढ़, जिला बेमेतरा (छ.ग.) ४९१३३७
- संपर्क: ७५०९०१८१५१
- विशेषता: छत्तीसगढ़ी भाखा-बोली म गजब के पकड़। ओकर कहानी म छत्तीसगढ़ी हाना, मुहावरा, अउ जनऊला के अइसन प्रयोग मिलथे, मानो साक्षात छत्तीसगढ़ बोलत हावय।
💎 ‘परसार के गउंदन’ संग्रह के साहित्यिक विशेषता
- भाखा शैली: शुद्ध छत्तीसगढ़ी। कोनो बनावटीपन नइहे। जेठ के घाम अउ सावन के झड़ी बरोबर भाखा म मया अउ कोरापन हावय।
- पात्र चित्रण: कहानियों के पात्र हमर आस-पास के लोगन मन कस लगथें। गोबरहिन डोकरी होवत ते चुगलाहा कोतवाल।
- यथार्थवाद: लेखक ह सिरिफ ‘कल्पना’ के महल नइ खड़ा करे हे, बल्कि खेत-खार, बियारा, कोठा, अउ थाना-कचेरी के असली चेहरा देखाय हे।
- लोक तत्व के प्रयोग: हाना (लोकोक्तियाँ) अउ मुहावरा के प्रयोग ले कहानी म ‘रस’ भर गे हावय।
✅ निष्कर्ष
‘परसार के गउंदन’ सिरिफ १३ कहानियों के संग्रह नोहे, बल्कि ये हमर छत्तीसगढ़ी अस्मिता के दस्तावेज आय। पुनाराम साहू जी के ये प्रयास ह छत्तीसगढ़ी साहित्य ल नवा ऊँचाई प्रदान करही। ये किताब ल हर छत्तीसगढ़िया ल पढ़ना चाहिये ताकि हम अपन समाज के बुराई ल जान सकन अउ अच्छाई ल अपन जिनगी म उतार सकन।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. ‘परसार के गउंदन’ पुस्तक के लेखक कौन हैं?
इसके लेखक पुनाराम साहू ‘अंधियारखोर’ (नवागढ़, बेमेतरा) हैं।
2. इस कहानी संग्रह में कुल कितनी कहानियाँ हैं?
इस संग्रह में कुल 13 कहानियाँ हैं जो विभिन्न सामाजिक विषयों पर आधारित हैं।
3. ‘गोबरहिन डोकरी’ कहानी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह कहानी बुजुर्गों के अनुभव (सियानी अक्कल) और कठिन समय में सूझबूझ से काम लेने की प्रेरणा देती है।
4. छत्तीसगढ़ी साहित्य में इस पुस्तक का क्या महत्व है?
यह पुस्तक आधुनिक समस्याओं जैसे जमीन दलाली, नक्सलवाद और बाल विवाह को छत्तीसगढ़ी ग्रामीण परिवेश में बड़ी ही संवेदनशीलता से उठाती है।
5. लेखक से संपर्क कैसे किया जा सकता है?
आप लेखक पुनाराम साहू जी से उनके मोबाइल नंबर 7509018151 पर संपर्क कर सकते हैं।
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