HomeBlogभारत की राजव्यवस्था के इस रोमांचक सफर

भारत की राजव्यवस्था के इस रोमांचक सफर

1. लोक सेवा आयोग के सदस्यों से सम्बन्धित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. किसी राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होगा, किन्तु भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होगा।
  2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष से भिन्न कोई अन्य सदस्य संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने का पात्र होगा, किन्तु भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होगा।
    उपरोक्त में कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

सही उत्तर: 1 और 2 दोनों

स्पष्टीकरण:
ये दोनों कथन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्षों और सदस्यों की पुनर्नियुक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 319) का सटीक वर्णन करते हैं। ये प्रावधान आयोगों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।


2. अन्तर्राज्यीय परिषद् है?

सही उत्तर: संवैधानिक संस्था

स्पष्टीकरण:
अन्तर्राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) एक संवैधानिक संस्था है। इसका गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत किया जाता है। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच, और विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करना है।


3. निम्न में कौन-सा कथन असत्य है?

सही उत्तर: वर्तमान में भारत सरकार ने 5 सम्प्रदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है।

स्पष्टीकरण:
यह कथन असत्य है क्योंकि वर्तमान में भारत सरकार ने 6 समुदायों (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन) को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है।


4. वर्तमान में केन्द्रीय सतर्कता आयोग है?

सही उत्तर: सांविधिक संस्था

स्पष्टीकरण:
केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) एक सांविधिक संस्था (Statutory body) है। इसे 2003 में ‘केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003’ के तहत वैधानिक दर्जा दिया गया था, जबकि इसकी स्थापना 1964 में संथानम समिति की सिफारिशों पर एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा की गई थी।


5. प्रथम राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के समय देश के राष्ट्रपति कौन थे?

सही उत्तर: डॉ. एस राधाकृष्णन

स्पष्टीकरण:
भारत में प्रथम राष्ट्रीय आपातकाल 26 अक्टूबर 1962 को चीन के आक्रमण के दौरान घोषित किया गया था। उस समय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति थे।


6. राज्य में संवैधानिक तन्त्र के विफल होने पर राष्ट्रपति, राज्य की शक्तियाँ अपने हाथ में ले सकता है।

  1. राज्यपाल में निहित और प्रयोज्य सभी शक्तियाँ ग्रहण कर लेता है।
  2. घोषणा कर सकता है कि राज्य विधानमण्डल की शक्तियाँ संसद द्वारा संचालित होंगी।
  3. उच्च न्यायालय की शक्तियाँ ग्रहण कर सकता है।
  4. अनुच्छेद-20 व 21 के अतिरिक्त किसी या सभी मौलिक अधिकारों का निलम्बन कर सकता है।
    उपरोक्त में कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

सही उत्तर: 1 और 2

स्पष्टीकरण:
राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) के दौरान, राष्ट्रपति राज्यपाल की सभी शक्तियाँ ग्रहण कर लेते हैं और यह घोषणा कर सकते हैं कि राज्य विधानमंडल की शक्तियाँ संसद द्वारा संचालित होंगी। हालांकि, राष्ट्रपति उच्च न्यायालय की शक्तियों को ग्रहण नहीं कर सकता (उच्च न्यायालय स्वतंत्र रूप से कार्य करता रहता है)। मौलिक अधिकारों का निलंबन राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के तहत होता है, राष्ट्रपति शासन के तहत नहीं।


7. संघ एवं राज्यों के बीच करों के विभाजन सम्बन्धी प्रावधानों को…

सही उत्तर: वित्तीय आपात के समय निलम्बित किया जा सकता है

स्पष्टीकरण:
वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) के दौरान, राष्ट्रपति केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के वितरण से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को निलंबित या संशोधित कर सकते हैं। यह केंद्र सरकार को अधिक वित्तीय नियंत्रण प्रदान करता है।


8. निम्नलिखित में से कौन-सी, भारत के संविधान के अनुच्छेद-343 की विशेषता/विशेषताएँ नहीं है/हैं

  1. देवनागरी लिपि में हिन्दी संघ की राष्ट्रभाषा होगी।
  2. संघ की राजभाषा हिन्दी देवनागरी लिपि में होगी।
  3. राज्यों में शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा।
  4. यदि दो या अधिक राज्य सहमत हों, तो राज्यों के बीच संचार की राजभाषा हिन्दी होनी चाहिए।
    नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

सही उत्तर: 1, 3 और 4

स्पष्टीकरण:
अनुच्छेद 343(1) के अनुसार हिन्दी ‘राजभाषा’ है, ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं। इसलिए कथन 1 गलत है। कथन 3 और 4 अनुच्छेद 343 का हिस्सा नहीं हैं; ये अन्य राजभाषा प्रावधानों से संबंधित हैं। केवल कथन 2 ही अनुच्छेद 343 का सही वर्णन करता है। प्रश्न में ‘नहीं है’ पूछा गया है, इसलिए 1, 3 और 4 सही विकल्प हैं।


