HomeBlogभारत की पंचवर्षीय योजनाएं और जनजातीय विकास: 1951 से 2017 तक का संपूर्ण ऐतिहासिक और आर्थिक विश्लेषण (Full Guide 2026)

भारत की पंचवर्षीय योजनाएं और जनजातीय विकास: 1951 से 2017 तक का संपूर्ण ऐतिहासिक और आर्थिक विश्लेषण (Full Guide 2026)

भूमिका (Introduction):
स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज का निर्माण करना था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ‘अंत्योदय’ के सपने को साकार करने के लिए योजनाबद्ध विकास का रास्ता चुना गया। 1951 में प्रथम पंचवर्षीय योजना के शुभारंभ के साथ ही भारत ने अपनी आर्थिक और सामाजिक नियति को गढ़ना शुरू किया। इस विकास यात्रा में अनुसूचित जनजातियों (ST) और अनुसूचित जातियों (SC) का उत्थान हमेशा केंद्र बिंदु रहा है।

जनजातीय समाज, जो अपनी विशिष्ट संस्कृति और भौगोलिक दुर्गमता के कारण मुख्यधारा से कटा हुआ था, उसे सशक्त बनाने के लिए प्रत्येक योजना में विशेष प्रावधान किए गए। इस वृहद् लेख में हम SERVER IP TECHNOLOGY और श्री पुनाराम साहू सर के मार्गदर्शन में 12 पंचवर्षीय योजनाओं का सूक्ष्म विश्लेषण करेंगे और देखेंगे कि कैसे ‘आदिमजाति अनुसंधान संस्थानों’ से लेकर ‘जनजातीय उपयोजना’ (TSP) तक का सफर तय किया गया।


अध्याय 1: प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956) – नींव का निर्माण

प्रथम पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य युद्ध और विभाजन से जर्जर हुई अर्थव्यवस्था को संभालना था। जनजातीय विकास के संदर्भ में यह योजना ‘डेटा संकलन’ का काल थी।

1.1 आदिमजाति अनुसंधान संस्थानों की स्थापना (1954)

योजना के दौरान महसूस किया गया कि जनजातियों के रीति-रिवाज और उनकी समस्याओं के वैज्ञानिक अध्ययन के बिना ठोस नीतियां बनाना असंभव है। अतः 1954 में केंद्र सरकार के निर्देश पर पुराने मध्य प्रदेश, उड़ीसा, बिहार और पश्चिम बंगाल में अनुसंधान संस्थान स्थापित किए गए।

इन संस्थानों के मुख्य उद्देश्य:

  • जनजातियों का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करना।
  • जाति प्रमाण-पत्रों की सत्यता की जांच हेतु ‘छानबीन समिति’ का मार्गदर्शन करना।
  • जातियों के नृवंशविज्ञान (Ethnological) लक्षणों का परीक्षण करना।

1.2 आर्थिक और ढांचागत निवेश

प्रथम योजना काल में जनजातीय कल्याण हेतु 19.93 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

  • शिक्षा: 4,000 विद्यालय और 1,000 आश्रम स्थापित किए गए।
  • स्वास्थ्य: 3,200 चिकित्सा इकाइयाँ और मातृ-शिशु कल्याण केंद्रों की नींव रखी गई।
  • सड़क: 2,400 मील पक्की सड़कों का निर्माण हुआ।

अध्याय 2: द्वितीय और तृतीय योजना (1956-1966) – सामुदायिक विकास का युग

2.1 विशेष बहुउद्देशीय जनजातीय विकास खण्ड (2nd Plan)

द्वितीय योजना में ‘सामुदायिक विकास’ की अवधारणा को विस्तार दिया गया। 1955 में ‘विशेष बहुउद्देशीय जनजातीय विकास खण्ड’ शुरू किए गए।

  • वित्तीय ढांचा: केंद्र और राज्य के बीच 50:50 का अनुपात तय हुआ।
  • कुल व्यय: जनजातीय विकास हेतु 42.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

2.2 विकास खण्डों का विस्तार (3rd Plan)

तृतीय योजना में इन खण्डों का नाम बदलकर ‘जनजातीय विकास खण्ड’ कर दिया गया।

  • लक्ष्य: उन क्षेत्रों तक पहुँचना जहाँ आदिवासियों की जनसंख्या 50% से अधिक थी।
  • उपलब्धि: कुल 415 विकासखण्डों के माध्यम से 38% जनजातीय आबादी को कवर किया गया।

