HomeBlogServer Kya Hai? कार्य, प्रकार और यह कैसे काम करता है? [The Ultimate Guide 2026]

Server Kya Hai? कार्य, प्रकार और यह कैसे काम करता है? [The Ultimate Guide 2026]

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी सरकारी नौकरी का फॉर्म भर रहे हों, या बैंक में पैसे निकालने गए हों, और वहां मौजूद कर्मचारी कहे— “भैया, अभी काम नहीं होगा, सर्वर डाउन (Server Down) है।”

या फिर, जब कॉलेज का रिजल्ट आता है, तो वेबसाइट खुलती ही नहीं है? आखिर यह ‘सर्वर’ है क्या बला? यह कहाँ रहता है? यह डाउन क्यों होता है? और पूरी दुनिया का इंटरनेट इस पर क्यों टिका हुआ है?

अगर आप एक कंप्यूटर स्टूडेंट हैं, या बस टेक्नोलॉजी को गहराई से समझना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल इंटरनेट पर मौजूद सर्वर की सबसे विस्तृत गाइड है। आज हम सर्वर का पूरा ‘पोस्टमार्टम’ करेंगे।


📋 Quick Summary (Server at a Glance)

अगर आपके पास समय कम है, तो सर्वर की पूरी कहानी यहाँ संक्षेप में समझें:

  • परिभाषा: सर्वर वह कंप्यूटर या सिस्टम है जो दूसरे कंप्यूटरों (Clients) को डेटा या सेवा प्रदान करता है।
  • मुख्य काम: डेटा स्टोर करना, प्रोसेस करना और मांगने पर यूजर को भेजना।
  • मॉडल: यह ‘क्लाइंट-सर्वर मॉडल’ (Client-Server Model) पर काम करता है।
  • सबसे आम प्रकार: वेब सर्वर (वेबसाइट चलाने के लिए) और डेटाबेस सर्वर।
  • हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर?: यह दोनों है। एक फिजिकल मशीन (हार्डवेयर) जिस पर विशेष प्रोग्राम (सॉफ्टवेयर) चल रहा हो।
  • सर्वर डाउन का मतलब: जब सर्वर पर क्षमता से ज्यादा लोग आ जाएं या हार्डवेयर खराब हो जाए।

📊 Server Types & Functions (Data Table)

विभिन्न प्रकार के सर्वर और उनके कार्यों की तुलनात्मक सूची:

क्र.सर्वर का प्रकार (Server Type)मुख्य कार्य (Primary Function)उदाहरण (Example)
1.Web Serverवेबसाइट के पेज (HTML/CSS) दिखानाApache, Nginx, IIS
2.Mail Serverईमेल भेजना और प्राप्त करनाSMTP, Exim, Gmail Server
3.Database Serverडेटा को व्यवस्थित रूप से स्टोर करनाMySQL, Oracle, SQL Server
4.File Serverनेटवर्क पर फाइलें शेयर करनाFTP, SMB, NAS
5.Application Serverसॉफ्टवेयर या ऐप के लॉजिक को रन करनाJava, .NET Framework
6.Game Serverमल्टीप्लेयर गेमिंग को सिंक्रोनाइज करनाPubG Server, Minecraft Server
7.DNS Serverडोमेन नाम को IP एड्रेस में बदलनाGoogle DNS (8.8.8.8)
8.Proxy Serverयूजर और इंटरनेट के बीच सुरक्षा दीवारVPN Servers

🖥️ भाग 1: सर्वर क्या है? (What is a Server?)

साधारण भाषा में कहें तो, “सर्वर (Server) का मतलब है—सर्व (Serve) करने वाला, यानी सेवा देने वाला।”

जब हम केवल ‘सर्वर’ कहते हैं, तो इसका अर्थ एक ऐसा शक्तिशाली कंप्यूटर होता है जो 24 घंटे, सातों दिन (24×7) चलता रहता है और इंटरनेट या लोकल नेटवर्क के माध्यम से दूसरे कंप्यूटरों को जानकारी भेजता है।

तकनीकी परिभाषा:
सर्वर एक कंप्यूटर प्रोग्राम या डिवाइस है जो अन्य कंप्यूटरों (जिन्हें ‘क्लाइंट’ कहा जाता है) को कार्यक्षमता (Functionality) प्रदान करता है। इस आर्किटेक्चर को क्लाइंट-सर्वर मॉडल कहा जाता है।

