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Software Kya Hai? Types of Software & Operating System Notes in Hindi (2026 Guide)

Introduction

क्या आप जानते हैं कि आपका कम्प्यूटर या मोबाइल बिना Software के एक खाली डिब्बे (Plastic Box) जैसा है? हम रोज कम्प्यूटर पर काम करते हैं, गाने सुनते हैं और इंटरनेट चलाते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि Software क्या है (What is Software in Hindi)? और यह हार्डवेयर से बात कैसे करता है?

अगर आप Computer Student हैं या किसी Competitive Exam की तैयारी कर रहे हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए “Notes” का काम करेगी।

इस पोस्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि System Software, Application Software और Utility Software में क्या अंतर है? Operating System (OS) कैसे काम करता है? और Multiprogramming vs Multiprocessing क्या होता है?

चलिए, कम्प्यूटर की इस दुनिया को आसान भाषा में समझते हैं।


Program और Software क्या हैं? (Basic Concept)

Software को समझने से पहले हमें “प्रोग्राम” को समझना होगा।

1. Program (प्रोग्राम):
कम्प्यूटर खुद कुछ नहीं सोच सकता। उसे हर काम के लिए निर्देश (Instructions) देने पड़ते हैं। किसी निश्चित क्रम (Sequence) में लिखे गए निर्देशों के समूह को Program कहते हैं।

  • ये प्रोग्राम किसी न किसी Programming Language (C, C++, Java, Python) में लिखे जाते हैं।
  • इन्हें एक फाइल में सेव किया जाता है जिसे कम्प्यूटर Execute (रन) करता है।

2. Source Code vs Object Code:

  • Source Code: जब कोई User या Programmer “High Level Language” (जैसे English जैसे शब्दों में) कोड लिखता है, तो उसे Source Code कहते हैं।
  • Object Code: कम्प्यूटर इंग्लिश नहीं समझता, वह सिर्फ मशीनी भाषा (0 और 1) समझता है। इसलिए, सिस्टम के सॉफ्टवेयर (Translators) उस Source Code को “Machine Code” में बदलते हैं। इस बदले हुए कोड को Object Code कहा जाता है।

3. Software (सॉफ्टवेयर):
कम्प्यूटर में प्रयोग होने वाले बहुत सारे प्रोग्राम्स के समूह (Group of Programs) को Software कहते हैं।

  • सॉफ्टवेयर यूजर और हार्डवेयर के बीच एक Interface (पुल) का काम करता है।
  • बिना सॉफ्टवेयर के हार्डवेयर (Monitor, CPU, Keyboard) किसी काम के नहीं हैं।
  • सॉफ्टवेयर की मदद से हम एक ही कार्य को बार-बार (Loop) दोहरा सकते हैं बिना किसी गलती के।


Types of Software (सॉफ्टवेयर के प्रकार)

मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर को तीन भागों में बांटा जा सकता है:

  1. System Software (सिस्टम सॉफ्टवेयर)
  2. Application Software (एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर)
  3. Utility Software (यूटिलिटी सॉफ्टवेयर)

नीचे हम एक-एक करके इनको विस्तार से समझेंगे।


1. System Software: कम्प्यूटर की “आत्मा”

ऐसे प्रोग्राम्स का समूह जो कम्प्यूटर सिस्टम की आंतरिक क्रियाओं (Internal Operations) को नियंत्रित करता है, उसे System Software कहते हैं।

इसे आप कम्प्यूटर का मैनेजर कह सकते हैं। ये प्रोग्राम सीधे Machine Level पर काम करते हैं और हार्डवेयर को नियंत्रित करते हैं। मजे की बात यह है कि Application Software (जैसे MS Word) को चलाने के लिए भी System Software का होना जरूरी है। यह Application Software के लिए एक “आधार” (Base) तैयार करता है।

System Software के मुख्य उदाहरण:

  • Operating System (OS)
  • Utility Programs
  • Translators (Compiler/Interpreter)
  • Subroutines

System Software के मुख्य कार्य (Functions)

  1. I/O Management: इनपुट और आउटपुट डिवाइस (कीबोर्ड, प्रिंटर) के प्रोसेस को संभालना।
  2. Device Communication: सभी पेरीफेरल डिवाइसेज (Monitor, Disk, Printer) के बीच संपर्क बनाना।
  3. Memory Management: किस प्रोग्राम को कितनी मेमोरी (RAM) देनी है, यह तय करना।
  4. Scheduling: कौन सा काम पहले होगा और कौन सा बाद में, यह तय करना।

(A) Operating System (OS) – The Master Control Program

Operating System एक मास्टर कंट्रोल प्रोग्राम है। यह पूरे कम्प्यूटर का “बॉस” होता है। जिस तरह ट्रैफिक पुलिस चौराहे पर गाड़ियों को कंट्रोल करती है, ठीक वैसे ही Operating System कम्प्यूटर के ट्रैफिक (Data और Instructions) को कंट्रोल करता है।