9. अध्यक्षात्मक सरकार के काम करने का सिद्धान्त है

सही उत्तर: शक्तियों का पृथक्करण

स्पष्टीकरण:
अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली (Presidential system) में, सरकार की तीनों शाखाओं (कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका) के बीच शक्तियों का कठोर पृथक्करण होता है, जिससे कोई भी एक शाखा अत्यधिक शक्तिशाली न हो सके।


10. यदि कोई राज्य सरकार प्रशासनिक शक्तियों के प्रयोग में केन्द्र के निर्देशों का पालन करने में असमर्थ रहती है, तो…

सही उत्तर: राज्य में संवैधानिक आपात की घोषणा की जा सकती है तथा राष्ट्रपति राज्य की सभी शक्तियाँ ग्रहण कर सकता है

स्पष्टीकरण:
अनुच्छेद 365 के अनुसार, यदि कोई राज्य केंद्र के निर्देशों का पालन करने या उन्हें प्रभावी करने में विफल रहता है, तो राष्ट्रपति यह मान सकते हैं कि राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो गया है, और अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।


11. यदि संसद में अयोग्य या अयोग्य करार व्यक्ति मत देता है तो…

सही उत्तर: उस पर इस प्रकार बैठक में भाग लेने पर ₹500 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना किया जा सकता है।

स्पष्टीकरण:
संविधान के अनुच्छेद 104 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है या अयोग्य ठहराया गया है, सदन की कार्यवाही में भाग लेता है या मतदान करता है, तो उसे ₹500 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना पड़ सकता है।


12. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए

  1. राज्य सभा का सभापति तथा उपसभापति उस सदन के सदस्य नहीं होते।
  2. जबकि राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्यों को मतदान का कोई अधिकार नहीं होता, उनको उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में मतदान का अधिकार होता है।
    उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

सही उत्तर: केवल 2

स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है क्योंकि राज्य सभा का उपसभापति सदन का सदस्य होता है, जबकि सभापति (उपराष्ट्रपति) सदन का सदस्य नहीं होता। कथन 2 सही है क्योंकि राष्ट्रपति के चुनाव में केवल निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं, जबकि उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत) मतदान करते हैं।


13. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए

  1. एक विधेयक जो राज्य के विधानमण्डल में लम्बित हो, वह उसके सदन या सदनों के सत्रावसान के कारण समाप्त नहीं हो जाता है।
  2. किसी राज्य की विधानपरिषद् में लम्बित विधेयक, जो विधानसभा में पारित न हुआ हो, विधानसभा के भंग हो जाने पर समाप्त नहीं हो जाता।
    उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

सही उत्तर: 1 और 2 दोनों

स्पष्टीकरण:
ये दोनों कथन राज्य विधानमंडल में विधेयकों की स्थिति से संबंधित हैं। सत्रावसान (Prorogation) विधेयक को समाप्त नहीं करता, और विधानपरिषद में लंबित विधेयक (जो विधानसभा से पारित न हुआ हो) विधानसभा के भंग होने पर भी समाप्त नहीं होता।


14. राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश अधिवेशन आरम्भ होने के कितने दिनों तक अधिक से अधिक एक बार में प्रभावी रह सकता है?

सही उत्तर: 6 सप्ताह

स्पष्टीकरण:
राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश (अनुच्छेद 123) संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह के भीतर संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह प्रभावी होना बंद हो जाता है।


15. भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

सही उत्तर: राष्ट्रपति के निर्वाचन के सम्बन्ध में यदि कोई विवाद हो तो वह सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नही आता है

स्पष्टीकरण:
यह कथन गलत है। राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित सभी विवादों का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया जाता है। यह सर्वोच्च न्यायालय का मूल और अनन्य क्षेत्राधिकार है।


16. भारतीय संविधान के प्रोटोकॉल के अनुसार पूर्वता-क्रम में निम्न में से सबसे पहले कौन है?

सही उत्तर: अपने राज्य में राज्यपाल

स्पष्टीकरण:
भारत के वारंट ऑफ प्रेसीडेंस (Order of Precedence) के अनुसार, अपने संबंधित राज्यों में राज्यपाल की पदवी भूतपूर्व राष्ट्रपति, उप-प्रधानमन्त्री और लोकसभा अध्यक्ष से पहले आती है।


17. युद्ध के कारण राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा का निम्नलिखित में से क्या प्रभाव होता है?