अध्याय 3: चतुर्थ योजना (1969-1974) – विफलताओं का दौर और आनुपातिक गिरावट

चतुर्थ योजना के अंत तक 504 विकास खण्ड बन चुके थे, लेकिन एक गंभीर समस्या सामने आई। टास्क फोर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुल सरकारी व्यय में जनजातीय कल्याण का हिस्सा घटता जा रहा था।

  • प्रथम योजना: कुल व्यय का 1%।
  • चतुर्थ योजना: कुल व्यय का मात्र 0.4%।
    यह वह समय था जब नीतियों के पुनर्मूल्यांकन की सख्त आवश्यकता महसूस की गई।

अध्याय 4: पंचम पंचवर्षीय योजना (1974-1978) – ‘मील का पत्थर’ और जनजातीय उपयोजना (TSP)

पाँचवीं योजना जनजातीय इतिहास में क्रांतिकारी मानी जाती है क्योंकि यहाँ ‘जनजातीय उपयोजना’ (Tribal Sub-Plan – TSP) का जन्म हुआ।

4.1 उपयोजना के दो मुख्य स्तंभ:

  1. आदिवासियों का सघन सामाजिक-आर्थिक विकास।
  2. महाजनों और साहूकारों के शोषण से संरक्षण।

4.2 ITDP और MADA की अवधारणा

  • ITDP (एकीकृत क्षेत्र विकास दृष्टिकोण): उन क्षेत्रों के लिए जहाँ जनजातीय आबादी सघन थी।
  • MADA (संशोधित क्षेत्र विकास दृष्टिकोण): उन क्षेत्रों के लिए जहाँ आबादी बिखरी हुई थी।
  • उपलब्धि: इस काल के अंत तक 65% जनजातीय आबादी को विकास के दायरे में लाया गया।

अध्याय 5: छठी और सातवीं योजना (1980-1990) – गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा

5.1 निर्धनता रेखा से ऊपर उठाने का संकल्प (6th Plan)

छठी योजना में पहली बार लक्ष्य रखा गया कि 50% जनजातीय परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाना है।

  • LAMPS: ‘बहुउद्देशीय विस्तृत सहकारी समितियों’ (LAMPS) को ऋण और विपणन (Marketing) के लिए सशक्त बनाया गया।
  • व्यय: 5,535 करोड़ रुपये की भारी राशि आवंटित की गई।

5.2 सातवीं योजना (1985-1990) – शिक्षा और कृषि पर जोर

सातवीं योजना में व्यावसायिक शिक्षा और बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन पर ध्यान केंद्रित किया गया। 15 राज्यों में 191 ITDP परियोजनाओं के माध्यम से 40 लाख परिवारों को लाभ पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया।


अध्याय 6: आठवीं से दसवीं योजना (1992-2007) – प्रशासनिक सुधार और सशक्तिकरण

6.1 खामियों की पहचान (8th Plan)

आठवीं योजना में कार्यदल ने पाया कि TSP का लाभ अक्सर ‘गैर-आदिवासी’ उठा रहे हैं। इसके समाधान हेतु ‘जरूरत आधारित कार्यक्रम’ (Need-based programs) बनाने और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निगरानी करने के निर्देश दिए गए।

6.2 नौवीं योजना (1997-2002) – मूलभूत सुविधाएँ

इस योजना ने पेयजल, प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी। पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को जनजातीय क्षेत्रों में सशक्त बनाया गया।

6.3 दसवीं योजना (2002-2007) – सामाजिक न्याय की त्रिस्तरीय व्यवस्था

इस दौरान राष्ट्रीय जनजाति वित्त विकास निगम की भूमिका महत्वपूर्ण रही। जनजातियों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विशेष अनुदान बढ़ाए गए।


अध्याय 7: ग्यारहवीं और बारहवीं योजना (2007-2017) – ज्ञान आधारित समाज और समावेशी विकास

7.1 शिक्षा में क्रांति (11th Plan)