यह User को एक ऐसा वातावरण (Interface) देता है, जिससे वह कम्प्यूटर मशीन से बात कर सके। जब भी आप कम्प्यूटर ऑन करते हैं, तो सबसे पहले जो प्रोग्राम लोड होता है, वह Operating System ही है।

Functions of Operating System (OS के 10 महत्वपूर्ण कार्य)

एक OS कम्प्यूटर में “Manager” की भूमिका निभाता है। इसके कार्य निम्नलिखित हैं:

1. Processor Management (CPU का समय बांटना)
OS यह तय करता है कि किस प्रोग्राम को CPU का कितना समय मिलेगा। इसे Scheduling कहते हैं। यह “Round Robin Method” जैसी तकनीकों का उपयोग करता है ताकि सभी प्रोग्राम्स को बारी-बारी से प्रोसेस होने का मौका मिले और कम्प्यूटर कभी भी Hang न हो।

2. Memory Management
जब आप कोई गेम या सॉफ्टवेयर खोलते हैं, तो उसे चलने के लिए RAM की जरूरत होती है। OS यह तय करता है कि:

  • डाटा को मेमोरी में कहाँ स्टोर करना है।
  • किस प्रोग्राम को कितनी मेमोरी एलोकेट (Allocate) करनी है।
  • ताकि एक प्रोग्राम का डाटा दूसरे प्रोग्राम के साथ मिक्स न हो।

3. Input-Output Management
कीबोर्ड से डाटा लेना (Read), उसे मेमोरी में सेव करना और फिर मॉनिटर या प्रिंटर पर दिखाना (Write) — यह सारा काम OS ही मैनेज करता है।

4. File Management
आपकी फाइल्स हार्ड डिस्क में कहाँ सेव हैं, उन्हें एक फोल्डर से दूसरे फोल्डर में मूव करना, नाम बदलना (Rename) या डिलीट करना, यह सब OS की देखरेख में होता है।

5. Communication (संपर्क)
यह User और Machine के बीच “Translator” या पुल का काम करता है। इसके बिना हम हार्डवेयर को निर्देश नहीं दे सकते।

6. Data Security (सुरक्षा)
OS यह सुनिश्चित करता है कि आपका डाटा सुरक्षित रहे। यह पासवर्ड सुरक्षा प्रदान करता है और एक यूजर के डाटा को दूसरे यूजर से अलग रखता है।

7. Job Priority (प्राथमिकता तय करना)
कम्प्यूटर में कई काम एक साथ चल रहे होते हैं। OS यह तय करता है कि कौन सा काम सबसे जरूरी है (High Priority) और किसे बाद में किया जा सकता है।

8. Resource Allocation (संसाधनों का आवंटन)
OS तय करता है कि किस डिवाइस (प्रिंटर, स्कैनर) का उपयोग किस यूजर द्वारा और कब किया जाएगा।

9. Activity Monitoring
सिस्टम में क्या चल रहा है, कोई एरर तो नहीं है, सिस्टम की हेल्थ कैसी है—OS इन सब पर नजर रखता है।

10. Error Handling
अगर किसी प्रोग्राम में गड़बड़ी है या प्रिंटर में कागज नहीं है, तो OS तुरंत स्क्रीन पर Error Message दिखाता है ताकि यूजर उसे ठीक कर सके।


Types of Operating System (ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार)

समय के साथ OS बहुत बदल गए हैं। मुख्य प्रकार इस प्रकार हैं:

1. Single User Operating System

  • इसमें एक बार में केवल एक ही प्रोग्राम चलता है।
  • एक समय में केवल एक ही व्यक्ति काम कर सकता है।
  • Example: MS-DOS (Disk Operating System)।

2. Single User Multitasking Operating System

  • यह आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
  • इसमें यूजर एक हो सकता है, लेकिन वह एक साथ कई प्रोग्राम चला सकता है। (जैसे: गाने सुनते हुए वर्ड में टाइपिंग करना)।
  • इसमें पिछले प्रोग्राम को बंद करना जरूरी नहीं होता।
  • Example: Windows 95, 98, Windows 10, Windows 11.

3. Multi-User Operating System

  • इसमें एक समय में एक से अधिक लोग (Users) काम कर सकते हैं।
  • यह मुख्य रूप से “Server” पर आधारित होता है। सारा डाटा एक मेन कम्प्यूटर (Server) पर होता है और बाकी कम्प्यूटर (Terminals) उससे जुड़े होते हैं।
  • Example: UNIX, Linux, Windows Server 2000.

4. Network Operating System

  • इसका काम कई कम्प्यूटर्स को आपस में जोड़ना (Networking) है ताकि वे फाइल और प्रिंटर शेयर कर सकें।
  • Example: Windows NT, Novell Netware.

