HomeBlogमानव विकास सूचकांक (HDI) का संपूर्ण विश्लेषण: परिभाषा, संरचना, भारत की स्थिति और भविष्य की चुनौतियाँ (2026 विशेष)

मानव विकास सूचकांक (HDI) का संपूर्ण विश्लेषण: परिभाषा, संरचना, भारत की स्थिति और भविष्य की चुनौतियाँ (2026 विशेष)

भूमिका: केवल विकास नहीं, ‘मानव’ विकास
बीसवीं सदी के अंत तक दुनिया किसी भी देश की प्रगति को केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के चश्मे से देखती थी। माना जाता था कि यदि अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, तो लोग खुशहाल होंगे। लेकिन वास्तविकता अलग थी। आर्थिक समृद्धि के बावजूद स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति कई देशों में दयनीय बनी हुई थी।

इसी विसंगति को दूर करने के लिए 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक ने अमर्त्य सेन के सहयोग से एक क्रांतिकारी उपकरण विकसित किया, जिसे आज हम मानव विकास सूचकांक (HDI) के नाम से जानते हैं। HDI का मूल दर्शन यह है कि “लोग ही किसी राष्ट्र की असली संपत्ति हैं और विकास का अंतिम लक्ष्य लोगों के लिए विकल्पों का विस्तार करना होना चाहिए।”

इस वृहद् लेख में हम HDI के हर सूक्ष्म पहलू, भारत के प्रदर्शन और उन सामाजिक-आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण करेंगे जो हमारे कल को निर्धारित करते हैं।


भाग 1: मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है?

मानव विकास सूचकांक (HDI) एक सांख्यिकीय माप है जो किसी देश की प्रगति को उसके तीन प्रमुख आयामों में औसत उपलब्धि के आधार पर मापता है: लंबा और स्वस्थ जीवनज्ञान का स्तर, और एक सभ्य जीवन स्तर

इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रतिवर्ष अपनी ‘मानव विकास रिपोर्ट’ (HDR) के हिस्से के रूप में प्रकाशित किया जाता है।

1.1 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1990 से पहले, विकास का पैमाना केवल ‘आर्थिक उत्पादन’ था। महबूब-उल-हक ने तर्क दिया कि प्रगति का केंद्र बिंदु ‘मानव’ होना चाहिए। नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. अमर्त्य सेन ने इसमें ‘क्षमता दृष्टिकोण’ (Capability Approach) जोड़ा, जिसका अर्थ है कि लोगों को वह जीवन जीने की स्वतंत्रता होनी चाहिए जिसे वे मूल्यवान समझते हैं।


भाग 2: HDI की संरचना और गणना पद्धति

2010 में UNDP ने इसकी गणना के लिए नई पद्धति अपनाई। HDI तीन अलग-अलग सूचकांकों का ज्यामितीय माध्य (Geometric Mean) है।

2.1 तीन मुख्य स्तंभ (The Three Pillars)

1. स्वास्थ्य: जीवन प्रत्याशा सूचकांक (Life Expectancy Index)

  • इसका मापन जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth) के आधार पर किया जाता है।
  • यह दर्शाता है कि एक नवजात बच्चा औसत रूप से कितने वर्ष जीवित रहने की उम्मीद कर सकता है, यदि मौजूदा मृत्यु दर का पैटर्न स्थिर रहे।
  • न्यूनतम मान: 20 वर्ष | अधिकतम मान: 85 वर्ष।

2. शिक्षा: शिक्षा सूचकांक (Education Index)

शिक्षा को दो उप-संकेतकों के माध्यम से मापा जाता है:

  • औसत स्कूली शिक्षा वर्ष (Mean Years of Schooling): 25 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्कों द्वारा स्कूल में बिताए गए औसत वर्षों की संख्या।
  • प्रत्याशित स्कूली शिक्षा वर्ष (Expected Years of Schooling): स्कूल में प्रवेश करने वाले बच्चे के लिए शिक्षा के कुल संभावित वर्षों का अनुमान।

3. आय: आय सूचकांक (Income Index)

  • इसका मापन प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI per capita) के आधार पर किया जाता है।
  • इसे क्रय शक्ति समानता (PPP $) में मापा जाता है ताकि विभिन्न देशों के बीच जीवन स्तर की तुलना सटीक हो सके।
  • इसमें लॉगरिथमिक स्केल का उपयोग किया जाता है क्योंकि आय बढ़ने के साथ मानव विकास पर उसका प्रभाव धीरे-धीरे घटता जाता है।

