🌿 छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़ी विवाह परंपराएँ 🕊️
प्यार, परंपरा और प्रकृति का संगम: छत्तीसगढ़ की जनजातियों के अनूठे विवाह रीति-रिवाज
नमस्ते विद्यार्थियों! छत्तीसगढ़, अपनी गहरी जड़ों वाली संस्कृति और समृद्ध आदिवासी परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहाँ जीवन के हर पहलू को प्रकृति और समुदाय से जोड़ा जाता है। आज हम ऐसे ही एक खूबसूरत पहलू का अन्वेषण करने जा रहे हैं – छत्तीसगढ़ की जनजातियों की अद्वितीय विवाह पद्धतियाँ। ये परंपराएँ सिर्फ़ रस्में नहीं, बल्कि सदियों पुराने मूल्यों, विश्वासों और जीवन-शैली का आइना हैं।
इन विवाहों में हमें प्रेम, त्याग, सम्मान और सामुदायिक भावना के अद्भुत उदाहरण देखने को मिलते हैं। आइए, इस सांस्कृतिक यात्रा पर चलें और जानें इन रोचक पद्धतियों को!
विवाह के सांस्कृतिक रंग
यहां छत्तीसगढ़ के एक आदिवासी विवाह समारोह को दर्शाया गया है, जिसमें पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया गया है।
परंपराओं की पोथी से: विवाह पद्धतियाँ
हठ विवाह (दुकु, पैठुल)
जब दिल मिल जाते हैं और परिवार की सहमति न हो, तब कुछ जोड़े एक साहसिक रास्ता चुनते हैं। हठ विवाह में लड़की अपने चुने हुए लड़के के घर चली जाती है और तब तक वहीं रहती है जब तक लड़के के माता-पिता उसे अपनी बहू के रूप में स्वीकार न कर लें। यह उनके दृढ़ प्रेम और विवाह की इच्छा को दर्शाता है।
- • कोरवा जनजाति में: इसे दुकु कहते हैं।
- • बैगा जनजाति में: इसे पैतुल कहा जाता है।
सेवा विवाह (लमसेना जाना)
कई बार वर वधू को देने के लिए पारंपरिक पारिंगधन (वधूमूल्य) देने में असमर्थ होता है। ऐसे में, वह अपने होने वाले ससुर के घर जाकर कुछ वर्षों तक सेवा करता है। यह उसकी ईमानदारी, परिश्रम और रिश्ते के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण होता है, जिसके पश्चात् विवाह संपन्न होता है।
- • बैगा जनजाति में: वर को लमसेना और प्रक्रिया को लमसेना जाना कहते हैं।
- • गोंड़ जनजाति में: चरघिया (वर को लमानाई)
- • कंवर जनजाति में: घरजन
- • बिंझवार जनजाति में:s घरजिया
अपहरण विवाह (पायसोतुर)
जब प्रेम-विवाह को परिवार से सहमति नहीं मिलती, तो कुछ जोड़े इस मार्ग को अपनाते हैं। अपहरण विवाह में लड़का, लड़की की सहमति से उसका “अपहरण” करके विवाह कर लेता है। बाद में, समुदाय की सहमति के लिए लड़के के परिवार द्वारा जाति भोज का आयोजन किया जाता है, जिसके बाद विवाह को सामाजिक मान्यता मिलती है।
- • गोंड़ जनजाति में: इसे पायसोत्तुर कहते हैं।
विनिमय विवाह (गुरांवट)
यह एक अनोखी पद्धति है जहाँ दो परिवारों के बीच रिश्तों का आदान-प्रदान होता है। एक परिवार का भाई-बहन दूसरे परिवार के बहन-भाई से विवाह करते हैं। इस व्यवस्था का एक बड़ा लाभ यह है कि इसमें पारिंगधन (वधूमूल्य) की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे दोनों परिवारों पर वित्तीय बोझ कम होता है।
- • यह विवाह लगभग सभी जनजातियों में प्रचलित है।
- • बिरहोर जनजाति में: इसे गोलत विवाह कहते हैं।
क्रय विवाह (पारिंगधन)
यह छत्तीसगढ़ की कई जनजातियों में एक सामान्य विवाह पद्धति है। इसमें वर पक्ष द्वारा वधू के परिवार को वधूमूल्य दिया जाता है, जिसे पारिंगधन कहते हैं। यह वधू के महत्व और उसके परिवार के प्रति सम्मान को दर्शाता है। कुछ जनजातियों में इस वधूमूल्य के साथ पशु भी दिए जाते हैं।
- • यह विवाह भी लगभग सभी जनजातियों में प्रचलित है।
प्रेम विवाह (गंधर्व, भगेली, उदरिया)
प्रेम एक सार्वभौमिक भावना है, और छत्तीसगढ़ की जनजातियों में भी इसके कई रूप देखने को मिलते हैं:
• गंधर्व / उदरिया विवाह (परजा): इसमें प्रेमी युगल एक-दूसरे को पसंद करते हैं और माता-पिता की सहमति न मिलने पर वे साथ में भागकर विवाह कर लेते हैं।
• भगेली विवाह (गोंड): यह गोंड जनजाति की एक अनूठी प्रेम विवाह पद्धति है। लड़की भागकर लड़के के घर के छप्पर के नीचे खड़ी हो जाती है। इसके बाद लड़का छप्पर पर पानी डालता है, जिसे लड़की अपने सिर पर लेती है। फिर लड़के की माँ उसे घर के अंदर लाती है और उसी रात पारंपरिक रीति से उनका विवाह सम्पन्न कराया जाता है।
दुग्ध लौटावा (गोंड़)
गोंड जनजाति की यह प्रथा परिवार के भीतर ही रिश्तों को मज़बूत करने का एक उदाहरण है। यदि किसी लड़की की शादी नहीं हो पाती है, तो उसकी शादी उसके ममेरे या फुफेरे भाई से कर दी जाती है। यह परिवार के संबंधों को बनाए रखने और भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करने का एक तरीका है।
पोटा विवाह (कोरकु)
पोटा विवाह कोरकु जनजाति में एक पुनर्विवाह पद्धति है। इसमें यदि कोई विवाहित स्त्री अपने पहले पति से अधिक सम्पन्न व्यक्ति के साथ नया जीवन शुरू करना चाहे, तो वह उनसे विवाह कर सकती है। यह दिखाता है कि समाज में महिलाओं को नया जीवन शुरू करने और बेहतर भविष्य चुनने का अवसर दिया जाता है।
छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सीख
प्रिय विद्यार्थियों, छत्तीसगढ़ की जनजातियों की विवाह पद्धतियाँ हमें केवल रस्में नहीं सिखातीं, बल्कि सामाजिक संरचना, पारिवारिक मूल्यों और मानवीय भावनाओं की गहराई को भी दर्शाती हैं।
- समझ और सम्मान: हर परंपरा का अपना महत्व होता है; उसे समझने का प्रयास करें।
- सांस्कृतिक विविधता: हमारा देश और राज्य संस्कृतियों का एक इंद्रधनुष है, इस विविधता का जश्न मनाएँ!
- परीक्षा के लिए: इन पद्धतियों के नाम और संबंधित जनजातियों को अच्छे से याद करें।
हमें उम्मीद है कि यह यात्रा आपको पसंद आई होगी और आपने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में कुछ नया और प्रेरणादायक सीखा होगा।
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