  1. केन्द्रीय सरकार, राज्यों को यह निर्देश दे सकती है कि वे राज्य की कार्यपालिका शक्तियों का प्रयोग कैसे करें।
  2. मौलिक अधिकार स्वतः ही निलम्बित हो जाते हैं।
  3. राज्य विधानमण्डल निलम्बित हो जाते हैं।
  4. संसद, राज्य सूची के किसी भी विषय पर कानून बना सकती है।
    कूट

सही उत्तर: 1 और 4

स्पष्टीकरण:
राष्ट्रीय आपातकाल में (अनुच्छेद 352):

  1. केंद्र सरकार राज्यों को कार्यकारी निर्देश दे सकती है (सही)।
  2. मौलिक अधिकार ‘स्वतः’ निलंबित नहीं होते; उन्हें राष्ट्रपति के आदेश द्वारा निलंबित किया जाता है (अनुच्छेद 20, 21 को छोड़कर)। इसलिए कथन 2 गलत है।
  3. राज्य विधानमंडल निलंबित नहीं होता, बल्कि उसकी विधायी शक्ति संसद के अधीन हो जाती है। इसलिए कथन 3 गलत है।
  4. संसद, राज्य सूची के किसी भी विषय पर कानून बना सकती है (सही)।

18. द्वितीय राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के समय देश के राष्ट्रपति थे।

सही उत्तर: वी वी गिरि

स्पष्टीकरण:
द्वितीय राष्ट्रीय आपातकाल 3 दिसंबर 1971 को भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान घोषित किया गया था। उस समय वी.वी. गिरि भारत के राष्ट्रपति थे।


19. परिसीमन आयोग का अध्यक्ष होता है।

सही उत्तर: मुख्य चुनाव आयुक्त

स्पष्टीकरण:
परिसीमन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त पदेन सदस्य होते हैं और अक्सर इसकी अध्यक्षता करते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी अध्यक्ष हो सकते हैं, लेकिन दिए गए विकल्पों में सबसे उपयुक्त ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ है, जो इसका एक अभिन्न अंग होता है।


20. नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक को पदमुक्त किया जा सकता है

सही उत्तर: उसी प्रकार जिस प्रकार उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है

स्पष्टीकरण:
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को पद से हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। यह संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।


21. भारत का सॉलिसिटर जनरल होता है:

सही उत्तर: एक न्यायिक सलाहकार

स्पष्टीकरण:
भारत का सॉलिसिटर जनरल भारत के महान्यायवादी (Attorney General) के अधीन दूसरा सबसे बड़ा कानूनी अधिकारी होता है। वह भारत सरकार को कानूनी मामलों पर सलाह देता है और अदालतों में उसका प्रतिनिधित्व करता है। वह एक न्यायिक सलाहकार होता है, न कि प्रशासनिक अधिकारी।


22. निम्न में किस सेवानिवृत्त पदाधिकारी को सरकार के अधीन किसी पद पर नियुक्त करने पर वर्जना है?

सही उत्तर: कम्पट्रोलर एण्ड ऑडिटर जनरल

स्पष्टीकरण:
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को सेवानिवृत्ति के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी पद पर नियुक्त होने पर प्रतिबंध है। यह उनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए है।


23. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत के महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) किसी भी संसदीय समिति के सदस्य हो सकते हैं।
  2. भारत के महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं।
  3. भारत के महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) की नियुक्ति के लिए किसी व्यक्ति को भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायधीश की नियुक्ति के लिए अर्हित होना अनिवार्य है।
    उपरोक्त कथनों में से कौन-से कथन सही है?

सही उत्तर: ये सभी

स्पष्टीकरण:
भारत का महान्यायवादी संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग ले सकता है, समितियों का सदस्य हो सकता है, लेकिन उसे वोट देने का अधिकार नहीं होता। उनकी योग्यता सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होनी चाहिए।


24. संविधान के अन्तर्गत:

सही उत्तर: अखिल भारतीय, केन्द्रीय व राज्यीय तीन प्रकार की नागरिक सेवाओं का प्रावधान है

स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान तीन प्रकार की नागरिक सेवाओं का प्रावधान करता है:

  1. अखिल भारतीय सेवाएँ (All India Services): जैसे IAS, IPS, IFS (वन सेवा), जिनकी भर्ती केंद्र सरकार द्वारा की जाती है लेकिन वे केंद्र और राज्यों दोनों के अधीन कार्य करते हैं।
  2. केन्द्रीय सेवाएँ (Central Services): जैसे IRS, IFS (विदेश सेवा), जिनकी भर्ती और नियंत्रण पूरी तरह से केंद्र सरकार के पास होता है।
  3. राज्य सेवाएँ (State Services): जैसे राज्य प्रशासनिक सेवाएँ, जिनकी भर्ती और नियंत्रण संबंधित राज्य सरकारों के पास होता है।

25. सामाजिक सुरक्षा एवं सामाजिक बीमा विषय हैं:

सही उत्तर: समवर्ती सूची में

स्पष्टीकरण:
सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची का विषय है। इसका अर्थ है कि केंद्र और राज्य दोनों इस विषय पर कानून बना सकते हैं।


26. निम्न वाक्यों का अध्ययन कीजिए:
कथन (1) मंत्री नीति बनाते हैं और लोक सेवक उनका क्रियान्वयन करते हैं।
कारण (2) संसदीय प्रणाली में मंत्रियों का उत्तरदायित्व’ होता है।

सही उत्तर: कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन का सही स्पष्टीकरण है।

स्पष्टीकरण:
संसदीय प्रणाली में, मंत्री (कार्यपालिका) नीतियां बनाते हैं और लोक सेवक (स्थायी कार्यपालिका) उनका क्रियान्वयन करते हैं। मंत्रियों का संसद के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व होता है, जिसका अर्थ है कि वे अपने विभाग की नीतियों और कार्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह उत्तरदायित्व ही उन्हें नीति निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाता है।


