क्या आप जानते हैं कि भारत का एक ऐसा हिस्सा भी है जहाँ ‘वेलेंटाइन डे’ से सैकड़ों साल पहले से प्रेमी जोड़ों के लिए “घोटुल” जैसी परंपराएं हैं, और जहाँ दीवाली पर दीये जलाने से ज्यादा “पशु धन” की पूजा का महत्व है?
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की। यहाँ के आदिवासी (Tribals) अपने जीवन का हर एक पल प्रकृति (Nature) के साथ बिताते हैं। उनके तीज-त्यौहार एसी कमरों में नहीं, बल्कि साल और सागौन के घने जंगलों, देवगुड़ी और खुले आसमान के नीचे मनाए जाते हैं।
अगर आप CGPSC या व्यापम की तैयारी कर रहे छात्र हैं, या फिर एक ऐसे पर्यटक जो बस्तर की आदिम संस्कृति को करीब से देखना चाहते हैं, तो यह “Ultimate Festival Guide” आपके लिए ही है।
Note: नीचे दी गई लिस्ट में ‘गोबर बोहरानी’ और ‘काकसार’ जैसे त्यौहार इतने अनोखे हैं कि इनके बारे में पढ़कर आप हैरान रह जाएंगे।
📋 Quick Summary (Tribal Culture at a Glance)
समय कम है? तो यहाँ छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति का पूरा निचोड़ देखिये:
- मूल मंत्र: प्रकृति ही ईश्वर है (Nature is God)।
- प्रमुख क्षेत्र: बस्तर (दक्षिण) और सरगुजा (उत्तर)।
- सबसे लंबा त्यौहार: बस्तर दशहरा (75 दिन) और बाली बरड़ (3 महीने)।
- सबसे प्रसिद्ध त्यौहार: हरेली, पोला, कर्मा और माटी तिहार।
- विशेषता: यहाँ हर त्यौहार खेती (Agriculture) और शिकार (Hunting) से जुड़ा है।
- मुख्य प्रसाद: महुआ, चावल, और बीज।
📊 Chhattisgarh Tribal Festivals Calendar (Data Table)
Google और पाठकों की सुविधा के लिए, यहाँ सभी प्रमुख त्यौहारों, संबंधित जनजातियों और मनाने के समय की एक तुलनात्मक टेबल है:
| त्यौहार (Festival) | संबंधित जनजाति/क्षेत्र | मनाने का समय (Month) | मुख्य उद्देश्य (Purpose) |
| माटी तिहार | बस्तर के आदिवासी | चैत्र (मार्च-अप्रैल) | मिट्टी और बीज की पूजा |
| चरू जातरा | गोंड/बैगा | — | कृषि भूमि पूजा (केवल पुरुष) |
| गाँचा पर्व | बस्तर (जगदलपुर) | आषाढ़ (जून-जुलाई) | रथ यात्रा और तुपकी चलाना |
| हरेली/अमूस | समस्त छत्तीसगढ़ | सावन अमावस्या | कृषि औजार और पशु औषधि |
| नवाखानी | गोंड, उरांव, हलबा | भादो (अगस्त-सितंबर) | नई फसल का स्वागत |
| कर्मा | उरांव, बैगा, गोंड | भादो शुक्ल एकादशी | कर्म देवता की पूजा |
| सरहुल | उरांव जनजाति | चैत्र (अप्रैल) | साल वृक्ष और सूर्य विवाह |
| गोबर बोहरानी | छिंदगढ़ (बस्तर) | चैत्र मास | 10 दिनों तक गोबर फेंकना |
| काकसार | अबुझमाड़िया | गर्मी-बरसात के मध्य | गोत्र देव पूजा और नृत्य |
| छेरछेरा | समस्त छत्तीसगढ़ | पौष पूर्णिमा | नई फसल और दान |
🌿 Introduction: प्रकृति और आदिवासी जीवन का अटूट बंधन
छत्तीसगढ़ को “जनजातियों का गढ़” कहा जाता है। यहाँ की लगभग 32% आबादी आदिवासी है। इनके त्यौहार आधुनिक चकाचौंध से दूर, मिट्टी की खुशबू से सराबोर होते हैं।
शहरी त्यौहार जहाँ तारीखों (Dates) से चलते हैं, वहीं आदिवासी त्यौहार ऋतुओं (Seasons) और फसल चक्र (Crop Cycle) से चलते हैं। बीज बोने से लेकर फसल काटने तक, और महुआ बीनने से लेकर शिकार पर जाने तक—हर गतिविधि एक उत्सव है।
इनके त्यौहारों में तीन चीजें अनिवार्य हैं:
- देवगुड़ी: गाँव के देवता का स्थान।
- नृत्य-संगीत: मांदर और ढोल की थाप।
- सामूहिकता: पूरा गाँव एक साथ मिलकर जश्न मनाता है।
🗺️ Deep Dive: प्रमुख आदिवासी पर्व (विस्तृत विवरण)
आइये, अब हम छत्तीसगढ़ के इन रंग-बिरंगे त्यौहारों की दुनिया में गहराई से उतरते हैं और हर एक पर्व की बारीकियों को समझते हैं।
1. माटी तिहार (Mati Tihar) – मिट्टी की वंदना
यह बस्तर संभाग का सबसे पवित्र और पहला त्यौहार माना जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह ‘माटी’ यानी मिट्टी के प्रति कृतज्ञता जताने का पर्व है।
- कब और क्यों: यह चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) में मनाया जाता है। आदिवासी मानते हैं कि मिट्टी ही हमें अनाज देती है, इसलिए बीज बोने से पहले उसकी अनुमति लेना और उसे तृप्त करना जरुरी है।
- विधि: गाँव के पुजारी (गायकता/सिरहा) माटी देवगुड़ी परिसर में कुएं जैसा एक छोटा गड्ढा खोदते हैं। इसमें एक विशेष रस्म के तहत ‘सियासी रस्सी’ से बंधी हुई मिट्टी और बीज धान को अर्पित किया जाता है।
- बीजपुटनी: इसे ‘बीजपुटनी’ भी कहते हैं क्योंकि इस पूजा के बाद ही किसान अपने खेतों में बीजों का छिड़काव शुरू करते हैं। प्रसाद के रूप में भी किसानों को बीज धान मिलता है, जिसे वे अपनी फसल में मिलाते हैं ताकि पैदावार अच्छी हो।
2. चरू जातरा (Charu Jatra) – पुरुषों का पर्व
यह पर्व थोड़ा रहस्यमयी और विशिष्ट है क्योंकि इसमें लैंगिक विभाजन (Gender Separation) देखने को मिलता है।
- उद्देश्य: यह मुख्य रूप से कृषि भूमि की उर्वरता और सुरक्षा के लिए मनाया जाता है।
- विशेषता: इस पर्व में महिलाओं का शामिल होना पूर्णतः वर्जित है। यह केवल पुरुषों का त्यौहार है।
- बलि प्रथा: आदिवासी अपनी जमीन को संतुष्ट करने के लिए मुर्गा, बकरा, कबूतर और बत्तख (हांसा) की बलि देते हैं। मान्यता है कि रक्त अर्पण से धरती उपजाऊ होती है और बुरी आत्माएं दूर रहती हैं।
3. दियारी तिहार (Diyari Tihar) – पशुधन का सम्मान
दीपावली के आसपास मनाया जाने वाला यह त्यौहार विशुद्ध रूप से पशुओं को समर्पित है।
- किसकी पूजा: इसमें उस विशेष स्थान (गौठान या विश्राम स्थल) की पूजा की जाती है जहाँ चरवाहे (राउत) दोपहर में गाय-बैलों को आराम करवाते हैं।
- महत्व: आदिवासी जीवन पशुओं के बिना अधूरा है। दियारी के दिन पशुओं को नहलाया जाता है, उन्हें खिचड़ी खिलाई जाती है और मोर पंख व सोहाई (गले का आभूषण) से सजाया जाता है।
4. लक्ष्मी जगार (Laxmi Jagar) – धान ही बेटी है
यह पर्व बस्तर की संस्कृति की कोमलता और नारी सम्मान का अद्भुत उदाहरण है। यहाँ ‘धन’ का मतलब पैसा नहीं, बल्कि ‘धान’ (Paddy) है।
- अवधारणा: आदिवासी समाज धान की बाली को अपनी ‘बेटी’ या ‘कन्या’ मानता है।
- अनुष्ठान: खेत से धान की बालियों को बड़े आदर और गाजे-बाजे के साथ घर लाया जाता है। इसे ‘जगार घर’ या ‘दूल्हा घर’ में लाया जाता है।
- विवाह: यहाँ एक प्रतीकात्मक विवाह रचाया जाता है। लक्ष्मी का प्रतीक ‘धान की बाली’ और भगवान विष्णु का प्रतीक ‘नारियल’ (जो जगार घर में स्थापित होता है) के बीच विवाह संपन्न होता है। यह मनुष्य और प्रकृति के बीच के प्रेम को दर्शाता है।