उदाहरण के लिए:
कल्पना करें कि आप एक रेस्टोरेंट में हैं।

  • आप (You): ‘क्लाइंट’ हैं (जो खाना मांग रहा है)।
  • वेटर (Waiter): ‘सर्वर’ है (जो आपका ऑर्डर लेता है और किचन से खाना लाकर आपको देता है)।
  • किचन (Kitchen): ‘डेटाबेस’ है (जहाँ सारा सामान/डेटा रखा है)।

जब आप Google पर कुछ सर्च करते हैं, तो आपका मोबाइल (Client) गूगल के कंप्यूटर (Server) से पूछता है, और गूगल का सर्वर आपको रिजल्ट (Response) भेजता है।

सर्वर: हार्डवेयर है या सॉफ्टवेयर? (Hardware vs Software)

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है और इसका उत्तर है—दोनों।

  1. हार्डवेयर सर्वर (Hardware Server): यह वह भौतिक मशीन (Physical Machine) है। यह आपके घर के कंप्यूटर जैसा ही होता है लेकिन इसमें बहुत ज्यादा रैम (RAM), बहुत शक्तिशाली प्रोसेसर (CPU) और बहुत बड़ी हार्ड डिस्क (Storage) होती है। इसे ठंडा रखने के लिए विशेष AC कमरों (Data Centers) में रखा जाता है।
  2. सॉफ्टवेयर सर्वर (Software Server): हार्डवेयर अकेला कुछ नहीं कर सकता। उस मशीन पर चलने वाला विशेष प्रोग्राम (जैसे Apache या Windows Server) जो डेटा को मैनेज करता है, उसे सॉफ्टवेयर सर्वर कहते हैं।

⚙️ भाग 2: सर्वर कैसे काम करता है? (How Does a Server Work?)

सर्वर के काम करने की प्रक्रिया को समझने के लिए हमें “Request and Response” (अनुरोध और उत्तर) साइकिल को समझना होगा।

आइए स्टेप-बाय-स्टेप देखें कि जब आप ब्राउज़र में www.google.com लिखते हैं तो क्या होता है:

  1. अनुरोध (Request): जैसे ही आप एंटर दबाते हैं, आपका कंप्यूटर (क्लाइंट) इंटरनेट के जरिए उस वेबसाइट के सर्वर को एक रिक्वेस्ट भेजता है। यह रिक्वेस्ट ऐसी होती है— “हे सर्वर, मुझे google.com का होमपेज दिखाओ।”
  2. DNS लुकअप: कंप्यूटर को इंसानी भाषा (google.com) समझ नहीं आती। इसलिए वह पहले DNS Server (इंटरनेट की फोनबुक) के पास जाता है और पूछता है कि गूगल के सर्वर का IP Address क्या है? (जैसे- 142.250.193.78)।
  3. प्रोसेसिंग (Processing): सही पता मिलने पर रिक्वेस्ट गूगल के वेब सर्वर तक पहुँचती है। सर्वर चेक करता है कि आपने क्या मांगा है। क्या आपके पास उसे देखने की अनुमति (Permission) है?
  4. डेटा पुनर्प्राप्ति (Data Retrieval): अगर पेज में कोई डेटाबेस का काम है (जैसे लॉगिन करना), तो वेब सर्वर डेटाबेस सर्वर से डेटा मांगता है।
  5. उत्तर (Response): सर्वर सारी जानकारी को एक पैकेट में पैक करता है और आपके कंप्यूटर को वापस भेज देता है।
  6. रेंडरिंग (Rendering): आपका ब्राउज़र उस कोड को पढ़कर आपको सुंदर सी वेबसाइट दिखा देता है।

यह पूरी प्रक्रिया मिलीसेकंड्स (Milliseconds) में होती है।


🌐 भाग 3: सर्वर के प्रमुख प्रकार (Types of Servers in Detail)

सर्वर का वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि वे क्या काम करते हैं। आइये विस्तार से जानें:

1. वेब सर्वर (Web Server)

