HomeBlogबिलासपुर: छत्तीसगढ़ की ‘न्यायधानी’ और विकास का पावरहाउस (सम्पूर्ण गाइड 2026)

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की ‘न्यायधानी’ और विकास का पावरहाउस (सम्पूर्ण गाइड 2026)


प्रस्तावना (Introduction)
अगर आप छत्तीसगढ़ के नक्शे पर नजर डालें, तो राज्य के ठीक दिल में बसा एक शहर आपको अपनी ओर खींचेगा—वह है बिलासपुर। इसे सिर्फ एक शहर कहना गलत होगा; यह छत्तीसगढ़ की “न्यायधानी” (Judicial Capital) है, यह दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय है, और यह राज्य का सबसे बड़ा ऊर्जा केंद्र (Power Hub) है।
रायपुर अगर राज्य की प्रशासनिक राजधानी (Administrative Capital) है, तो बिलासपुर राज्य की सांस्कृतिक और न्यायिक आत्मा है। अरपा नदी के तट पर बसा यह शहर अपनी 400 साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत को समेटे हुए, आज 21वीं सदी के ‘स्मार्ट सिटी’ की दौड़ में तेजी से दौड़ रहा है।
चाहे आप यहाँ की विश्व-प्रसिद्ध कोसा सिल्क की साड़ियों की बात करें, सुगंधित दूबराज चावल की, या फिर अचानकमार टाइगर रिजर्व के घने जंगलों की—बिलासपुर के पास हर किसी के लिए कुछ न कुछ खास है। इस 3000 शब्दों के विस्तृत लेख में, हम बिलासपुर की हर गली, हर मोड़ और हर पहलू को गहराई से जानेंगे।

(Bilaspur City: The Judicial Capital & Power Hub of Chhattisgarh – Detailed Review)


  1. इतिहास: एक मछुआरिन की हिम्मत से ‘न्यायधानी’ तक (History of Bilaspur)
    बिलासपुर का इतिहास किसी फिल्मी कहानी से कम रोमांचक नहीं है। यह शहर रातों-रात नहीं बना, बल्कि सदियों के बदलाव का गवाह है।
    नामकरण की कहानी: बिलासा देवी केवट
    बिलासपुर का नाम 17वीं शताब्दी की एक वीरांगना मछुआरिन ‘बिलासा देवी केवट’ के नाम पर रखा गया था।
    किवदंतियों के अनुसार, बिलासा देवी अपने समय की एक साहसी महिला थीं। उस समय यह क्षेत्र रतनपुर के कलचुरी राजाओं के अधीन था। बिलासा देवी के साहस और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित होकर राजा ने उन्हें जागीर दी थी। उन्हीं के सम्मान में इस जगह का नाम पहले ‘बिलासापुर’ पड़ा, जो समय के साथ बिगड़कर और सुधरकर ‘बिलासपुर’ हो गया। आज भी बिलासपुर एयरपोर्ट का नाम ‘बिलासा देवी केवट हवाई अड्डा’ रखकर उन्हें सम्मान दिया गया है।
    रतनपुर का गौरवशाली युग (The Kalchuri Era)
    बिलासपुर शहर को समझने के लिए आपको इसके पड़ोसी कस्बे रतनपुर को जानना होगा। मुगल काल और उससे पहले, रतनपुर ही इस पूरे क्षेत्र (तब का दक्षिण कोसल) की राजधानी हुआ करता था। कलचुरी राजवंश के राजाओं ने रतनपुर से लगभग 1000 वर्षों तक शासन किया। बिलासपुर उस समय एक छोटा सा गाँव या पड़ाव हुआ करता था।
    मराठा और ब्रिटिश शासन
    वर्ष 1741 के आसपास यहाँ मराठों (भोसले वंश) का आगमन हुआ। उन्होंने रतनपुर को ही केंद्र बनाए रखा। लेकिन असली बदलाव तब आया जब 1854 में अंग्रेजों (British East India Company) ने इस क्षेत्र को अपने अधीन कर लिया। अंग्रेजों को प्रशासन के लिए एक बेहतर जगह की तलाश थी। अरपा नदी के किनारे की उपजाऊ जमीन और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, उन्होंने बिलासपुर को महत्व देना शुरू किया।
    • 1861: बिलासपुर को आधिकारिक तौर पर एक ‘जिला’ (District) घोषित किया गया।
    • 1867: यहाँ ‘नगर निगम’ (Municipality) का गठन हुआ।
    • रेलवे का आगमन: 19वीं सदी के अंत में जब ‘बंगाल-नागपुर रेलवे’ (BNR) की लाइन यहाँ बिछाई गई, तब बिलासपुर का असली विकास शुरू हुआ। यह कलकत्ता और मुंबई के बीच एक प्रमुख जंक्शन बन गया।