5. अमूस तिहार (Amus Tihar) – आदिवासियों की पशु चिकित्सा
इसे पूरे छत्तीसगढ़ में ‘हरेली’ के नाम से जाना जाता है, लेकिन बस्तर और कुछ जनजातीय क्षेत्रों में इसे ‘अमूस’ के रूप में एक विशेष उद्देश्य से मनाया जाता है।
- समय: सावन माह की अमावस्या (हरेली अमावस्या)।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: यह त्यौहार आदिवासियों के “Veterinary Science” (पशु चिकित्सा विज्ञान) का प्रमाण है। बरसात के मौसम में पशुओं को बीमारियां ज्यादा होती हैं।
- औषधि पूजा: इस दिन जंगल से जड़ी-बूटियां लाई जाती हैं। विशेष रूप से ‘रसना’ और ‘शतावरी’ के पौधों की पूजा की जाती है और उन्हें पशुओं को खिलाया जाता है ताकि वे साल भर निरोगी रहें।
6. नवाखानी (Navakhani) – नई फसल का स्वागत
जैसे उत्तर भारत में बैसाखी है, वैसे ही छत्तीसगढ़ और ओडिशा में नवाखानी (नवाखाई) है।
- समय: यह भादो माह (अगस्त-सितंबर) के शुक्ल पक्ष से लेकर पूर्णिमा तक अलग-अलग गाँवों में सुविधानुसार मनाया जाता है।
- नियम: आदिवासी परंपरा में कड़े नियम हैं—जब तक नवाखानी की पूजा नहीं हो जाती, तब तक कोई भी नई फसल (नया चावल) को मुंह नहीं लगा सकता।
- पूजा: सबसे पहले नई फसल को ग्राम देवी, कुल देवी और पूर्वजों (Ancestors) को अर्पित किया जाता है। इसके बाद पूरा परिवार साथ बैठकर नए चावल का भोजन ग्रहण करता है। यह अन्न के प्रति सम्मान जताने का तरीका है।
7. गोंचा पर्व (Goncha Parv) – बस्तर की रथयात्रा
यह त्यौहार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। यह जगदलपुर (बस्तर) की पहचान है।
- इतिहास: इसकी शुरुआत काकतीय वंशीय राजा पुरुषोत्तम देव की जगन्नाथ पुरी की तीर्थयात्रा से जुड़ी है। उन्हें पुरी के राजा ने ‘रथ पति’ की उपाधि दी थी।
- विधि: आषाढ़ माह में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को रथ में बिठाकर जगदलपुर में घुमाया जाता है।
- तुपकी (Tupki): इस त्यौहार का सबसे मजेदार हिस्सा ‘तुपकी’ है। यह बांस की बनी एक देसी पिस्तौल (Toy Gun) होती है, जिसमें ‘पेंग’ (एक जंगली फल) को गोली की तरह इस्तेमाल किया जाता है। आदिवासी एक-दूसरे पर सम्मानपूर्वक (और मजाक में) तुपकी चलाते हैं।
8. गोबर बोहरानी (Gobar Bohrani) – अनोखा गोबर युद्ध
यह त्यौहार आपको स्पेन के ‘Tomatina Festival’ की याद दिला सकता है, बस फर्क यह है कि यहाँ टमाटर नहीं, गोबर का इस्तेमाल होता है।
- स्थान: दक्षिण बस्तर का छिन्दगढ़ विकासखंड (सुकमा जिला)।
- अवधि: यह चैत्र मास में लगातार 10 दिनों तक चलता है।
- प्रक्रिया:
- पहले ग्राम देवी की स्थापना और शस्त्र पूजा होती है।
- फिर पुरुष शिकार के लिए जंगल जाते हैं।
- वापस आकर, एक विशेष गड्ढे में लोग रोज थोड़ा-थोड़ा गोबर इकट्ठा करते हैं।
- अंतिम दिन: 10वें दिन असली धमाल होता है। लोग उस गड्ढे के गोबर को एक-दूसरे पर फेंकते हैं (जैसे होली में रंग)।
- अपशब्द: इस दौरान हंसी-मजाक में एक-दूसरे को गालियां (अपशब्द) देने की भी परंपरा है, जिसका कोई बुरा नहीं मानता।
- निष्कर्ष: अंत में, उस पवित्र गोबर को उठाकर लोग अपने खेतों में डालते हैं, जिससे फसल अच्छी होती है।
9. छेरछेरा (Cherchera) – दान का महापर्व