Concepts of Operating System (महत्वपूर्ण अवधारणाएं)

एग्जाम में अक्सर इन तीन टर्म्स (Terms) के बारे में पूछा जाता है:

(1) Multi-Programming (मल्टी प्रोग्रामिंग)

पुराने समय में CPU बहुत समय तक खाली (Idle) बैठा रहता था क्योंकि Input/Output डिवाइस धीमे होते थे। इस समस्या को दूर करने के लिए मल्टी-प्रोग्रामिंग आई।

  • Concept: मुख्य मेमोरी (RAM) में एक साथ कई प्रोग्राम लोड कर दिए जाते हैं।
  • CPU पहले प्रोग्राम पर काम करता है, जैसे ही पहला प्रोग्राम I/O (जैसे प्रिंटिंग) के लिए जाता है, CPU खाली बैठने के बजाय तुरंत दूसरे प्रोग्राम को प्रोसेस करने लगता है।
  • इसमें Foreground Partition (उच्च प्राथमिकता वाले काम) और Background Partition (कम प्राथमिकता वाले काम) होते हैं।
  • फायदा: CPU का उपयोग बढ़ जाता है और काम तेजी से होता है। इसे Concurrent Programming भी कहते हैं।

(2) Multi-Processing (मल्टी प्रोसेसिंग)

  • Concept: “Multi” मतलब “कई” और “Processing” मतलब “Processor/CPU”।
  • जब एक कम्प्यूटर में दो या दो से अधिक CPU (Processors) एक साथ जुड़े होते हैं, तो उसे मल्टी-प्रोसेसिंग कहते हैं।
  • यहाँ एक बड़े काम को टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग प्रोसेसर को दे दिया जाता है।
  • इसे Parallel Processing भी कहते हैं।
  • फायदा: अगर एक CPU खराब भी हो जाए, तो काम नहीं रुकता, दूसरे CPU काम संभाल लेते हैं। स्पीड बहुत तेज हो जाती है।

(3) Batch Processing (बैच प्रोसेसिंग)

  • यह पुराना (Offline) तरीका है।
  • इसमें यूजर का कम्प्यूटर से सीधा संपर्क (Interactive) नहीं होता।
  • Concept: सभी एक जैसे कार्यों (Jobs) को इकट्ठा करके एक “बैच” (Batch) या समूह बनाया जाता है। फिर उस पूरे बैच को कम्प्यूटर में प्रोसेस करने के लिए डाल दिया जाता है।
  • एक बार बैच अंदर गया, तो यूजर बीच में कुछ नहीं कर सकता। परिणाम (Output) भी बाद में एक साथ मिलता है।
  • Example: बैंक में चेक क्लियरेंस या बिजली का बिल बनना (जहाँ लाखों बिल एक साथ प्रोसेस होते हैं)।

[Internal Link: ये भी पढ़ें 👉 Computer Memory क्या है? RAM और ROM में अंतर]


(B) Utility Software: कम्प्यूटर का “डॉक्टर” और “सफाईकर्मी”

Utility Software को अक्सर “Service Program” या “Tool” कहा जाता है। ये ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जो कम्प्यूटर के Hardware और Software की Maintenance (रखरखाव) करते हैं।

हालांकि ये कम्प्यूटर चलाने के लिए अनिवार्य नहीं हैं (जैसे OS है), लेकिन सिस्टम की Speed और Safety के लिए ये बहुत जरूरी हैं।

प्रमुख Utility Software और उनके कार्य:

  1. Antivirus (एंटीवायरस): यह कम्प्यूटर को बाहरी वायरस, मैलवेयर और हैकर्स से बचाता है। (Example: QuickHeal, Norton).
  2. Backup Program: अगर आपका डाटा डिलीट हो जाए या हार्ड डिस्क खराब हो जाए, तो बैकअप सॉफ्टवेयर आपके डाटा की कॉपी सुरक्षित रखता है।
  3. File Manager: फाइलों को सही तरीके से मैनेज करना, सर्च करना और व्यवस्थित करना।
  4. Disk Defragmenter: जब हम फाइलों को बार-बार सेव और डिलीट करते हैं, तो हार्ड डिस्क में जगह बिखर (Fragment) जाती है। यह टूल उन खाली जगहों को भरकर फाइलों को एक साथ रखता है, जिससे कम्प्यूटर की स्पीड बढ़ती है।
  5. Disk Cleaner: यह बेकार (Temporary) फाइलों को ढूंढकर डिलीट करता है ताकि स्पेस खाली हो सके।
  6. Data Compression: यह बड़ी फाइलों के साइज को छोटा (Zip) करता है ताकि वे कम जगह लें।

(C) Other System Programs (अन्य सिस्टम प्रोग्राम्स)

