HomeBlogसरगुजा संभाग का संपूर्ण इतिहास और भूगोल (2026): छत्तीसगढ़ का उत्तरी प्रहरी [Full Guide]

सरगुजा संभाग का संपूर्ण इतिहास और भूगोल (2026): छत्तीसगढ़ का उत्तरी प्रहरी [Full Guide]

क्या आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़ का वह कौन सा हिस्सा है जिसे ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है और जहाँ आज भी विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशाला जीवित है?

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं सरगुजा संभाग (Sarguja Division) की। यह क्षेत्र सिर्फ घने जंगलों और पहाड़ों का समूह नहीं है, बल्कि यह वह मुकुट है जिसने छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक संपदा को सदियों से सहेज कर रखा है। सरगुजा का नाम आते ही मन में मैनपाट की ठंडी हवाएं, अमृतधारा जलप्रपात का शोर और रामगढ़ की पहाड़ियों का रहस्य तैरने लगता है।

चाहे आप CGPSC/Vyapam की तैयारी कर रहे एक छात्र हों या प्रकृति प्रेमी पर्यटक, सरगुजा संभाग को समझे बिना छत्तीसगढ़ का ज्ञान अधूरा है। इस पोस्ट में हम सरगुजा के 6 जिलों, इसके बनने की कहानी और यहाँ के अनूठे ‘पाट’ प्रदेशों का विस्तृत पोस्टमार्टम करेंगे।

Note: नीचे दी गई जानकारी में ‘मैनपाट’ और ‘रामगढ़’ के बारे में जो तथ्य दिए गए हैं, वे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, उन्हें गौर से पढ़ें।


📋 Quick Summary (Sarguja at a Glance)

अगर आपके पास समय कम है, तो सरगुजा संभाग की मुख्य जानकारी यहाँ एक नजर में देखिये:

  • गठन: 1 अप्रैल 2008 (बिलासपुर संभाग से अलग होकर)।
  • मुख्यालय: अम्बिकापुर (Ambikapur)।
  • कुल जिले: 06 (सरगुजा, कोरिया, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, MCB)।
  • भौगोलिक पहचान: पूर्वी बघेलखण्ड का पठार और पाट प्रदेश।
  • मुख्य आकर्षण: मैनपाट (छत्तीसगढ़ का शिमला), रामगढ़ (प्राचीन नाट्यशाला)।
  • खनिज: कोयला (Coal) और बॉक्साइट (Bauxite) का विशाल भंडार।
  • प्रशासनिक दर्जा: क्षेत्रफल में दूसरा और जनसंख्या में चौथा बड़ा संभाग।

📊 सरगुजा संभाग: जिलों का प्रशासनिक और तुलनात्मक विश्लेषण

सरगुजा संभाग की शक्ति इसके जिलों में निहित है। नीचे दी गई टेबल आपको यहाँ के प्रशासनिक ढांचे को समझने में मदद करेगी:

क्र.जिलागठनमुख्यालयविशेष पहचान
1.सरगुजा1948अम्बिकापुरसंभाग का मुख्यालय, मैनपाट स्थित है।
2.कोरिया1998बैकुंठपुरहसदेव नदी का उद्गम, गौरलाटा चोटी।
3.जशपुर1998जशपुर नगरपाट प्रदेश, चाय के बागान, सबसे बड़ा जिला।
4.सूरजपुर2012सूरजपुरतमोर पिंगला अभयारण्य, कुदरगढ़ी माता।
5.बलरामपुर2012बलरामपुरतातापानी (गर्म जल स्रोत), सेमरसोत।
6.MCB2022मनेन्द्रगढ़अमृतधारा जलप्रपात, नवीनतम जिला।

🏛️ सरगुजा का ऐतिहासिक सफर: रियासतों से संभाग तक

सरगुजा का इतिहास केवल तारीखों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और स्वाभिमान की गाथा है।