27. भारतीय संसदीय प्रणाली ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से इस बात में भिन्न है कि भारत में…

सही उत्तर: न्यायिक पुनर्विलोकन की प्रणाली है।

स्पष्टीकरण:
भारतीय संसदीय प्रणाली में न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review) का प्रावधान है, जो ब्रिटिश प्रणाली में नहीं है। ब्रिटेन में संसद की संप्रभुता का सिद्धांत है, जबकि भारत में संविधान की सर्वोच्चता का सिद्धांत है, जिसके तहत न्यायपालिका कानूनों की संवैधानिक वैधता की समीक्षा कर सकती है। अन्य विकल्प (वास्तविक/नाममात्र की कार्यपालिका, सामूहिक उत्तरदायित्व, द्विसदनी विधायिका) दोनों प्रणालियों में समान हैं।


28. भारत में प्रजातंत्र इस तथ्य पर आधारित है कि…

सही उत्तर: जनता को सरकारों को चुनने तथा बदलने का अधिकार प्राप्त है।

स्पष्टीकरण:
प्रजातंत्र या लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यही है कि अंतिम शक्ति जनता में निहित होती है। जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है और उन्हें बदलने का अधिकार भी रखती है, जिससे सरकार जनता के प्रति जवाबदेह बनी रहती है।


29. भारत में संसदीय प्रणाली की सरकार है, क्योंकि…

सही उत्तर: मंत्रिपरिषद्, लोक सभा के प्रति उत्तरदायी है

स्पष्टीकरण:
संसदीय प्रणाली की सरकार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद्) विधायिका (लोक सभा) के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। इसका अर्थ है कि यदि लोक सभा मंत्रिपरिषद् में अविश्वास व्यक्त करती है, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।


30. संसदीय सरकार का सफलतापूर्वक कार्य करना निर्भर होता है:

सही उत्तर: दो दलीय प्रणाली पर

स्पष्टीकरण:
पारंपरिक रूप से, संसदीय प्रणाली दो-दलीय प्रणाली में अधिक सफलतापूर्वक काम करती है, क्योंकि यह एक स्पष्ट बहुमत और एक मजबूत विपक्ष प्रदान करती है, जिससे सरकार में स्थिरता आती है। बहुदलीय प्रणाली में गठबंधन सरकारें अधिक आम होती हैं, जो कभी-कभी अस्थिर हो सकती हैं।


31. यदि भारत वर्तमान संसदीय व्यवस्था के स्थान पर अध्यक्षात्मक व्यवस्था को अपना लेता है तो:

सही उत्तर: शासनाध्यक्ष का कार्यकाल स्थिर रहेगा

स्पष्टीकरण:
अध्यक्षात्मक प्रणाली में (जैसे अमेरिका में), राष्ट्रपति (शासनाध्यक्ष) का कार्यकाल निश्चित होता है और वह विधायिका के प्रति उत्तरदायी नहीं होता। उसे महाभियोग के माध्यम से ही हटाया जा सकता है, जो एक कठिन प्रक्रिया है। संसदीय प्रणाली में, प्रधानमंत्री का कार्यकाल बहुमत पर निर्भर करता है।


32. निम्नलिखित वक्तव्यों में से कौन-सा भारतीय संघीय व्यवस्था की सही प्रकृति बताता है?

सही उत्तर: भारतीय संघ इकाइयों की सहमति का परिणाम नहीं है

स्पष्टीकरण:
भारतीय संघवाद की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि राज्यों को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है। यह अमेरिकी संघवाद से भिन्न है, जहाँ राज्य एक समझौते के तहत एकजुट हुए थे। भारत में, संघ अविनाशी है, जबकि राज्य अविनाशी नहीं हैं।


33. भारतीय संघवाद बल देता है:

सही उत्तर: राष्ट्र की एकता पर

स्पष्टीकरण:
भारतीय संघवाद की प्रकृति सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की है, जिसमें केंद्र को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तियां प्राप्त हैं। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखना है, विशेष रूप से भारत जैसे विविध देश में।


34. निम्नांकित में से कौन सा कथन भारत के विषय में सही है?

सही उत्तर: अर्द्धसंघ (Quasi Federal)

स्पष्टीकरण:
भारत को अक्सर ‘अर्द्ध-संघीय’ (Quasi-Federal) राज्य के रूप में वर्णित किया जाता है। इसका अर्थ है कि इसमें संघीय और एकात्मक दोनों प्रकार की शासन प्रणालियों की विशेषताएं हैं। यह न तो पूरी तरह से संघीय है और न ही पूरी तरह से एकात्मक।


35. संघीय राज्य के लिए द्विसदनीय व्यवस्था परम आवश्यक है, क्योंकि –

सही उत्तर: राज्यों की समानता के सिद्धान्त को परिपुष्ट करते है

स्पष्टीकरण:
संघीय प्रणाली में द्विसदनीय विधायिका (जैसे भारत में लोकसभा और राज्यसभा) यह सुनिश्चित करती है कि संघ की इकाइयों (राज्यों) का प्रतिनिधित्व किया जाए, भले ही उनकी जनसंख्या कितनी भी हो। राज्यसभा राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है और इस प्रकार राज्यों की समानता के सिद्धांत को मजबूत करती है।