  1. Subroutines:
    ये प्रोग्राम के छोटे टुकड़े होते हैं जो बार-बार इस्तेमाल होते हैं। प्रोग्रामर इन्हें बार-बार लिखने के बजाय एक बार “Subroutine” बना लेता है और जब जरूरत होती है, उसे “Call” कर लेता है। इससे प्रोग्राम छोटा और समझने में आसान हो जाता है।
  2. Diagnostic Routines:
    ये हार्डवेयर की जांच करने वाले प्रोग्राम हैं। अगर आपके कम्प्यूटर की रैम या कीबोर्ड में कोई खराबी है, तो ये प्रोग्राम उसे पकड़ते हैं और Error बताते हैं।
  3. Translator Programs:
    जैसा हमने शुरू में पढ़ा, ये High Level Language (User की भाषा) को Machine Language (Binary) में बदलते हैं।
    • Compiler: पूरे प्रोग्राम को एक बार में बदलता है।
    • Interpreter: एक-एक लाइन करके बदलता है।
    • Assembler: असेंबली भाषा को मशीन भाषा में बदलता है।

2. Application Software (एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर)

यह वो सॉफ्टवेयर है जिसका इस्तेमाल “User” अपने किसी विशेष काम को करने के लिए करता है। अगर System Software “आधार” है, तो Application Software उस पर बनी “इमारत” है।

इसके दो मुख्य प्रकार होते हैं:

1. General Purpose Software (सामान्य उद्देश्य):
ये वो सॉफ्टवेयर हैं जो करोड़ों लोग अपनी सामान्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल करते हैं।

  • MS Word: टाइपिंग के लिए।
  • MS Excel: हिसाब-किताब के लिए।
  • Photoshop: फोटो एडिट करने के लिए।
  • VLC Player: वीडियो देखने के लिए।

2. Special Purpose Software (विशिष्ट उद्देश्य):
ये किसी खास कंपनी या काम के लिए विशेष रूप से बनाए जाते हैं। हर कोई इनका इस्तेमाल नहीं करता।

  • School Management Software (फीस और रिजल्ट के लिए)।
  • Hotel Booking Software.
  • Medical Billing Software.
  • Payroll System (सैलरी बनाने के लिए)।


Table: System Software vs Application Software

यहाँ एक नज़र में अंतर समझें:

FeatureSystem SoftwareApplication Software
काम क्या है?कम्प्यूटर को चलाना और मैनेज करना।यूजर का कोई विशेष काम करना।
जरूरतइसके बिना कम्प्यूटर ऑन भी नहीं होगा।इसके बिना कम्प्यूटर चल सकता है।
InstallationOS इंस्टॉल करते समय अपने आप आते हैं।यूजर अपनी जरूरत के अनुसार डालता है।
ExampleWindows, Linux, CompilersMS Office, Chrome, PubG
Complexityबनाना कठिन है (Low Level Coding)।बनाना आसान है (High Level Coding)।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: System Software और Application Software में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
System Software कम्प्यूटर के हार्डवेयर को चलाता है (जैसे Windows), जबकि Application Software यूजर के काम (जैसे Letter टाइप करना) में मदद करता है।

Q2: Utility Software के उदाहरण क्या हैं?
Antivirus (जैसे Norton), WinZip, Disk Cleanup, और Backup Software यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के सबसे अच्छे उदाहरण हैं।

Q3: क्या हम बिना Operating System के कम्प्यूटर चला सकते हैं?
बिल्कुल नहीं। Operating System के बिना हार्डवेयर एक बेजान मशीन है। यह यूजर और हार्डवेयर के बीच की कड़ी है।

Q4: Multiprogramming और Multiprocessing में क्या अंतर है?
Multiprogramming में एक CPU कई प्रोग्राम्स को (बारी-बारी से) चलाता है। जबकि Multiprocessing में कई CPU मिलकर काम करते हैं।

Q5: Source Code क्या होता है?
इंसानों द्वारा समझी जाने वाली भाषा (C, Java) में लिखे गए कोड को Source Code कहते हैं। इसे मशीन नहीं समझती, इसे मशीन कोड में बदलना पड़ता है।


Conclusion (निष्कर्ष)

दोस्तों, आज हमने जाना कि Software केवल कोड का समूह नहीं है, बल्कि यह कम्प्यूटर की जान है। Operating System हमारे हर क्लिक को मशीन तक पहुंचाता है, और Utility Software हमारे सिस्टम को दुरुस्त रखता है।

अगर आप एग्जाम में अच्छे नंबर लाना चाहते हैं, तो System Software के Functions और OS Concepts (Multiprogramming/Multiprocessing) को अच्छे से याद कर लें।

उम्मीद है आपको यह “Software और OS के नोट्स” पसंद आए होंगे। अगर आपका कोई सवाल है, तो नीचे Comment में जरूर पूछें।

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