  1. भौगोलिक स्थिति और जलवायु (Geography & Climate)
    बिलासपुर की भौगोलिक स्थिति इसे छत्तीसगढ़ का केंद्र बिंदु बनाती है।
    • स्थिति: यह शहर 22.09°N अक्षांश और 82.15°E देशांतर पर स्थित है।
    • नदी: शहर के बीचों-बीच से अरपा नदी बहती है। यह नदी पेंड्रा के पठार (खोन्डरी-खोंगसरा) से निकलती है। अरपा बिलासपुर की ‘जीवनरेखा’ है, हालांकि गर्मियों में यह सूख जाती है, लेकिन ‘अरपा बैराज प्रोजेक्ट’ से इसमें पानी रोकने की कोशिश की जा रही है।
    • मिट्टी: यहाँ मुख्य रूप से लाल-पीली मिट्टी (मटासी) और काली मिट्टी (कन्हार) पाई जाती है, जो धान की खेती के लिए सर्वोत्तम है।
    मौसम का मिजाज
    बिलासपुर का मौसम थोड़ा चरम (Extreme) रहता है:
    • गर्मियां (मार्च से जून): यहाँ भीषण गर्मी पड़ती है। तापमान अक्सर 45°C से 47°C तक पहुँच जाता है। लू (Loo) चलना आम बात है।
    • मानसून (जुलाई से सितंबर): यहाँ अच्छी बारिश होती है, जिससे शहर हरा-भरा हो जाता है। औसत वर्षा 1200 मिमी के आसपास होती है।
    • सर्दी (नवंबर से फरवरी): सर्दियाँ सुखद होती हैं। तापमान 8°C से 10°C तक गिर सकता है। घूमने के लिए यह सबसे अच्छा समय है।

  1. ‘न्यायधानी’ का दर्जा: हाई कोर्ट की कहानी
    बिलासपुर को पूरे देश में “Nyaydhani” (City of Justice) के नाम से जाना जाता है।
    जब 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ एक नया राज्य बना, तो राजधानी रायपुर को बनाया गया। लेकिन, शक्ति के संतुलन (Decentralization of Power) के लिए यह तय किया गया कि राज्य का उच्च न्यायालय (High Court) बिलासपुर में स्थापित होगा।
    • बोधरी में स्थित: हाई कोर्ट शहर के बाहरी इलाके ‘बोधरी’ में स्थित है।
    • एशिया का सबसे बड़ा भवन: कहा जाता है कि बिलासपुर हाई कोर्ट की बिल्डिंग, किसी भी न्यायिक परिसर (Judicial Complex) के तौर पर एशिया की सबसे बड़ी इमारतों में से एक है। इसकी भव्यता देखने लायक है।
    • वकीलों का शहर: हाई कोर्ट होने के कारण यहाँ वकीलों, जजों और कानून के छात्रों की भारी तादाद है। इससे शहर की अर्थव्यवस्था और बौद्धिक स्तर पर गहरा असर पड़ता है।

  1. अर्थव्यवस्था: बिलासपुर कैसे कमाता है? (Economy & Industry)
    बिलासपुर की अर्थव्यवस्था को चार मुख्य स्तंभों पर खड़ा माना जा सकता है: रेलवे, बिजली, कोयला और कृषि।
    (A) रेलवे जोन का मुख्यालय (SECR)
    भारतीय रेलवे के इतिहास में बिलासपुर का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा है।
    • South East Central Railway (SECR): बिलासपुर SECR जोन का मुख्यालय है।
    • कमाई का रिकॉर्ड: यह जोन भारतीय रेलवे के लिए सबसे ज्यादा राजस्व (Revenue) कमाने वाले जोनों में से एक है। यहाँ से कोयले की ढुलाई (Freight) बड़े पैमाने पर होती है।
    • बिलासपुर रेलवे स्टेशन छत्तीसगढ़ का सबसे व्यस्त स्टेशन है और यहाँ भारत की लगभग सभी प्रमुख ट्रेनें रुकती हैं।
    (B) ऊर्जा का कटोरा (Power Hub)
    बिलासपुर और इसके आसपास के जिले (कोरबा, जांजगीर) मिलकर इतनी बिजली पैदा करते हैं कि इसे ‘Power Bowl of India’ कहा जा सकता है।
    • NTPC सीपत: शहर के पास सीपत में ‘राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम’ (NTPC) का सुपर थर्मल पावर प्लांट है। इसकी क्षमता 2980 मेगावाट है। यह प्लांट अपनी ‘सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी’ के लिए जाना जाता है।
    (C) कोयला (Black Gold)
    • SECL मुख्यालय: ‘साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड’ (SECL), जो कोल इंडिया की सबसे बड़ी सहायक कंपनियों में से एक है, उसका मुख्यालय बिलासपुर (सीपत रोड) में है। कोयला खदानों का संचालन और प्रबंधन यहीं से होता है।
    (D) उद्योग और बाजार
    • सिरगिट्टी, तिफरा और सिलपहरी: ये बिलासपुर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Areas) हैं। यहाँ स्पंज आयरन, रोलिंग मिल्स और केमिकल फैक्ट्रियां हैं।
    • व्यापार विहार: यह शहर का सबसे बड़ा थोक (Wholesale) बाजार है। यहाँ से आसपास के 10 जिलों में माल सप्लाई होता है।
    (E) कोसा सिल्क (Handloom Industry)
    बिलासपुर के पास जांजगीर और चाम्पा का क्षेत्र सटा हुआ है, लेकिन बिलासपुर शहर (विशेषकर कोनी और आसपास के गाँव) में भी कोसा सिल्क का काम होता है। यहाँ का प्राकृतिक कोसा (Tussar Silk) अपनी गुणवत्ता और सुनहरे रंग के लिए विदेश तक निर्यात होता है।