36. निम्न कथनों पर विचार कीजिए और अन्त में दिए गये कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कथन – भारत के संविधान में एक संघीय प्रणाली का प्रावधान है।
कारण – उसने एक बहुत शक्तिशाली केंद्र की रचना की है।

सही उत्तर: दोनों कथन और कारण सही हैं पर कारण कथन का सही स्पष्टीकरण नहीं हैं

स्पष्टीकरण:
कथन (A) सही है, भारत में संघीय प्रणाली है। कारण (R) भी सही है, भारतीय संविधान ने एक शक्तिशाली केंद्र की स्थापना की है। हालांकि, शक्तिशाली केंद्र का होना संघीय प्रणाली का प्रावधान होने का सीधा कारण या स्पष्टीकरण नहीं है। भारत में संघीय प्रणाली मौजूद है, लेकिन इसकी एक विशिष्ट ‘केंद्र-झुकाव’ प्रकृति है, इसलिए शक्तिशाली केंद्र संघीय प्रणाली के बावजूद एक विशेषता है, न कि उसकी व्याख्या।


37. “राष्ट्रपति के सिफारिश के बगैर कोई विधेयक जो कर लगाता है विधायिका में नहीं रखा जा सकता” यह प्रावधान भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत आता है?</P>

सही उत्तर: अनुच्छेद-117

स्पष्टीकरण:
अनुच्छेद 117 वित्त विधेयकों (जिनमें कराधान शामिल है) के संबंध में विशेष प्रावधान करता है। इसमें कहा गया है कि कुछ वित्त विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना संसद में पेश नहीं किए जा सकते।


38. निम्नलिखित में से कौन सा/से प्रावधान भारत के संविधान के अनुच्छेद 249 द्वारा प्रदत्त है?

  1. विधान की अवशिष्ट शक्तियां।
  2. राज्य सूची के विषय के सम्बन्ध में, राष्ट्रीय हित में, विधि बनाने की संसद की शक्तियां।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान को आरक्षित रखना।
    नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

सही उत्तर: केवल 2

स्पष्टीकरण:
अनुच्छेद 249 विशेष रूप से राज्यसभा को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह राष्ट्रीय हित में, राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बनाने के लिए संसद को अधिकृत कर सके।

  1. अवशिष्ट शक्तियां अनुच्छेद 248 से संबंधित हैं।
  2. अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी करने की शक्ति अनुच्छेद 253 से संबंधित है।

39. संविधान का अनुच्छेद 329 सम्बन्धित है:

सही उत्तर: निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से

स्पष्टीकरण:
अनुच्छेद 329 चुनावी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक लगाता है, विशेष रूप से निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या सीटों के आवंटन से संबंधित मामलों में, जो परिसीमन आयोग द्वारा तय किए जाते हैं।


40. ‘भारत के बाहर के स्थानों की तीर्थयात्रायें’ का विषय किस सूची में प्रगणित है?</P>

सही उत्तर: संघ सूची में

स्पष्टीकरण:
भारत के बाहर के स्थानों की तीर्थयात्रायें (Pilgrimages to places outside India) सातवीं अनुसूची की संघ सूची (Union List) का विषय है। इसका अर्थ है कि इस विषय पर कानून बनाने की शक्ति केवल केंद्र सरकार के पास है।


41. समवर्ती सूची के विषय पर राज्य की विधि उसी विषय पर केन्द्रीय विधि पर कब अग्रणी होती है?

सही उत्तर: जब केन्द्रीय विधि की अधिनियमित के पूर्व उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल चुकी हो

स्पष्टीकरण:
अनुच्छेद 254(2) के अनुसार, यदि समवर्ती सूची के किसी विषय पर राज्य का कानून केंद्रीय कानून के विपरीत है, तो राज्य का कानून तब तक प्रभावी रहेगा यदि उसे राष्ट्रपति की सहमति मिल चुकी हो, भले ही केंद्रीय कानून पहले बनाया गया हो।


42. एक संसदीय व्यवस्था में जब मंत्री द्वारा रखा प्रस्ताव विधानमंडल के पटल पर नामंजूर हो जाता है तो ऐसी स्थिति में…

सही उत्तर: सारी मंत्री परिषद् इस्तीफा दे देती हैं।

स्पष्टीकरण:
संसदीय प्रणाली में, सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत लागू होता है। यदि सरकार का कोई महत्वपूर्ण प्रस्ताव (जैसे वित्त विधेयक या कोई नीतिगत प्रस्ताव) विधायिका में पारित नहीं होता है, तो यह माना जाता है कि सरकार ने बहुमत खो दिया है और पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।


43. निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए:

  1. नाममात्रीय या नामधारी राज्याध्यक्ष की उपस्थिति
  2. मंत्रिमण्डल का सामूहिक उत्तरदायित्व
  3. विधायिका के प्रति कार्यपालिका की जबावदेही
  4. शक्तियों का पृथक्करण
    इनमें से कौन-कौन से संसदीय सरकार के लक्षण हैं?