यह इंटरनेट का सबसे कॉमन सर्वर है।

  • काम: यह वेबसाइटों के फाइल (HTML, CSS, Images) को स्टोर करता है। जब आप कोई वेबसाइट खोलते हैं, तो यही सर्वर आपको पेज दिखाता है।
  • सॉफ्टवेयर उदाहरण:
    • Apache HTTP Server: दुनिया का सबसे पुराना और लोकप्रिय ओपन-सोर्स सर्वर।
    • Nginx: यह अपनी स्पीड और हाई ट्रैफिक संभालने के लिए जाना जाता है।
    • Microsoft IIS: विंडोज आधारित सर्वर।

2. एप्लीकेशन सर्वर (Application Server)

वेब सर्वर केवल स्थिर (Static) पेज दिखाता है, लेकिन एप्लीकेशन सर्वर जटिल लॉजिक चलाता है।

  • काम: यह यूजर और डेटाबेस के बीच एक पुल का काम करता है। जैसे बैंक की वेबसाइट पर ब्याज (Interest) कैलकुलेट करना या ई-कॉमर्स साइट पर कार्ट में सामान जोड़ना।
  • उदाहरण: WebLogic, WebSphere, JBoss.

3. मेल सर्वर (Mail Server)

इसे आप “डिजिटल पोस्ट ऑफिस” कह सकते हैं।

  • काम: ईमेल भेजना और प्राप्त करना। जब आप ईमेल भेजते हैं, तो यह कई सर्वरों से होकर गुजरता है।
  • प्रोटोकॉल:
    • SMTP (Simple Mail Transfer Protocol): मेल भेजने के लिए।
    • POP3 / IMAP: मेल प्राप्त करने के लिए।

4. डेटाबेस सर्वर (Database Server)

यह जानकारी का गोदाम है।

  • काम: यह बड़ी मात्रा में डेटा को टेबल के रूप में स्टोर करता है ताकि उसे आसानी से खोजा जा सके।
  • उदाहरण:
    • SQL Server: माइक्रोसॉफ्ट का प्रोडक्ट।
    • MySQL: फ्री और ओपन सोर्स (फेसबुक इसी का उपयोग करता है)।
    • Oracle: बड़े बैंकों और कॉर्पोरेट्स के लिए।

5. फाइल सर्वर (File Server)

इसका उपयोग ऑफिस या लोकल नेटवर्क (LAN) में होता है।

  • काम: यह एक केंद्रीय कंप्यूटर है जहाँ सभी कर्मचारी अपनी फाइलें सेव करते हैं ताकि वे किसी भी कंप्यूटर से उसे एक्सेस कर सकें।

6. गेम सर्वर (Game Server)

PUBG, Free Fire या Minecraft जैसे गेम्स के लिए।

  • काम: यह सभी खिलाड़ियों की लोकेशन, स्कोर और मूवमेंट को सिंक (Sync) करता है। अगर यह धीमा हो जाए, तो गेम में ‘लैग’ (Lag) आने लगता है।

7. प्रॉक्सी सर्वर (Proxy Server)

यह एक बिचौलिया (Middleman) है।

  • काम: जब आप रिक्वेस्ट भेजते हैं, तो वह पहले प्रॉक्सी सर्वर पर जाती है, फिर प्रॉक्सी सर्वर उसे आगे वेबसाइट को भेजता है। इससे वेबसाइट को आपका असली IP एड्रेस नहीं पता चलता। VPN इसी सिद्धांत पर काम करते हैं।

💥 भाग 4: सर्वर डाउन या क्रैश क्यों होता है? (Why Servers Crash?)

“सर्वर डाउन है”—यह वाक्य हम अक्सर सुनते हैं। इसके पीछे कई तकनीकी कारण होते हैं:

1. ट्रैफिक ओवरलोड (High Traffic/DDoS Attack):
हर सर्वर की एक क्षमता (Capacity) होती है। मान लीजिये एक सर्वर एक बार में 10,000 लोगों को संभाल सकता है। अगर अचानक 50,000 लोग आ जाएं (जैसे रिजल्ट के दिन या सेल के दौरान), तो सर्वर के संसाधन (RAM/CPU) खत्म हो जाते हैं और वह काम करना बंद कर देता है। इसे ही ‘सर्वर क्रैश’ होना कहते हैं।