यह त्यौहार छत्तीसगढ़ की उदारता का प्रतीक है। “छेरछेरा, कोठी के धान ल हेर हेरा” (छेरछेरा है, अपनी कोठी से धान निकालकर दो)—ये आवाजें पौष पूर्णिमा को हर गली में गूंजती हैं।
- समय: फसल कटने के बाद, पौष माह की पूर्णिमा को।
- स्वरूप: यह सिर्फ बच्चों का खेल नहीं, बल्कि एक सामाजिक उत्सव है। लोक कलाकारों की टोलियां, बच्चे और युवा घर-घर जाते हैं।
- दान: गृहस्वामी उन्हें नई फसल का धान, चावल या नकद राशि दान करते हैं। आदिवासी मानते हैं कि इस दिन दान देने से घर के भंडार कभी खाली नहीं होते।
- नकटा-नकटी: इस पर्व में नृत्य करने वाले पुरुष को ‘नकटा’ और महिला को ‘नकटी’ कहा जाता है। जमा की गई राशि से बाद में पूरे गाँव के लिए ‘वनभोज’ (Picnic) का आयोजन होता है।
10. बाली बरड़ (Bali Baral) – सबसे लंबा त्यौहार
यह त्यौहार धैर्य और भक्ति की परीक्षा है। यह मुख्य रूप से हलबा और भतरा जनजातियों में लोकप्रिय है।
- अवधि: यह लगातार 3 महीने तक चलता है। इसे मनाने का कोई निश्चित समय नहीं है, गाँव वाले अपनी सुविधा और आर्थिक स्थिति देखकर इसे आयोजित करते हैं।
- देवता: यह भीमादेव को समर्पित है।
- खर्च: इसमें बहुत अधिक धन खर्च होता है, इसलिए पूरा गाँव मिलकर चंदा (Contribution) इकट्ठा करता है।
- रोमांच: इस पर्व में दिन-रात नाचना-गाना चलता है। सबसे खास दृश्य तब होता है जब आदिवासियों के शरीर में देवता की सवारी (Trance) आती है। देव आविष्ट लोग झूमते हैं, और देवियां कांटों के झूले (Scourge) पर झूलती हैं, जो एक रोंगटे खड़े कर देने वाला दृश्य होता है। यहाँ सेमल की लकड़ी का एक विशाल स्तंभ भी स्थापित किया जाता है।
11. बासी तिहार (Basi Tihar) – विदाई का जश्न
‘बासी’ का अर्थ है पुराना या बचा हुआ। यह पर्व साल के त्यौहारों के समापन का संकेत है।
- समय: सामान्यतः अप्रैल महीने में (चैत्र-वैशाख)।
- स्वरूप: यह वर्ष का अंतिम बड़ा त्यौहार माना जाता है। इस दिन लोग पुरानी बातों को भुलाकर, साल भर की थकान मिटाते हैं और सिर्फ मौज-मस्ती, नाच-गाना करते हैं।
12. भीमा जात्रा (Bhima Jatra) – मेंढक विवाह
यह पर्व विशुद्ध रूप से मानसून (Monsoon) को बुलाने के लिए है।
- समय: जेठ (Jyeshtha) माह की तपती गर्मी में।
- विवाह: इस पर्व में वर्षा के देवता ‘भीमा देव’ का विवाह प्रतीकात्मक रूप से ‘धरती माता’ से कराया जाता है।
- मेंढक विवाह: बस्तर के कई इलाकों में बच्चे मेंढक और मेंढकी को पकड़कर लाते हैं और विधि-विधान से उनका विवाह कराते हैं। मान्यता है कि जब मेंढक बोलते हैं (टराते हैं), तो इंद्रदेव खुश होकर बारिश करते हैं।
13. काकसार/ककसाड़ (Kaksad) – गोत्र और युवा उत्सव
यह बस्तर की अबूझमाड़िया (Abujhmadia), दोरला और दंडामी माड़िया जनजातियों का विशिष्ट पर्व है।
- समय: माटी तिहार के बाद, गर्मी और बरसात के बीच में।
- उद्देश्य: अच्छी फसल की कामना और ‘गोत्र देव’ (Clan Deity) की पूजा।
- नृत्य: काकसार नृत्य बहुत प्रसिद्ध है। इसमें युवक और युवतियां अपनी सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा में सजते हैं।
- जीवनसाथी: इस पर्व का एक सामाजिक पहलू भी है। नृत्य और उत्सव के दौरान अविवाहित युवक-युवतियां अपने लिए जीवनसाथी का चुनाव करते हैं।