सही उत्तर: 1, 2 और 3

स्पष्टीकरण:
संसदीय सरकार के मुख्य लक्षण हैं:

  1. नाममात्र का राज्याध्यक्ष: वास्तविक कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद के पास होती हैं।
  2. सामूहिक उत्तरदायित्व: मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधायिका (लोकसभा) के प्रति उत्तरदायी होती है।
  3. कार्यपालिका की विधायिका के प्रति जवाबदेही: कार्यपालिका विधायिका के विश्वास तक ही सत्ता में रहती है।
  4. शक्तियों का पृथक्करण अध्यक्षात्मक प्रणाली की विशेषता है, न कि संसदीय प्रणाली की। संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका और विधायिका के बीच घनिष्ठ संबंध होता है।

44. भारत की संसदीय शासन प्रणाली एवं ब्रिटेन की संसदीय शासन प्रणाली में अन्तर का बिन्दु निम्नलिखित में से कौन है?

सही उत्तर: न्यायिक समीक्षा

स्पष्टीकरण:
भारत में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की प्रणाली है, जबकि ब्रिटेन में ‘संसदीय संप्रभुता’ का सिद्धांत प्रचलित है, जहां न्यायालय संसद द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिक वैधता की समीक्षा नहीं कर सकते। अन्य सभी विकल्प (सामूहिक उत्तरदायित्व, द्विसदनात्मक व्यवस्थापिका, वास्तविक एवं नाममात्र की कार्यपालिका) दोनों प्रणालियों में समान हैं।


45. संसदीय सरकार का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्षण है:

सही उत्तर: कार्यपालिका का विधायिका के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व

स्पष्टीकरण:
संसदीय सरकार का सबसे महत्वपूर्ण और पहचान योग्य लक्षण यह है कि कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) सामूहिक रूप से विधायिका (भारत के संदर्भ में लोकसभा) के प्रति उत्तरदायी होती है। इसका अर्थ है कि सरकार तभी तक सत्ता में रहती है जब तक उसे विधायिका का विश्वास प्राप्त हो।


46. संसदीय शासन प्रणाली की सफलता के लिए आदर्श स्थिति है:

सही उत्तर: द्विदलीय व्यवस्था का होना

स्पष्टीकरण:
संसदीय शासन प्रणाली आमतौर पर द्विदलीय व्यवस्था (Two-party system) में सबसे अधिक सफल मानी जाती है। इससे एक स्पष्ट बहुमत वाली सरकार बन पाती है और एक मजबूत विपक्ष भी होता है, जिससे राजनीतिक स्थिरता और प्रभावी शासन सुनिश्चित होता है।


47. निम्न में कौन एक संसदीय प्रणाली का आवश्यक अंग नहीं है?

सही उत्तर: निश्चित कार्यकाल

स्पष्टीकरण:
संसदीय प्रणाली में, सरकार का कार्यकाल निश्चित नहीं होता; यह विधायिका में बहुमत के समर्थन पर निर्भर करता है। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर सरकार गिर सकती है, जिससे कार्यकाल अनिश्चित हो जाता है। अन्य विकल्प संसदीय प्रणाली के आवश्यक अंग हैं।


48. संसदात्मक शासन में वैधानिक सम्प्रभु कौन होता है?</P>

सही उत्तर: संसद

स्पष्टीकरण:
संसदीय शासन प्रणाली में, संसद ही वैधानिक रूप से संप्रभु होती है, जिसका अर्थ है कि उसके पास कानून बनाने की सर्वोच्च शक्ति होती है और कार्यपालिका (सरकार) संसद के प्रति जवाबदेह होती है।


49. निम्नलिखित में से कौन एक संघीय शासन प्रणाली की विशेषता नहीं है?

सही उत्तर: संघीय व्यवस्था में राज्यों को केन्द्र द्वारा शक्तियाँ दी जाती है

स्पष्टीकरण:
संघीय शासन प्रणाली की विशेषता यह है कि केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का वितरण संविधान द्वारा किया जाता है, न कि केंद्र द्वारा राज्यों को शक्तियां दी जाती हैं। राज्यों को अपनी शक्तियां सीधे संविधान से प्राप्त होती हैं।


50. कौन से व्यय भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं?