1. ब्रिटिश काल और बंगाल प्रांत (1818-1905):
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1818) के बाद, जब मराठों की शक्ति क्षीण हुई, तब सरगुजा क्षेत्र अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गया। उस समय यह छत्तीसगढ़ का हिस्सा नहीं था, बल्कि बंगाल प्रांत (Bengal Presidency) के अधीन आता था। यह एक रणनीतिक क्षेत्र था जो बंगाल और मध्य भारत को जोड़ता था।

2. मध्य प्रांत में स्थानांतरण (1905):
प्रशासनिक सुगमता के लिए, 1905 में सरगुजा की 5 रियासतों—चांगभखार, कोरिया, सरगुजा, जशपुर और उदयपुर—को बंगाल प्रांत से हटाकर ‘मध्य प्रांत’ (Central Provinces) में शामिल किया गया। यही वह समय था जब सरगुजा का जुड़ाव आधुनिक छत्तीसगढ़ के साथ मज़बूत हुआ।

3. आजादी और विलय (1948):
भारत की आजादी के बाद, 1 जनवरी 1948 को सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से इन पांचों रियासतों का भारत संघ में विलय हुआ। उस समय इन्हें छत्तीसगढ़ के बिलासपुर संभाग का हिस्सा बनाया गया था।

4. नए संभाग का उदय (2008):
बढ़ती जनसंख्या और भौगोलिक विशालता को देखते हुए, प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के लिए 1 अप्रैल 2008 को बिलासपुर संभाग को विभाजित किया गया और सरगुजा संभाग का गठन हुआ। अम्बिकापुर को इसका केंद्र बनाया गया।


🏞️ भौगोलिक संरचना: बघेलखण्ड का पठार और पाट प्रदेश

सरगुजा संभाग की बनावट इसे पूरे भारत में विशिष्ट बनाती है। यहाँ की जमीन को मुख्य रूप से दो भौतिक प्रदेशों में बांटा गया है:

1. पूर्वी बघेलखण्ड का पठार (Eastern Baghelkhand Plateau)

  • विस्तार: यह संभाग के लगभग 16.16% (छत्तीसगढ़ के कुल क्षेत्रफल का) हिस्से को कवर करता है।
  • विशेषता: यह क्षेत्र मुख्य रूप से गोंडवाना चट्टानों से बना है, जिस कारण यहाँ कोयले के विशाल भंडार पाए जाते हैं।
  • नदियां: सोन, रिहंद और कन्हार नदियां इस क्षेत्र की जीवन रेखा हैं।

2. पाट प्रदेश (The Pat Regions) – छत्तीसगढ़ के ऊँचे शिखर

पाट प्रदेश का अर्थ है—ऊँचे, सपाट और टेबल की तरह दिखने वाले पठार। यह सरगुजा की सबसे बड़ी भौगोलिक विशेषता है।

  • मैनपाट: इसे “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहा जाता है। यह रिहंद नदी का उद्गम स्थल है।
  • जमीरपाट: यहाँ बॉक्साइट का सबसे बड़ा भंडार पाया जाता है।
  • जारंगपाट: यह भी बॉक्साइट के लिए प्रसिद्ध है।
  • सामरीपाट: यहाँ छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी ‘गौरलाटा’ (1225 मीटर) स्थित है, जो बलरामपुर जिले में आती है।

🎨 कला, संस्कृति और जनजातीय जीवन

सरगुजा की असली पहचान इसके लोगों और उनकी परंपराओं में है। यहाँ का जनजातीय जीवन प्रकृति के साथ एक सुंदर संतुलन बनाता है।

प्रमुख जनजातियाँ:
सरगुजा में गोंड, कंवर, उरांव, पंडो, पहाड़ी कोरवा और नगेसिया जैसी प्रमुख जनजातियाँ रहती हैं। ‘पंडो’ जनजाति को तो राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र भी कहा जाता है।

लोक नृत्य और संगीत:

  1. करमा नृत्य: यह सरगुजा का राष्ट्रीय नृत्य जैसा है। नई फसल आने की खुशी और करम देवता की पूजा में पुरुष और महिलाएं साथ मिलकर नाचते हैं।
  2. सैला नृत्य: यह डंडा नृत्य है जो पुरुषों द्वारा किया जाता है, इसमें अद्भुत तालमेल देखने को मिलता है।
  3. सुआ नृत्य: दीपावली के समय महिलाएं बाँस की टोकरी में तोता (सुआ) रखकर नाचती हैं और गौरा-गौरी की पूजा करती हैं।

गोदना कला: सरगुजा की आदिवासी महिलाएं शरीर पर गोदना (Tattoo) गुदवाना अनिवार्य मानती हैं। यह न केवल सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि उनके सामाजिक और धार्मिक विश्वास का हिस्सा भी है।


🏔️ मैनपाट: छत्तीसगढ़ का शिमला और मिनी तिब्बत

मैनपाट सरगुजा का सबसे प्रमुख गौरव है। 1152 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र गर्मियों में भी ठंडा रहता है।

  • मिनी तिब्बत (Little Tibet): 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद, जब तिब्बती शरणार्थी भारत आए, तो भारत सरकार ने उन्हें मैनपाट की शांत वादियों में बसाया। आज यहाँ सुंदर बौद्ध मठ (Monasteries) और तिब्बती हस्तशिल्प देखने को मिलते हैं।
  • उल्टा पानी (Magnetic Point): यहाँ पानी का बहाव नीचे से ऊपर की ओर होता है और गाड़ियाँ अपने आप ढलान की ओर खिंची चली आती हैं। यह गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों को चुनौती देता प्रतीत होता है।
  • दलगली (Bouncing Land): यहाँ की जमीन दलदली है और पैर रखने पर स्पंज की तरह ऊपर-नीचे होती है। बच्चे यहाँ कूदने का खूब आनंद लेते हैं।

🗿 ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व: रामगढ़ की पहाड़ियाँ

अम्बिकापुर-रायपुर मार्ग पर स्थित रामगढ़ की पहाड़ियाँ इतिहास और साहित्य का संगम हैं।

  • विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला: यहाँ ‘सीताबेंगरा’ गुफा स्थित है, जिसे दुनिया की सबसे पुरानी थिएटर (Amphitheater) माना जाता है। यहाँ पत्थरों को काटकर बैठने की जगह बनाई गई है।
  • जोगीमारा गुफा: यहाँ मौर्य कालीन भित्ति चित्र (Murals) और ब्राह्मी लिपि में लेख मिलते हैं। यह प्रेम कथाओं और देवदासी प्रथा के साक्ष्य प्रस्तुत करती है।
  • महाकवि कालिदास का संबंध: कहा जाता है कि कालिदास ने अपने सुप्रसिद्ध ग्रंथ ‘मेघदूतम’ की रचना रामगढ़ की इन्हीं वादियों में बैठकर की थी। उन्होंने सरगुजा की सुंदरता का वर्णन अपने काव्य में किया है।

🚜 आर्थिक परिदृश्य: कोयला, बॉक्साइट और वनोपज

सरगुजा संभाग छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण इंजन की तरह काम करता है।

1. खनिज संपदा:

  • कोयला: सरगुजा, कोरिया और सूरजपुर में कोयले की विशाल खदानें हैं। SECL यहाँ का मुख्य ऑपरेटर है।
  • बॉक्साइट: जशपुर और मैनपाट के पाट प्रदेशों में उच्च गुणवत्ता वाला बॉक्साइट मिलता है, जो एल्युमिनियम बनाने के काम आता है।

2. कृषि और वनोपज:

  • यहाँ धान के अलावा मक्का और रागी की खेती खूब होती है।
  • जशपुर क्षेत्र अपनी चाय की खेती और नाशपाती (Pear) के लिए जाना जाता है।
  • जंगलों से मिलने वाला महुआ, तेंदूपत्ता और चिरौंजी यहाँ के ग्रामीणों की आय का मुख्य साधन है।