14. करमा (Karma) – कर्म ही पूजा है
यह सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि झारखंड और मध्य प्रदेश की जनजातियों (उरांव, बैगा, गोंड, बिंझवार) का भी सबसे बड़ा त्यौहार है।
- दर्शन: इसका मूल मंत्र है—”कर्म की प्रधानता”। यह पर्व श्रम साधना और मेहनत का उत्सव है।
- समय: भादो माह (बरसात) में, जब धान की रोपाई खत्म हो जाती है।
- करम वृक्ष: गाँव के अखाड़े में ‘करम’ (Kadam/Adina cordifolia) पेड़ की टहनी गाड़ी जाती है। इसे राजा करम माना जाता है।
- नृत्य: रात भर करमा नृत्य चलता है। मांदर की थाप पर ‘झूमर’ और ‘राग’ गाए जाते हैं। यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का भी प्रतीक है।
15. आमाखयी (Amakhayi) – आम का त्यौहार
बस्तर के आदिवासियों का प्रकृति प्रेम इस त्यौहार में झलकता है।
- जनजाति: मुख्य रूप से धुरवा और परजा जनजातियां।
- नियम: जैसे नवाखानी में नया चावल नहीं खाते, वैसे ही आमाखयी से पहले आदिवासी पेड़ों पर लगे आम को नहीं तोड़ते और न ही खाते हैं।
- पूजा: जब आम फलने लगते हैं, तो सबसे पहले उसे तोड़ा जाता है और वन देवी/देवताओं को अर्पित किया जाता है। इसके बाद ही समाज आम खाना शुरू करता है। यह प्रकृति के ‘प्रदाता’ (Provider) रूप का सम्मान है।
16. सरहुल (Sarhul) – फूलों का त्यौहार
यह उरांव (Oraon) जनजाति का सबसे प्रमुख पर्व है। यह प्रकृति के पुनर्जीवन (Rebirth of Nature) का उत्सव है।
- समय: चैत्र माह (अप्रैल), जब साल (Sal) के पेड़ों पर नए फूल (सरई फूल) आते हैं।
- विवाह: इस दिन सूर्य देव (धर्मेश) और धरती माता का प्रतीकात्मक विवाह रचाया जाता है।
- प्रतीक: मुर्गे को सूर्य का प्रतीक और काली मुर्गी को धरती माता का प्रतीक माना जाता है।
- महत्व: यह बताता है कि सूर्य की गर्मी और धरती की उर्वरता के मिलन से ही जीवन संभव है। आदिवासी कानों में सरई का फूल लगाते हैं और सरहुल नृत्य करते हैं।
✅ Pros & Cons: आदिवासी पर्वों का महत्व और चुनौतियां (Trust Box)
आदिवासी संस्कृति को समझना केवल तारीफ करना नहीं, बल्कि उसकी वर्तमान स्थिति को जानना भी है:
| 💚 अच्छाई (Pros – The Good) | 🛑 चुनौतियां (Cons – The Bad) |
| पर्यावरण संरक्षण: हर त्यौहार (अमूस, सरहुल, माटी तिहार) प्रकृति और पेड़ों को बचाने का संदेश देता है। | बलि प्रथा: चरू जातरा और अन्य पर्वों में मूक पशुओं की बलि दी जाती है, जो आधुनिक समाज में विवाद का विषय हो सकता है। |
| सामुदायिक एकता: छेरछेरा और बाली बरड़ जैसे पर्व पूरे गाँव को अमीर-गरीब का भेद मिटाकर एक करते हैं। | खर्चीले आयोजन: बाली बरड़ जैसे त्यौहारों में अत्यधिक धन खर्च होता है, जिससे कभी-कभी आदिवासी कर्ज में डूब जाते हैं। |
| जैविक खेती: गोबर बोहरानी और माटी तिहार जैसी परंपराएं रसायनिक खाद की जगह जैविक खाद (Manure) को बढ़ावा देती हैं। | आधुनिकता का असर: डीजे (DJ) संस्कृति और शहरीकरण के कारण मांदर की थाप और पारंपरिक गीत धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। |
❓ Frequently Asked Questions (FAQ)
पर्यटकों और छात्रों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:
Q1: बस्तर का सबसे लंबा चलने वाला त्यौहार कौन सा है?