  1. राष्ट्रपति की परिलब्धियां और भत्ते तथा उनके पद से सम्बंधित अन्य व्यय
  2. प्रधानमंत्री की परिलब्धियां और भत्ते तथा उनके पद से संबंधित अन्य व्यय
  3. राज्य सभा के सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते
  4. लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते
    नीचे दिए गये कूटों में से सही है:

सही उत्तर: 1, 3 और 4

स्पष्टीकरण:
भारत की संचित निधि पर भारित व्यय वे होते हैं जिन पर संसद में मतदान नहीं होता, हालाँकि उन पर चर्चा की जा सकती है।

  1. राष्ट्रपति के व्यय भारित होते हैं।
  2. प्रधानमंत्री के व्यय नहीं, बल्कि मंत्रियों के वेतन और भत्ते भारित नहीं होते, उन पर मतदान होता है।
  3. राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) और उपसभापति के वेतन भारित होते हैं।
  4. लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन भारित होते हैं।

51. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. कोई विधेयक, यदि लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा धन विधेयक प्रमाणित किया जाता है तो उसके निर्णय पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं किया जा सकता।
  2. भारत के राष्ट्रपति में यह शक्ति निहित है कि वे उस विधेयक के प्रकार को, जिसे धन विधेयक माना जाने वाला है, प्रश्नगत कर सकते हैं, भले ही उसे लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा धन विधेयक के रूप में प्रमाणित किया गया हो।
    उपरोक्त कथनों में से सही है/हैं:

सही उत्तर: केवल 1

स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है। लोकसभा अध्यक्ष का यह निर्णय अंतिम होता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, और इस पर किसी भी न्यायालय में या राष्ट्रपति द्वारा प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। इसलिए कथन 2 गलत है।


52. कथन (A): लोक सेवक को नागरिक के रूप में मूल अधिकार प्राप्त नहीं हैं।
कारण (R): अनुच्छेद 309 के प्रावधान के अधीन सेवा की शर्तों का विनियमन करने की राज्य को शक्ति प्राप्त है।

सही उत्तर: कारण (R) सही है, कथन (A) गलत।

स्पष्टीकरण:
कथन (A) गलत है क्योंकि लोक सेवकों को भी नागरिकों की तरह मौलिक अधिकार प्राप्त होते हैं, हालाँकि उन पर कुछ उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं (जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर)। कारण (R) सही है; अनुच्छेद 309 संसद और राज्य विधानमंडल को लोक सेवाओं में नियुक्त व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तों को विनियमित करने की शक्ति देता है।


53. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम में राजनीतिक दलों की भूमिका को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
  2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243 तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का प्रावधान करता है।

सही उत्तर: कथन 1 और कथन 2, दोनों सही हैं।

स्पष्टीकरण:

  1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम ने पंचायतों में चुनाव तो अनिवार्य किए, लेकिन राजनीतिक दलों की सीधी भागीदारी या भूमिका को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया। चुनाव दल-रहित आधार पर भी हो सकते हैं।
  2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243जी (ग्राम सभा) और 243के (चुनाव) के साथ मिलकर अनुच्छेद 243 तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर) का प्रावधान करता है।

54. भारत के प्रधानमंत्री पर नियंत्रण का सबसे उपयुक्त उपाय है:

सही उत्तर: प्रधानमंत्री का संसद के प्रति उत्तरदायी होना।

स्पष्टीकरण:
संसदीय प्रणाली में, प्रधानमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से संसद (विशेष रूप से लोकसभा) के प्रति उत्तरदायी होती है। यह उत्तरदायित्व ही सरकार पर नियंत्रण का सबसे प्रभावी और सीधा तरीका है, क्योंकि यदि सरकार संसद का विश्वास खो देती है तो उसे पद छोड़ना पड़ता है।


55. भारत का राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के विरुद्ध कार्य कर सकता है, जब:

सही उत्तर: संविधान इसके लिए कोई प्रावधान नहीं करता।

स्पष्टीकरण:
भारत का राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य है (42वें और 44वें संशोधन द्वारा स्पष्ट किया गया)। यद्यपि राष्ट्रपति एक बार मंत्रिपरिषद की सलाह को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है, लेकिन पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह को मानने के लिए वह बाध्य है। संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो उसे मंत्रिपरिषद की सलाह के विरुद्ध कार्य करने की अनुमति देता हो।


56. कथन (A): संसदीय प्रजातांत्रिक व्यवस्था, जैसे कि भारत में अपनाई गयी है और चल रही है, आर्थिक समानताओं, विकास एवं सामाजिक न्याय की चुनौतियों का प्रभावी उत्तर देने में असमर्थ हैं।
कारण (R): भारत का स्वातंत्र्योत्तर नेतृत्व जिन सर्वाधिक विस्फोटक मुद्दों का सामना करता रहा है वे जातीय दमन और सामाजिक आर्थिक असमानताओं की समस्याएं हैं।

सही उत्तर: कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की व्याख्या करता है।

स्पष्टीकरण:
दोनों कथन सही हैं। संसदीय प्रजातांत्रिक व्यवस्थाओं को आर्थिक असमानताओं और सामाजिक न्याय की चुनौतियों का समाधान करने में अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, खासकर भारत जैसे विविध और ऐतिहासिक रूप से असमान समाज में। कारण (R) में बताए गए मुद्दे (जातीय दमन और सामाजिक-आर्थिक असमानताएं) आजादी के बाद से ही भारत के सामने बड़ी चुनौतियां रही हैं, और वे कथन (A) में वर्णित अक्षमता को स्पष्ट करते हैं।