2. हार्डवेयर फेलियर (Hardware Failure):
चूंकि सर्वर 24 घंटे चलते हैं, इसलिए उनकी हार्ड डिस्क खराब हो सकती है, पावर सप्लाई जल सकती है या मदरबोर्ड में खराबी आ सकती है। हालांकि, बड़े डेटा सेंटर में बैकअप जनरेटर और कूलिंग सिस्टम होते हैं।

3. सॉफ्टवेयर बग (Software Bugs):
अगर सर्वर के ऑपरेटिंग सिस्टम या कोड में कोई गलती (Bug) रह गई हो, तो वह मेमोरी लीक (Memory Leak) कर सकता है, जिससे सर्वर धीमा होकर बंद हो जाता है।

4. साइबर हमले (Cyber Attacks):
हैकर्स कभी-कभी जानबूझकर सर्वर पर हमला करते हैं (जैसे Ransomware या DDoS), जिससे सर्वर ठप हो जाता है।

5. बैंक सर्वर की समस्या:
बैंकों के सर्वर इसलिए ज्यादा डाउन होते हैं क्योंकि उन पर सुरक्षा (Encryption) का बहुत भारी लोड होता है। हर ट्रांजेक्शन को कई बार वेरीफाई किया जाता है, और उनके सिस्टम अक्सर पुराने (Legacy System) होते हैं जो आधुनिक इंटरनेट की स्पीड से मेल नहीं खा पाते।


💻 भाग 5: सर्वर हार्डवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम

एक सामान्य कंप्यूटर और सर्वर कंप्यूटर में क्या अंतर है?

1. ऑपरेटिंग सिस्टम (Server OS):
आप अपने लैपटॉप में Windows 10/11 चलाते हैं, लेकिन सर्वर पर विशेष OS डाले जाते हैं:

  • Linux (लिनक्स): दुनिया के लगभग 70-80% सर्वर लिनक्स पर चलते हैं (जैसे Ubuntu Server, CentOS, Red Hat)। कारण? यह फ्री है, सुरक्षित है और बहुत कम क्रैश होता है।
  • Windows Server: बड़ी कंपनियां जो माइक्रोसॉफ्ट के प्रोडक्ट यूज करती हैं, वे इसका इस्तेमाल करती हैं। यह महंगा होता है।

2. हार्डवेयर घटक (Components):

  • CPU: इसमें Intel Xeon या AMD EPYC प्रोसेसर होते हैं जो एक साथ हजारों काम (Multitasking) कर सकते हैं।
  • RAM: इसमें ECC (Error Correcting Code) रैम का इस्तेमाल होता है जो डेटा की गलतियों को खुद ठीक कर लेती है।
  • Storage: साधारण हार्ड डिस्क की जगह इसमें Enterprise SSDs या SAS ड्राइव्स का उपयोग होता है जो 24 घंटे चलने के लिए बनी होती हैं। RAID तकनीक का उपयोग करके एक ही डेटा को कई डिस्कों पर सेव किया जाता है, ताकि एक डिस्क खराब होने पर भी डेटा न उड़े।

☁️ भाग 6: क्लाउड सर्वर और डेटा सेंटर (Cloud & Data Centers)

आजकल कोई भी कंपनी अपना खुद का सर्वर खरीदकर ऑफिस में नहीं रखती। जमाना क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) का है।

डेटा सेंटर क्या है?
यह एक बहुत बड़ी इमारत होती है जहाँ हजारों-लाखों सर्वर एक साथ रखे होते हैं। वहां का तापमान हमेशा ठंडा रखा जाता है (AC द्वारा) और वहां धूल का एक कण भी नहीं जाने दिया जाता। इंटरनेट की रीढ़ यही डेटा सेंटर हैं।

क्लाउड सर्वर (जैसे AWS, Google Cloud, Azure):
अमेज़न (AWS) या गूगल जैसी कंपनियां अपने विशाल डेटा सेंटर के सर्वर को किराए पर देती हैं।

  • फायदा: आपको सर्वर खरीदने की जरूरत नहीं। आप बस एक क्लिक में अमेरिका या भारत में स्थित सर्वर किराए पर ले सकते हैं।
  • स्केलेबिलिटी (Scalability): अगर आपकी वेबसाइट पर भीड़ बढ़ती है, तो आप एक क्लिक में सर्वर की पावर (RAM/CPU) बढ़ा सकते हैं।

🏠 भाग 7: लोकल सर्वर (Local Server / Localhost)