  1. शिक्षा और कोचिंग: छत्तीसगढ़ का ‘कोटा’
    पिछले एक दशक में बिलासपुर शिक्षा के एक बड़े केंद्र (Education Hub) के रूप में उभरा है। इसे अब “छत्तीसगढ़ का शिक्षा का गढ़” कहा जाने लगा है।
    विश्वविद्यालय (Universities):
  2. गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU): कोनी में स्थित यह सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। यहाँ देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं। इसका कैंपस बहुत विशाल और हरा-भरा है।
  3. अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय: यह राज्य स्तरीय यूनिवर्सिटी है जिससे संभाग के सैकड़ों कॉलेज जुड़े हैं।
  4. पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय: दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) का केंद्र।
  5. निजी विश्वविद्यालय: सी.वी. रमन यूनिवर्सिटी (कोटा) और डॉ. सी.वी. रमन इंस्टिट्यूट जैसे कई निजी संस्थान भी हैं।
    कोचिंग कल्चर (The Coaching Hub):
    बिलासपुर के गांधी चौक, मंगला चौक और नेहरू चौक के आसपास आपको हजारों छात्र मिलेंगे। यह शहर CGPSC (राज्य लोक सेवा आयोग) और Railway Exam की तैयारी का केंद्र बन गया है। राज्य भर से छात्र यहाँ हॉस्टल लेकर सालों-साल तैयारी करते हैं। यहाँ की “लाइब्रेरी संस्कृति” (E-Library) बहुत तेजी से बढ़ी है, जहाँ छात्र 24 घंटे पढ़ाई करते हैं।