57. …इस उद्धरण के आधार पर निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I : भारत का मुख्य न्यायमूर्ति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।
कथन II : जो व्यक्ति राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करता है उसे अनुच्छेद अर्हताओं को पूरा करना आवश्यक नहीं है।

सही उत्तर: कथन I और कथन II दोनों सही हैं।

स्पष्टीकरण:
कथन I सही है। जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों का पद खाली हो, तो भारत का मुख्य न्यायमूर्ति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है (जैसे कि 1969 में न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्लाह ने किया था)।
कथन II भी सही है। जो व्यक्ति राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करता है (कार्यवाहक राष्ट्रपति), उसे राष्ट्रपति के पद के लिए आवश्यक सभी योग्यताओं को पूरा करना अनिवार्य होता है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 58 में वर्णित है। यह प्रश्न में दिए गए “अनुच्छेद अर्हताओं को पूरा करना आवश्यक नहीं है” के विपरीत है, अतः यदि प्रश्न यह मानता है कि “अनुच्छेद अर्हताएं” कुछ विशिष्ट, अतिरिक्त अर्हताएं हैं, तो यह भ्रमित कर सकता है। लेकिन सामान्य तौर पर, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति को राष्ट्रपति की सभी संवैधानिक योग्यताओं को पूरा करना होता है। यदि प्रश्न का अर्थ है कि उन्हें स्वयं राष्ट्रपति बनने की प्रक्रिया से गुजरना आवश्यक नहीं है, तो यह सही है। दिए गए संदर्भ में, यह सबसे उपयुक्त उत्तर प्रतीत होता है।


58. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और यह निर्धारित कीजिए कि कौन-सा कथन सही नहीं है?

सही उत्तर: भारत के संविधान में प्रत्येक जनगणना के पश्चात लोकसभा में स्थानों के आबंटन के ‘पुनः समायोजन के लिए उपबंध है।

स्पष्टीकरण:
यह कथन ‘सही नहीं है’ क्योंकि वर्तमान में 84वें संशोधन अधिनियम (2001) द्वारा लोकसभा सीटों के पुनः समायोजन (delimitation) पर 2026 तक रोक लगा दी गई है। हालाँकि, संविधान में मूलतः प्रत्येक जनगणना के बाद पुनः समायोजन का प्रावधान था (अनुच्छेद 82), लेकिन जनसंख्या नियंत्रण के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इसे स्थगित कर दिया गया है। विकल्पों की तुलना में यह सबसे कम सटीक है क्योंकि वर्तमान स्थिति बदल गई है।


59. कथन (A): लोक सेवाओं के सदस्य राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल के ‘प्रसाद पर्यन्त’ पद धारण करते हैं।
कारण (R): लोक सेवा का कोई भी सदस्य राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल द्वारा स्वविवेक से कभी भी पदच्युत किया जा सकता है।

सही उत्तर: कथन (A) सही है और कारण (R) गलत।

स्पष्टीकरण:
कथन (A) सही है। अनुच्छेद 310 के अनुसार, अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्य राष्ट्रपति के और राज्य सेवाओं के सदस्य राज्यपाल के ‘प्रसाद पर्यन्त’ (during the pleasure) पद धारण करते हैं।
कारण (R) गलत है। ‘प्रसाद पर्यन्त’ का सिद्धांत निरंकुश नहीं है। अनुच्छेद 311 लोक सेवकों को कुछ सुरक्षा प्रदान करता है, जिसके अनुसार उन्हें मनमाने ढंग से पदच्युत नहीं किया जा सकता। बर्खास्तगी, पद से हटाना या रैंक में कमी करने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए, और यह केवल विशिष्ट परिस्थितियों और स्थापित प्रक्रियाओं के तहत ही हो सकता है।


60. भारत का राष्ट्रपति आत्यंतिक, निलम्बनकारी, विशेषित और जेबी वीटो का प्रयोग कर सकता है:

सही उत्तर: केवल विधायी मामलों में

स्पष्टीकरण:
राष्ट्रपति की वीटो शक्तियाँ (आत्यंतिक, निलंबनकारी, और जेबी वीटो) मुख्य रूप से संसद द्वारा पारित विधेयकों (विधायी मामलों) के संबंध में प्रयोग की जाती हैं। विशेषित वीटो (Qualified Veto) भारत के राष्ट्रपति के पास नहीं है, यह अमेरिकी राष्ट्रपति के पास होती है।


61. इनमें से कौन-सी शक्ति राष्ट्रपति को प्राप्त है, लेकिन किसी राज्य के राज्यपाल को नहीं है:

  1. मृत्यु की सजा माफी
  2. राजनयिक शक्ति
  3. राज्य विधानमण्डल द्वारा पारित विधेयक पर निषेधाधिकार का प्रयोग
  4. आपातकाल की घोषणा

सही उत्तर: 1, 2 और 4

स्पष्टीकरण:

  1. मृत्यु की सजा माफी: राष्ट्रपति ही मृत्युदंड को क्षमा कर सकते हैं (अनुच्छेद 72)। राज्यपाल के पास यह शक्ति नहीं है, वे केवल कुछ अन्य सजाओं को निलंबित

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