Ans: बस्तर दशहरा 75 दिनों तक चलता है, लेकिन जनजातीय पर्वों में ‘बाली बरड़’ लगभग 3 महीने तक मनाया जाता है।
Q2: ‘तुपकी’ किस त्यौहार में चलाई जाती है?
Ans: तुपकी (बांस की बंदूक) गोंचा पर्व (जगदलपुर की रथयात्रा) में चलाई जाती है। यह आषाढ़ माह में होता है।
Q3: कौन सा त्यौहार केवल पुरुषों द्वारा मनाया जाता है?
Ans: ‘चरू जातरा’ एक ऐसा पर्व है जिसमें महिलाओं का शामिल होना वर्जित है।
Q4: हरेली और अमूस में क्या अंतर है?
Ans: दोनों एक ही दिन (सावन अमावस्या) मनाए जाते हैं। मैदानी इलाकों में इसे ‘हरेली’ कहते हैं जहाँ कृषि औजारों की पूजा होती है, जबकि बस्तर में इसे ‘अमूस’ कहते हैं जहाँ पशु औषधियों (जड़ी-बूटियों) की पूजा मुख्य होती है।
Q5: मेंढक और मेंढकी का विवाह किस त्यौहार में होता है?
Ans: यह भीमा जात्रा (Bhima Jatra) या मेंढका विवाह उत्सव में होता है, जो अच्छी बारिश के लिए किया जाता है।
👋 Conclusion & Call to Action (निष्कर्ष)
छत्तीसगढ़ के आदिवासी तीज-त्यौहार (Tribal Festivals) सिर्फ नाच-गाने का नाम नहीं है। यह एक जीवन पद्धति (Way of Life) है जो हमें सिखाती है कि इंसान का अस्तित्व प्रकृति के बिना असंभव है।
जहाँ दुनिया ‘ग्लोबल वार्मिंग’ से लड़ रही है, वहीं हमारे आदिवासी सदियों से ‘माटी तिहार’ और ‘सरहुल’ मनाकर धरती को बचा रहे हैं। ‘गोबर बोहरानी’ का खेल हो या ‘छेरछेरा’ का दान—हर परंपरा में एक विज्ञान और एक मानवीय संदेश छिपा है।
आपका विचार:
क्या आपने कभी बस्तर का ‘गोंचा पर्व’ देखा है या ‘तुपकी’ चलाई है? या फिर आप ‘हरेली’ पर गेड़ी चढ़े हैं?
अपने अनुभव और यादें नीचे Comment Box में जरूर साझा करें। हमें जानकर खुशी होगी! 👇
- कंप्यूटर सामान्य ज्ञान क्विज़ (भाग 3)
- कंप्यूटर सामान्य ज्ञान क्विज़ (भाग 2)
- Best Computer Institute in India – Server IP Technology (Govt. Regd.)