क्या आप जानते हैं कि आप अपने घर के पुराने लैपटॉप को भी सर्वर बना सकते हैं? इसे लोकल सर्वर कहते हैं।

लोकल सर्वर कैसे काम करता है?
लोकल सर्वर इंटरनेट से नहीं जुड़ा होता (आमतौर पर)। यह सिर्फ आपके घर के वाई-फाई या LAN नेटवर्क पर काम करता है।

उपयोग:

  1. वेब डेवलपमेंट: वेबसाइट को इंटरनेट पर डालने से पहले डेवलपर उसे अपने कंप्यूटर पर (Localhost) बनाकर टेस्ट करते हैं। इसके लिए XAMPP या WAMP जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग होता है जो आपके कंप्यूटर को अपाचे (Apache) सर्वर में बदल देते हैं।
  2. फाइल शेयरिंग: आप अपने कंप्यूटर में फिल्में रख सकते हैं और घर के टीवी या मोबाइल पर उसे देख सकते हैं (Plex Server का उपयोग करके)।
  3. प्राइवेसी: लोकल सर्वर का डेटा आपके पास रहता है, किसी क्लाउड कंपनी के पास नहीं।

🛡️ भाग 8: सर्वर सुरक्षा और समस्या निवारण (Troubleshooting)

एक सर्वर एडमिनिस्ट्रेटर (Server Admin) का काम होता है सर्वर को चालू रखना। अगर सर्वर में दिक्कत आए, तो क्या करें?

सर्वर समस्या निवारण (Troubleshooting Steps):

  1. भौतिक जाँच (Physical Layer): सबसे पहले चेक करें कि क्या इंटरनेट केबल (Ethernet) ठीक से लगी है? क्या पावर सप्लाई आ रही है? क्या हार्ड डिस्क की लाइट जल रही है?
  2. पिंग टेस्ट (Ping Test): कमांड प्रॉम्प्ट (CMD) में जाकर ping कमांड चलाएं। अगर रिप्लाई नहीं आ रहा, तो नेटवर्क में दिक्कत है।
  3. लॉग्स चेक करें (Check Logs): सर्वर हर गतिविधि का रिकॉर्ड (Log) रखता है। एरर लॉग्स पढ़ने से पता चलता है कि सॉफ्टवेयर में कहाँ गलती हुई।
  4. सर्विस रीस्टार्ट: 90% समस्याएं संबंधित सर्विस (जैसे Apache या MySQL) को रीस्टार्ट करने से ठीक हो जाती हैं।
  5. संसाधन मॉनिटरिंग: चेक करें कि कहीं कोई वायरस CPU का 100% इस्तेमाल तो नहीं कर रहा।

मैं इंटरनेट सर्वर से कैसे जुड़ूं? (Connecting to a Server):
अगर आपके पास अपना सर्वर है, तो उसे राऊटर से ईथरनेट केबल (LAN Cable) से कनेक्ट करें। उसे एक ‘Static IP’ दें। फिर आप ‘Remote Desktop’ (Windows में) या ‘SSH’ (Linux में) के जरिए दुनिया के किसी भी कोने से अपने सर्वर को कंट्रोल कर सकते हैं।


✅ Pros & Cons: सर्वर टेक्नोलॉजी (Trust Box)

सर्वर के उपयोग के फायदे और नुकसान का विश्लेषण:

💚 अच्छाइयां (Pros)🛑 चुनौतियां (Cons)
केंद्रीयकरण: सारा डेटा एक जगह सुरक्षित रहता है, जिससे मैनेजमेंट आसान होता है।लागत (Cost): खुद का सर्वर सेट करना और उसे ठंडा रखना (AC) बहुत महंगा पड़ता है।
सहयोग (Collaboration): कई लोग एक ही फाइल पर एक साथ काम कर सकते हैं।Single Point of Failure: अगर मुख्य सर्वर खराब हो जाए, तो पूरा ऑफिस का काम ठप हो जाता है।
सुरक्षा: सर्वर में फायरवॉल और एडवांस सुरक्षा होती है जो डेटा चोरी होने से बचाती है।रखरखाव: इसे संभालने के लिए एक्सपर्ट (Network Engineer) की जरूरत होती है।
बैकअप: ऑटोमेटिक बैकअप की सुविधा होती है।साइबर खतरा: सर्वर हमेशा हैकर्स के निशाने पर रहते हैं।