  1. पर्यटन: बिलासपुर दर्शन (Tourism & Places to Visit)
    बिलासपुर सिर्फ उद्योग और कोर्ट तक सीमित नहीं है। पर्यटन के लिहाज से यह शहर और इसका आसपास का इलाका बहुत समृद्ध है।
    (A) शहर के भीतर (Within City Limits)
  2. कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क (Kanan Pendari Zoo): शहर से मुंगेली रोड पर स्थित यह चिड़ियाघर नहीं, बल्कि एक जंगल जैसा अनुभव है। यहाँ शेर, बाघ, भालू और हिरणों की कई प्रजातियां हैं। वीकेंड पर यहाँ हजारों लोग पिकनिक मनाने आते हैं।
  3. विवेकानंद उद्यान (Company Garden): शहर के बीचों-बीच स्थित यह सबसे पुराना गार्डन है। सुबह की सैर के लिए यह बिलासपुर वासियों की पहली पसंद है।
  4. अरपा रिवर व्यू: सरकार ने अरपा नदी के किनारों को पक्का करके एक सुंदर ‘रिवर व्यू’ पॉइंट बनाया है। शाम को यहाँ का नजारा और लाइटिंग बहुत खूबसूरत होती है।
  5. ऊर्जा पार्क (Urja Park): विनायक चौक के पास बना यह पार्क बच्चों और बड़ों के लिए बेहतरीन है। यहाँ संगीतमय फव्वारे (Musical Fountains) हैं।
    (B) धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल (Nearby Attractions)
  6. रतनपुर (25 किमी दूर):
    o महामाया मंदिर: 11वीं सदी में राजा रत्नदेव द्वारा बनवाया गया यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। नवरात्रि में यहाँ लाखों की भीड़ होती है।
    o रतनपुर का किला: यहाँ एक पुराना ऐतिहासिक किला है, जो अब खंडहर हो चुका है लेकिन अपनी भव्यता की कहानी कहता है।
    o राम टेकरी: पहाड़ी पर स्थित यह राम मंदिर बहुत सुंदर है।
  7. मल्हार (30 किमी दूर):
    o यह स्थान पुरातत्व (Archaeology) का खजाना है। इसे प्राचीन काल में ‘मल्लल पट्टनम’ कहा जाता था।
    o पातालेश्वर महादेव मंदिर: यहाँ की नक्काशी देखने लायक है।
    o डिंडेश्वरी माता मंदिर: काले ग्रेनाइट पत्थर से बनी माता की मूर्ति अद्भुत है।
    o संग्रहालय: यहाँ खुदाई में मिलीं 2000 साल पुरानी मूर्तियाँ रखी हैं, जिनमें जैन, बौद्ध और हिंदू धर्म की झलक मिलती है।
  8. तालागाँव (Tala):
    o यहाँ मनियारी नदी के किनारे ‘रुद्र शिव’ (देवरानी-जेठानी मंदिर) की अद्भुत प्रतिमा है। इस मूर्ति के शरीर के हर अंग को अलग-अलग जानवरों (सांप, मेंढक, केकड़ा आदि) के मुख से बनाया गया है। यह दुनिया की इकलौती ऐसी मूर्ति है।
  9. खूंटाघाट बांध (Khutaghat Dam): रतनपुर के आगे स्थित यह बांध चारों तरफ से पहाड़ियों और जंगलों से घिरा है। बारिश के मौसम में जब इसका वेस्ट-वियर (Waste Weir) चलता है, तो नजारा जन्नत जैसा होता है।
  10. अचानकमार टाइगर रिजर्व (Achanakmar Tiger Reserve): बिलासपुर से करीब 60 किमी दूर, यह एक बायोस्फियर रिजर्व है। घने साल के जंगल और बाघों के लिए यह प्रसिद्ध है। अमरकंटक जाने का रास्ता यहीं से होकर जाता है।

  1. खान-पान: बिलासपुरिया जायका (Food & Cuisine)
    बिलासपुर के लोग खाने-पीने के बहुत शौकीन हैं। यहाँ आपको पारंपरिक छत्तीसगढ़ी खाने के साथ-साथ मॉडर्न कैफे कल्चर भी मिलेगा।
    • ठेठ छत्तीसगढ़ी स्वाद: यहाँ के घरों और कुछ होटलों में चीला (Chila), फरा (Fara), चौसेला, और ठेठरी-खुर्मी खूब खाया जाता है। ‘बबरावड़ा’ यहाँ का एक मीठा व्यंजन है।
    • स्ट्रीट फूड (Street Food):
    o गोल बाजार की चाट: गोल बाजार और सदर बाजार की गलियों में मिलने वाली चाट और गुपचुप (पानीपुरी) का कोई मुकाबला नहीं।
    o समोसे: बिलासपुर में समोसे बहुत चाव से खाए जाते हैं। खासकर रेलवे स्टेशन के पास और ‘बिल्हा के समोसे’ (पास का एक कस्बा) बहुत मशहूर हैं।
    o पोहा-जलेबी: सुबह का नाश्ता पोहा-जलेबी के बिना अधूरा है।
    • देवानंगन का पेड़ा: रतनपुर और बिलासपुर में दूध से बने पेड़े बहुत प्रसिद्ध हैं।

  1. कला और संस्कृति (Culture & Festivals)
    बिलासपुर एक ‘कॉस्मोपॉलिटन’ शहर है जहाँ हर धर्म और प्रांत के लोग रहते हैं (रेलवे और उद्योगों के कारण)।
    • राउत नाचा (Rawat Nacha): दिवाली के बाद होने वाला ‘राउत नाचा महोत्सव’ बिलासपुर की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान है। इसमें यदुवंशी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में लाठी लेकर नृत्य करते हैं। यह कार्यक्रम लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में होता है और पूरी रात चलता है।
    • पोला और तीजा: यह यहाँ की महिलाओं का सबसे बड़ा त्योहार है।
    • भोजली महोत्सव: रक्षाबंधन के दूसरे दिन भोजली विसर्जन का जुलूस अरपा नदी तक निकलता है।
    • भाषा: यहाँ की मुख्य भाषा ‘छत्तीसगढ़ी’ है। लेकिन हिंदी और अंग्रेजी भी पूरी तरह बोली और समझी जाती है। “का हाल हे जी?” (कैसे हो आप?) यहाँ का आम अभिवादन है।