🐾 वन्यजीव और जैव-विविधता

प्राकृतिक रूप से समृद्ध होने के कारण सरगुजा वन्यजीवों का सुरक्षित ठिकाना है।

  • तमोर पिंगला अभयारण्य (सूरजपुर): यह 608 वर्ग किमी में फैला छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा अभयारण्य है।
  • सेमरसोत अभयारण्य (बलरामपुर): यहाँ नीलगाय और तेंदुए बहुतायत में पाए जाते हैं।
  • गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान: इसका कुछ हिस्सा इस संभाग में आता है, जो अब टाइगर रिजर्व के रूप में भी जाना जाता है।

✅ Pros & Cons: सरगुजा संभाग का विश्लेषण (Trust Box)

सरगुजा के विकास और इसकी चुनौतियों को समझना भी जरूरी है:

💚 खूबियां (Pros)🛑 चुनौतियां (Cons)
पर्यटन की अपार संभावनाएं: मैनपाट और रामगढ़ जैसे स्थल इसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र बना सकते हैं।कनेक्टिविटी: पहाड़ी रास्ता होने के कारण कुछ अंदरूनी इलाकों में पहुंचना आज भी कठिन है।
खनिज भंडार: कोयला और बॉक्साइट राज्य के राजस्व में बड़ा योगदान देते हैं।पर्यावरण प्रदूषण: अत्यधिक खनन के कारण जंगलों की कटाई और प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन रही है।
स्वच्छता: अम्बिकापुर को भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में गिना जाता है।स्वास्थ्य और शिक्षा: अंदरूनी इलाकों में रहने वाली जनजातियों तक आधुनिक चिकित्सा पहुँचाना एक चुनौती है।

❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

सरगुजा संभाग के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

Q1: सरगुजा संभाग का गठन कब हुआ?
Ans: सरगुजा संभाग का गठन 1 अप्रैल 2008 को बिलासपुर संभाग से अलग होकर हुआ।

Q2: छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी कौन सी है और कहाँ है?
Ans: छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी ‘गौरलाटा’ (1225 मीटर) है, जो सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिले के सामरीपाट में स्थित है।

Q3: मैनपाट को ‘मिनी तिब्बत’ क्यों कहा जाता है?
Ans: 1962 में यहाँ बड़ी संख्या में तिब्बती शरणार्थियों को बसाया गया था, जिस कारण यहाँ की संस्कृति पर तिब्बती प्रभाव गहरा है।

Q4: सरगुजा संभाग में वर्तमान में कितने जिले हैं?
Ans: वर्तमान (2025) में सरगुजा संभाग में कुल 6 जिले हैं: सरगुजा, कोरिया, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB)।

Q5: अमृतधारा जलप्रपात किस नदी पर स्थित है?
Ans: अमृतधारा जलप्रपात हसदेव नदी पर स्थित है, जो अब MCB (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले का हिस्सा है।


👋 Conclusion & Call to Action (निष्कर्ष)

सरगुजा संभाग (Sarguja Division) छत्तीसगढ़ का वह हिस्सा है जहाँ इतिहास की परतें, पहाड़ों की चोटियों और नदियों के बहाव में छिपी हैं। यह संभाग न केवल प्रदेश को ऊर्जा (कोयला) प्रदान करता है, बल्कि अपनी ठंडी जलवायु और सांस्कृतिक विविधता से हर किसी का मन मोह लेता है।

अम्बिकापुर की स्वच्छता से लेकर जशपुर के पाट प्रदेशों तक, सरगुजा का हर कोना एक नई कहानी कहता है। यदि आप छत्तीसगढ़ की असली जड़ों को समझना चाहते हैं, तो सरगुजा की यात्रा अनिवार्य है।

आपका विचार:
क्या आपने कभी मैनपाट की दलगली या उल्टा पानी का अनुभव किया है? सरगुजा का कौन सा पर्यटन स्थल आपको सबसे ज्यादा पसंद है?
नीचे Comment Box में अपने अनुभव और सवाल हमारे साथ जरूर साझा करें! 👇


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