🚀 भविष्य: सर्वर का फ्यूचर (Edge Computing)

सर्वर तकनीक तेजी से बदल रही है। अब हम “Edge Computing” की ओर बढ़ रहे हैं।
इसका मतलब है कि डेटा प्रोसेस करने के लिए रिक्वेस्ट को अमेरिका स्थित सर्वर तक जाने की जरूरत नहीं होगी। आपके शहर या मोहल्ले में छोटे “एज सर्वर” (Edge Servers) लगे होंगे जो 5G की मदद से तुरंत डेटा प्रोसेस करेंगे। इससे इंटरनेट की स्पीड 100 गुना बढ़ जाएगी और सेल्फ-ड्राइविंग कारें जैसी चीजें संभव हो पाएंगी।


❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

सर्वर से जुड़े कुछ ऐसे सवाल जो अक्सर पूछे जाते हैं:

Q1: क्लाइंट और सर्वर में क्या अंतर है?
Ans: क्लाइंट वह है जो सेवा मांगता है (जैसे आपका मोबाइल या लैपटॉप), और सर्वर वह है जो सेवा देता है (जैसे फेसबुक का कंप्यूटर)। क्लाइंट छोटा होता है, सर्वर बहुत शक्तिशाली होता है।

Q2: क्या मैं अपने लैपटॉप को सर्वर बना सकता हूँ?
Ans: हाँ, बिल्कुल! आप XAMPP या Node.js जैसे सॉफ्टवेयर डालकर अपने लैपटॉप को वेब सर्वर बना सकते हैं। लेकिन लैपटॉप 24 घंटे चलने के लिए नहीं बने होते, इसलिए वे गर्म होकर खराब हो सकते हैं।

Q3: अपाचे (Apache) सर्वर क्या है?
Ans: अपाचे एक मुफ्त ‘वेब सर्वर सॉफ्टवेयर’ है। यह पोस्टमैन की तरह काम करता है। जब आप किसी वेबसाइट का पता डालते हैं, तो अपाचे ही उस वेबसाइट की फाइलों को ढूंढ़कर आपके ब्राउज़र तक पहुँचाता है।

Q4: डेटा सेंटर में इतनी ठंड क्यों होती है?
Ans: सर्वर बहुत तेज चलते हैं जिससे वे बहुत ज्यादा गर्मी (Heat) पैदा करते हैं। अगर उन्हें ठंडा नहीं रखा गया, तो उनके प्रोसेसर जल सकते हैं। इसलिए वहां विशाल AC प्लांट लगे होते हैं।

Q5: सर्वर का IP Address क्या होता है?
Ans: जैसे हर घर का एक पता होता है, वैसे ही इंटरनेट पर हर सर्वर का एक पता होता है, जिसे IP Address कहते हैं (उदा. 192.168.1.1)। डोमेन नेम (जैसे google.com) इसी IP को याद रखने का आसान तरीका है।


👋 निष्कर्ष (Conclusion)

तो दोस्तों, अब आप समझ गए होंगे कि सर्वर (Server) कोई जादू नहीं, बल्कि एक बहुत ही शक्तिशाली और अनुशासित कंप्यूटर है। यह आधुनिक दुनिया की रीढ़ (Backbone) है।

चाहे आप WhatsApp पर मैसेज भेजें, YouTube पर वीडियो देखें, या UPI से पेमेंट करें—हर सेकंड आप किसी न किसी सर्वर से बात कर रहे होते हैं। जब सर्वर “डाउन” होता है, तो हमें गुस्सा आता है, लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि यह मशीन करोड़ों लोगों का बोझ एक साथ उठा रही है।

टेक्नोलॉजी के इस दौर में सर्वर एडमिनिस्ट्रेशन (Server Administration) और क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) में करियर बनाने की अपार संभावनाएं हैं। अगर आपको कंप्यूटर में दिलचस्पी है, तो आप Linux और Networking सीखकर इस क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं।

आपका विचार:
क्या आपने कभी ‘लोकलहोस्ट’ (Localhost) पर कोई वेबसाइट बनाने की कोशिश की है? या कभी बैंक सर्वर डाउन होने की वजह से परेशानी झेली है?
अपने अनुभव नीचे Comment Box में जरूर शेयर करें! 👇

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