भाग 3: भारत का HDI विश्लेषण – 1990 से 2026 तक का सफर

भारत वर्तमान में ‘मध्यम मानव विकास’ (Medium Human Development) श्रेणी में आता है। पिछले तीन दशकों में भारत ने अपने स्कोर में 50% से अधिक की वृद्धि की है।

3.1 प्रमुख सांख्यिकीय रुझान

  • 1990 में स्कोर: 0.427
  • 2018 में स्कोर: 0.640 (रैंक 130वाँ)
  • वर्तमान अनुमान (2025-26): भारत के स्कोर में निरंतर सुधार हो रहा है, जो अब 0.644 से ऊपर रहने की उम्मीद है।

3.2 आयाम-वार प्रदर्शन (भारत)

  1. जीवन प्रत्याशा: 1990 में भारत की जीवन प्रत्याशा 57.9 वर्ष थी, जो अब बढ़कर 68.8 से 70 वर्ष के बीच पहुँच गई है।
  2. शिक्षा: स्कूली शिक्षा का औसत 6.4 वर्ष है, जबकि प्रत्याशित वर्ष 12.3 हैं। यह दर्शाता है कि अगली पीढ़ी अधिक शिक्षित होगी।
  3. GNI (आय): प्रति व्यक्ति आय में 1990 के बाद से लगभग 250% की वृद्धि हुई है।

भाग 4: लैंगिक विकास और विषमता (GDI और GII)

विकास तब तक न्यायपूर्ण नहीं है जब तक कि वह महिलाओं और पुरुषों के बीच समान न हो। इसके लिए UNDP दो विशेष सूचकांकों का उपयोग करता है।

4.1 जेंडर डेवलपमेंट इंडेक्स (GDI)

यह पुरुषों और महिलाओं के बीच HDI उपलब्धियों के अनुपात को मापता है।

  • भारत का परिदृश्य: भारत का GDI स्कोर 0.841 है। भारत को ‘समूह 5’ में रखा गया है, जो दुनिया में सबसे अधिक लैंगिक विषमता वाले देशों की श्रेणी है।
  • आय का बड़ा अंतर: भारत में पुरुषों की GNI महिलाओं की तुलना में लगभग 3.6 गुना अधिक है।

4.2 जेंडर इनइक्वालिटी इंडेक्स (GII)

यह प्रजनन स्वास्थ्य, सशक्तिकरण और श्रम बाजार की भागीदारी में होने वाले नुकसान को मापता है।

  • भारत की रैंक: 127वाँ स्थान (स्कोर: 0.524)।
  • संसद में महिलाएँ: मात्र 11.6% से 14% के बीच (हालाँकि महिला आरक्षण बिल से भविष्य में सुधार की उम्मीद है)।
  • श्रम भागीदारी: महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी मात्र 27.2% है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।

भाग 5: IHDI और MPI – विकास की कड़वी सच्चाई

HDI केवल ‘औसत’ बताता है, लेकिन यह समाज की ‘असमानता’ को छुपा देता है। इसके लिए दो अन्य महत्वपूर्ण मापदंड हैं:

5.1 असमानता समायोजित HDI (IHDI)

जब HDI स्कोर को शिक्षा, स्वास्थ्य और आय में व्याप्त असमानता के लिए समायोजित किया जाता है, तो भारत का स्कोर 26.8% गिरकर 0.468 रह जाता है। यह दर्शाता है कि विकास का लाभ मुट्ठी भर लोगों तक ही सीमित है।

5.2 बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI)

यह सूचकांक बताता है कि गरीबी केवल पैसे की कमी नहीं है। यह 10 संकेतकों (जैसे पोषण, स्वच्छता, बिजली, स्कूली शिक्षा) में अभाव को मापता है।

  • भारत का MPI स्कोर: 0.121
  • डेटा: भारत की 27.5% जनसंख्या आज भी बहुआयामी रूप से गरीब है।

भाग 6: शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र का गहन विश्लेषण

किसी भी देश का HDI इन्फ्रास्ट्रक्चर इन दो स्तंभों पर टिका होता है।

6.1 शिक्षा की स्थिति

  • वयस्क साक्षरता: 69.3% (केरल जैसे राज्यों में यह 90% से अधिक है, जबकि बिहार में कम)।
  • ड्रॉपआउट दर: 9.8% प्राथमिक स्तर पर, जो एक बड़ी चुनौती है।
  • व्यय: भारत शिक्षा पर GDP का मात्र 3.8% से 4% खर्च करता है, जबकि लक्ष्य 6% का है।