- हे गुरुदेव! मैं आपकी शरण में हूँ: एक शिष्य की भावपूर्ण पुकार
- Server IP Technology: अंधियारखोर का No.1 कंप्यूटर इंस्टिट्यूट | Web Development, DCA, PGDCA और Tally सीखें एक्सपर्ट्स से
- THE ULTIMATE INSURANCE ENCYCLOPEDIA 2026
- Kalki Avatar 2026: The Hidden Messiah Among Us
- 15+ Best AI Tools for Automated Video Editing in 2026: Create Viral Content in Minutes
- Top 5 Cloud Hosting Providers for High Traffic Sites (2026 Edition): Scale to Millions
- Best CRM Software for Real Estate Agents 2026: The Ultimate Comparison Guide
- Corporate Lawyer for Small Business Startups: The Definitive 2026 Legal Guide
- What to do after a Truck Accident: The Ultimate Legal & Recovery Guide 2026
- Top Mesothelioma Lawyers 2026: How to Claim Compensation for Asbestos Exposure
- How to Refinance Student Loans 2026: Lower Interest Rates & Save Money [Step-by-Step]
- Personal Loans for Freelancers No Income Proof 2026: Instant Approval Apps & Banks [Full Guide]
- Best Credit Cards for Rebuilding Credit in 2026: A Complete Roadmap to Financial Recovery
- The Comprehensive Guide to Finding Affordable Life Insurance with Pre-existing Conditions (2026 Edition)
- The Ultimate Guide to Best Auto Insurance for Young Drivers (2026)
- Best Laptops for Engineering Students 2026: Coding, CAD & Gaming [Full Review]
- 50+ Best Free Online Courses with Certificates 2026: Upskill Yourself Today [Verified List]
- Chartered Accountant (CA) Course Details 2026: Fees, Duration & Syllabus [Full Guide]
- Artificial Intelligence Career Path 2026: Salary, Roadmap & Future in India [Full Guide]
- How to Make a Resume for First Job 2026: Free Templates & Examples [Fresher Guide]
- UPSC vs SSC CGL: Which is Better, Tougher & High Paying? [Full Comparison 2026]
- PMP Certification Guide 2026: Cost, Exam Pattern & Career Benefits [Full Review]
- How to Become a Pilot in India 2026: Fees, Eligibility & Salary [Complete Roadmap]
- Top 10 Highest Paying Jobs in India for Freshers 2026: Salary & Skills [Full List]
- PM Yashasvi Scholarship Scheme 2026: Eligibility, Apply Online & Benefits [Full Guide]
- Best Life Insurance Plans for Child Education 2026: High Returns & Benefits [Full Review]
- Student Credit Cards in India 2026: Best Options, Benefits & How to Apply [No Income Proof]
- Top 10 Banks for Education Loan in India 2026: Lowest Interest Rate & Process [Full Comparison]
- Vidya Lakshmi Portal 2026: How to Apply for Education Loan Online [Complete Guide]
- How to Get Education Loan for Study Abroad without Collateral 2026: Banks, Interest Rates & Process [Full Guide]
- SBI Education Loan Process, Interest Rate & Documents Required 2026 [Full Guide]
- Scholarships for Indian Students to Study in USA 2026: Fully Funded List [Official Guide]
- Top 5 Exams for Study Abroad after 12th: SAT, TOEFL, IELTS & More [2026 Guide]
- MBBS in Russia vs India 2026: Fees, Validity & Reality Check [Full Comparison]
- Visions Canada: The Ultimate Guide (Reviews, Careers, Locations & Legitimacy 2026)
- USA Student Visa Interview Questions & Answers 2026: F1 Visa Success Guide [Cracked]
- How Can You Study in UK Without IELTS? (The Criteria)
- Total Cost of Studying in Canada 2026: Fees, GIC & Living Expenses [Full Breakdown]
- Ultimate Guide to IELTS Preparation at Home 2026: Study Plan, Tips & Free Resources [Band 8+ Strategy]
- CGPSC Free Test Series 2026: Mock Tests, Old Papers & Full Preparation [Server IP Technology]
- Best English Speaking Apps for Students 2026: Free vs Paid [Full Review]
- Python Full Course for Beginners 2026: Free Resources, Roadmap & Projects [Zero to Hero]
- Online BBA vs Regular BBA: Which is Best in 2026? Fees, Value & Scope [Full Comparison]
- AWS Cloud Computing Certification Path for Beginners 2026: Salary, Roadmap & Exam Guide [Full Review]
- Free Digital Marketing Course by Google 2026: Certificate & How to Apply [Step-by-Step]
- Top 10 Data Science Courses with Placement Guarantee 2026: Fees & Review [Updated List]
- Best Online MBA Colleges in India 2026: Fees, Placements & Ranking [Full Review]
- श्री राम शलाका प्रश्नावली सम्पूर्ण विधि | राम जी देंगे तुरंत उत्तर | शुभ-अशुभ संकेत
- छत्तीसगढ़ की विवाह