  1. आधुनिक विकास और रियल एस्टेट (Modern Development)
    बिलासपुर अब बदल रहा है। यह Smart City Mission का हिस्सा है।
    • सीवरेज प्रोजेक्ट: पूरे शहर में भूमिगत सीवरेज लाइन बिछाई गई है, हालांकि इसके निर्माण के दौरान लोगों को धूल और गड्ढों से परेशानी हुई, लेकिन यह भविष्य के लिए जरूरी है।
    • अरपा रिवरफ्रंट: साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर अरपा नदी के दोनों किनारों को विकसित किया जा रहा है। फोर-लेन सड़कें बनाई जा रही हैं।
    • हवाई सेवा: चकरभाठा स्थित एयरपोर्ट से अब दिल्ली, जबलपुर, प्रयागराज और जगदलपुर के लिए फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। सेना (Army) का भी यहाँ बड़ा बेस बनाने का प्लान है।
    • मॉल्स और मल्टीप्लेक्स: सिटी 36 मॉल (City 36) और रामा मैग्नेटो मॉल (Rama Magneto) शहर के युवाओं के लिए हैंगआउट स्पॉट्स हैं।

  1. चुनौतियां (Challenges)
    हर शहर की तरह बिलासपुर की भी अपनी समस्याएं हैं जिन्हें छिपाना नहीं चाहिए:
  2. गर्मी और प्रदूषण: पेड़ों की कटाई और औद्योगीकरण के कारण गर्मी बहुत बढ़ती है। धूल (Dust) एक बड़ी समस्या है।
  3. ट्रैफिक: शहर की सड़कें पुरानी हैं और वाहनों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि अब फ्लाईओवर बनने से राहत मिली है।
  4. अरपा का जलस्तर: अरपा नदी साल भर नहीं बहती, यह एक मौसमी नदी है। इसे पुनर्जीवित करना सबसे बड़ी चुनौती है।

निष्कर्ष (Conclusion)
बिलासपुर केवल ईंट-पत्थर का शहर नहीं है, यह संभावनाओं का शहर है।
एक तरफ यहाँ 1000 साल पुराने मंदिर हैं जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं, तो दूसरी तरफ विशाल पावर प्लांट और हाई कोर्ट हैं जो आधुनिक भारत की तस्वीर पेश करते हैं।
यहाँ का इंसान बहुत मिलनसार और सीधा-सादा है। अगर आप एक छात्र हैं, तो बिलासपुर आपको सपने देखना सिखाएगा। अगर आप व्यापारी हैं, तो यह आपको बाज़ार देगा। और अगर आप पर्यटक हैं, तो यहाँ के जंगल और मंदिर आपको शांति देंगे।
बिलासपुर की तासीर गर्म है (मौसम में), लेकिन यहाँ के लोगों का दिल बहुत नरम है।


FAQ: बिलासपुर के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: बिलासपुर घूमने के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर: अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे बेहतरीन है। मानसून (जुलाई-अगस्त) में खूंटाघाट और अचानकमार का नजारा अद्भुत होता है।
Q2: बिलासपुर से रायपुर की दूरी कितनी है?
उत्तर: लगभग 115-120 किलोमीटर। सड़क मार्ग से 2 से 2.5 घंटे लगते हैं। वंदे भारत और इंटरसिटी जैसी ट्रेनें इसे 1.5 घंटे में तय कर लेती हैं।
Q3: क्या बिलासपुर में एयरपोर्ट है?
उत्तर: हाँ, ‘बिलासा देवी केवट हवाई अड्डा’ (Bilasipura Airport) है, जो शहर से करीब 10-12 किमी दूर चकरभाठा में स्थित है।
Q4: बिलासपुर किस चीज के लिए सबसे ज्यादा मशहूर है?
उत्तर: अपने उच्च न्यायालय (High Court), रेलवे जोन (SECR), सुगंधित दूबराज चावल और कोसा सिल्क के लिए।
Q5: बिलासपुर में रुकने के लिए अच्छी जगहें कौन सी हैं?
उत्तर: यहाँ हर बजट के होटल उपलब्ध हैं। कोर्ट व्यू होटल, आनंद इम्पीरियल, ईस्ट पार्क और कई धर्मशालाएं भी उपलब्ध हैं।


(लेखक का नोट: यह लेख 2026 तक की अद्यतन जानकारी और जमीनी हकीकत पर आधारित है। बिलासपुर एक बढ़ता हुआ शहर है, इसलिए आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं।)

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