ग्यारहवीं योजना में ‘सर्व शिक्षा अभियान’ को फ्लैगशिप प्रोग्राम बनाया गया।

  • विश्व बैंक के सहयोग से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु 2,736 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
  • जनजातीय छात्रों के लिए नवोदय विद्यालय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया।

7.2 समावेशी विकास (12th Plan: 2012-2017)

अंतिम पंचवर्षीय योजना का मूल मंत्र था— “तीव्र, अधिक समावेशी और सतत विकास”।

  • क्षेत्रीय संतुलन: उन राज्यों और समुदायों पर ध्यान दिया गया जो विकास की दौड़ में पीछे रह गए थे।
  • महिला सशक्तिकरण: जनजातीय महिलाओं की शैक्षणिक स्थिति सुधारने के लिए विशेष जेंडर-बजटिंग अपनाई गई।

अध्याय 8: जनजातीय विकास की प्रमुख रणनीतियाँ और परिणाम

योजना का स्तरमुख्य रणनीतिप्रमुख उपलब्धि
प्रारंभिक (1-4)सामुदायिक विकासबुनियादी ढांचे और अनुसंधान संस्थानों की स्थापना
मध्यम (5-8)जनजातीय उपयोजना (TSP)शोषण से मुक्ति और सघन क्षेत्र विकास
आधुनिक (9-12)समावेशी विकासशिक्षा का सार्वभौमिकरण और डिजिटल साक्षरता

अध्याय 9: चुनौतियाँ और भविष्य की राह

70 वर्षों की योजनाबद्ध यात्रा के बावजूद कुछ चुनौतियाँ आज भी विद्यमान हैं:

  1. पलायन: विस्थापन के कारण जनजातीय संस्कृति पर खतरा।
  2. कार्यान्वयन की कमी: आवंटित बजट का शत-प्रतिशत लाभ जमीनी स्तर तक न पहुँचना।
  3. स्वास्थ्य: वनांचलों में एनीमिया और कुपोषण की समस्या।

समाधान: वर्तमान में ‘नीति आयोग’ के माध्यम से ‘आकांक्षी जिला कार्यक्रम’ (Aspirational Districts Programme) इन समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य कर रहा है।


✅ निष्कर्ष (Conclusion)

भारत की पंचवर्षीय योजनाओं ने जनजातीय समाज को एक नई दिशा दी है। 1951 के अंधकार से लेकर 2017 के समावेशी विकास तक, हमने एक लंबी दूरी तय की है। आदिमजाति अनुसंधान संस्थानों की स्थापना ने जहाँ वैज्ञानिक आधार दिया, वहीं TSP ने वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की। श्री पुनाराम साहू सर के मार्गदर्शन में यह विश्लेषण हमें सिखाता है कि विकास केवल सड़कों और इमारतों का नाम नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति के सम्मान और खुशहाली की कहानी है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – Google Ranking के लिए

1. जनजातीय उपयोजना (TSP) की शुरुआत किस पंचवर्षीय योजना में हुई?
उत्तर: जनजातीय उपयोजना की शुरुआत पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-78) में हुई थी।

2. भारत में प्रथम आदिमजाति अनुसंधान संस्थान कब और कहाँ स्थापित हुए?
उत्तर: 1954 में केंद्र प्रवर्तित योजना के तहत पुराने मध्य प्रदेश, उड़ीसा, बिहार और पश्चिम बंगाल में ये संस्थान स्थापित किए गए।

3. ‘बिरसा मुंडा उलगुलान’ का जनजातीय विकास पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: इस महान आंदोलन ने जनजातीय स्वशासन (Swaraj) की नींव रखी, जिसे बाद में पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से संवैधानिक और प्रशासनिक पहचान मिली।

4. सर्व शिक्षा अभियान किस योजना का हिस्सा था?
उत्तर: यह ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) के दौरान एक प्रमुख फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में उभरा।

5. 12वीं पंचवर्षीय योजना का मुख्य लक्ष्य क्या था?
उत्तर: तीव्र, अधिक समावेशी और सतत विकास।


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नोट: यह लेख SERVER IP TECHNOLOGY के तत्वावधान में श्री पुनाराम साहू सर के विशेष मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। भारत के आर्थिक और जनजातीय इतिहास की “Full Jankari” पाने के लिए इसे शेयर करें। तकनीक और सामान्य ज्ञान के संगम के लिए हमसे जुड़े रहें।

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