6.2 स्वास्थ्य संकेतक

  • IMR (शिशु मृत्यु दर): 34.6 प्रति हज़ार (वैश्विक लक्ष्य 12 का है)।
  • ठिगनापन (Stunting): 37.9% भारतीय बच्चे उम्र के हिसाब से छोटे हैं, जो कुपोषण का संकेत है।
  • स्वास्थ्य बजट: GDP का 3.9% (सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारी निवेश की आवश्यकता है)।

भाग 7: कार्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा

7.1 श्रम शक्ति का ढांचा

  • भारत में 51.9% लोग रोजगार दर में शामिल हैं।
  • कृषि पर निर्भरता: 42.7% कार्यबल आज भी खेती में है, जहाँ आय कम है।
  • पेंशन: केवल 24.1% बुजुर्गों के पास पेंशन या सामाजिक सुरक्षा का कवच है।

7.2 मानव सुरक्षा

प्राकृतिक आपदाओं के कारण भारत में विस्थापन की दर बहुत अधिक है (लगभग 8 लाख लोग सालाना)। इसके अतिरिक्त, आत्महत्या दर (पुरुष: 17.9, महिला: 14.2) मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती है।


भाग 8: मानव विकास की राह में प्रमुख चुनौतियाँ

  1. आय की गहरी खाई: भारत की 1% आबादी के पास देश की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा है।
  2. गुणवत्ता बनाम मात्रा: स्कूलों में बच्चों का नामांकन तो बढ़ गया है, लेकिन ‘लर्निंग आउटकम’ (सीखने की क्षमता) आज भी कमज़ोर है।
  3. पर्यावरणीय खतरा: जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऊंचे HDI वाले देश पर्यावरण को अधिक नुकसान पहुँचा रहे हैं, जिससे विकास का यह मॉडल ‘अस्थिर’ (Unsustainable) हो गया है।
  4. डिजिटल डिवाइड: इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की दर मात्र 30-40% के आसपास है, जिससे शिक्षा और सरकारी सेवाओं तक पहुँच में असमानता पैदा हो रही है।

भाग 9: भविष्य की राह और सुझाव

मानव विकास में सुधार के लिए भारत को ‘बॉटम-अप’ (Bottom-up) दृष्टिकोण अपनाना होगा:

  • स्वास्थ्य में निवेश: आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को और सशक्त करना और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को आधुनिक बनाना।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) का पूर्ण कार्यान्वयन और कौशल विकास पर जोर।
  • महिला सशक्तिकरण: श्रम भागीदारी बढ़ाने के लिए सुरक्षित कार्यस्थल और समान वेतन सुनिश्चित करना।
  • पर्यावरण अनुकूल विकास: सौर ऊर्जा और हरित तकनीक को बढ़ावा देना ताकि विकास आने वाली पीढ़ियों के लिए बोझ न बने।

✅ निष्कर्ष

मानव विकास सूचकांक (HDI) हमें याद दिलाता है कि अर्थव्यवस्था के आंकड़े इंसानी खुशहाली की जगह नहीं ले सकते। भारत ने 1990 से अब तक एक लंबी दूरी तय की है, लेकिन हमें ‘मध्यम’ से ‘उच्च’ मानव विकास श्रेणी में पहुँचने के लिए अपनी सामाजिक विषमताओं को खत्म करना होगा। विकास तभी सार्थक है जब वह समावेशी हो और समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला सके।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – Google Ranking के लिए

1. मानव विकास सूचकांक (HDI) की शुरुआत किसने की?
HDI की शुरुआत 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक और भारतीय नोबेल विजेता अमर्त्य सेन ने की थी।

2. HDI की गणना में कौन से तीन आयाम शामिल हैं?
इसमें तीन आयाम शामिल हैं: 1. लंबा और स्वस्थ जीवन (स्वास्थ्य), 2. ज्ञान (शिक्षा), और 3. सभ्य जीवन स्तर (प्रति व्यक्ति GNI)।

3. मानव विकास रिपोर्ट (HDR) कौन प्रकाशित करता है?
यह संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रतिवर्ष प्रकाशित की जाती है।

4. IHDI और HDI में क्या अंतर है?
HDI औसत उपलब्धि मापता है, जबकि IHDI (Inequality-adjusted HDI) समाज में व्याप्त असमानता को ध्यान में रखकर स्कोर को समायोजित करता है।

5. भारत की 2026 में अपेक्षित स्थिति क्या है?
भारत ‘मध्यम मानव विकास’ श्रेणी में बना हुआ है और शिक्षा व स्वास्थ्य पर बढ़ते सरकारी व्यय के कारण इसके स्कोर में निरंतर सुधार की उम्मीद है।


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