भूमिका:
कम्प्यूटर अपने आप में एक पूर्ण इकाई नहीं है, बल्कि यह विभिन्न हार्डवेयर घटकों का एक समूह है। मनुष्य और मशीन के बीच संवाद स्थापित करने के लिए जिन माध्यमों का उपयोग किया जाता है, उन्हें इनपुट और आउटपुट डिवाइस कहते हैं। इनपुट डिवाइस हमारे द्वारा दिए गए डेटा (Text, Image, Sound) को बाइनरी कोड (0 और 1) में बदलकर प्रोसेसर तक पहुँचाते हैं, जबकि आउटपुट डिवाइस उस प्रोसेस किए गए डेटा को फिर से मानव के समझने योग्य भाषा में बदलकर हमें दिखाते हैं।
इस विस्तृत लेख में हम इनपुट और आउटपुट डिवाइस की आंतरिक बनावट, उनकी कार्यप्रणाली (Mechanism) और उनके विभिन्न प्रकारों का गहन विश्लेषण करेंगे।
भाग 1: इनपुट डिवाइसेज (Input Devices) – डेटा का प्रवेश द्वार
इनपुट डिवाइस वे उपकरण हैं जो बाहरी वातावरण से डेटा और प्रोग्राम प्राप्त कर उन्हें कम्प्यूटर के डिजिटल रूप में परिवर्तित करते हैं।
1.1 की-बोर्ड (Keyboard)
यह कम्प्यूटर का सबसे मुख्य और प्राथमिक ऑनलाइन इनपुट डिवाइस है। यह एक टाइपराइटर के समान दिखता है लेकिन इसमें अधिक कुंजियाँ होती हैं।
- टाइपमैटिक (Typematic): यदि किसी बटन को कुछ देर तक दबाकर रखा जाए, तो वह स्वयं को दोहराता है, इस क्रिया को टाइपमैटिक कहते हैं।
- प्रकार:
- सीरियल की-बोर्ड: डेटा को बिट-दर-बिट क्रमानुसार भेजता है।
- पैरेलल की-बोर्ड: डेटा को कई तारों के माध्यम से एक साथ समांतर रूप में भेजता है।
- कुंजियों के समूह: अल्फ़ाबेट (A-Z), न्यूमेरिकल (0-9), फंक्शनल (F1-F12), एरो कीज, कंट्रोल कीज और स्पेशल कीज (Esc, Tab, Caps Lock)।
1.2 माउस (Mouse)
यह एक ‘पॉइंटिंग डिवाइस’ है। इसे समतल सतह (माउस पैड) पर हिलाने से स्क्रीन पर कर्सर या पॉइंटर नियंत्रित होता है।
- मैकेनिज्म: पुराने माउस के नीचे एक बॉल लगी होती थी जो रोलर्स को घुमाती थी, जिससे डिजिटल सिग्नल जनरेट होते थे। आधुनिक माउस ऑप्टिकल सेंसर (लेजर) का उपयोग करते हैं।
- GUI का प्रभाव: ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के आने के बाद माउस की लोकप्रियता बढ़ी।
1.3 ट्रैक बॉल (Track Ball)
यह माउस का ही एक रूप है, लेकिन इसमें माउस को हिलाने के बजाय उसके ऊपर लगी बॉल को उंगली या अंगूठे से घुमाया जाता है। इसका उपयोग अक्सर लैपटॉप और CAD (Computer-Aided Design) कार्यों में होता है।
1.4 जॉय स्टिक (Joy Stick)
यह मुख्य रूप से वीडियो गेम खेलने के लिए उपयोग किया जाता है। माउस और जॉय स्टिक में मुख्य अंतर यह है कि माउस को छोड़ देने पर कर्सर रुक जाता है, लेकिन जॉय स्टिक में हैंडल को एक दिशा में छोड़ने पर ऑब्जेक्ट उसी दिशा में चलता रहता है जब तक उसे वापस न लाया जाए।
1.5 स्कैनर (Scanner)
यह टेक्स्ट और ग्राफिक्स को सीधे डिजिटल रूप में बदलता है।
- Hand Scanner: इसे हाथ से पकड़कर चित्र के ऊपर घुमाया जाता है।
- Desktop Scanner: इसे फ्लैटबेड स्कैनर भी कहते हैं, इसमें फोटो को रखकर कवर बंद करके स्कैन किया जाता है।
1.6 विशिष्ट इनपुट डिवाइसेज
- MICR (Magnetic Ink Character Reader): बैंकों में चेक पढ़ने के लिए। इसमें आयरन ऑक्साइड युक्त चुंबकीय स्याही का प्रयोग होता है।
- OMR (Optical Mark Reader): प्रतियोगी परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं (OMR Sheet) को जांचने के लिए। यह प्रकाश के परावर्तन की तीव्रता को मापता है।
- OCR (Optical Character Reader): हाथ से लिखे या छपे हुए अक्षरों को पढ़कर डिजिटल टेक्स्ट में बदलने के लिए।
- बार कोड रीडर (BCR): रिटेल स्टोर में वस्तुओं पर लगी काली धारियों (UPC – Universal Product Code) को पढ़ने के लिए।
- लाइट पेन: स्क्रीन पर चित्र बनाने या मेनू चुनने के लिए एक फोटो-सेंसिटिव पेन।
- टच स्क्रीन: एक संवेदनशील स्क्रीन जहाँ उंगली के स्पर्श से इनपुट दिया जाता है। इसमें हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल किरणों का ग्रिड होता है।
भाग 2: आउटपुट डिवाइसेज (Output Devices) – सूचना का प्रदर्शन
आउटपुट डिवाइस वे उपकरण हैं जो प्रोसेसर से प्राप्त सूचनाओं को यूजर तक पहुँचाते हैं। परिणाम दो रूपों में होते हैं:
- सॉफ्ट कॉपी (Soft Copy): मॉनिटर पर दिखने वाला या स्पीकर से आने वाला परिणाम, जिसे बदला जा सकता है।
- हार्ड कॉपी (Hard Copy): प्रिंटर या प्लॉटर द्वारा कागज पर निकाला गया स्थायी परिणाम।
2.1 मॉनिटर (Monitor)
मॉनिटर सबसे महत्वपूर्ण आउटपुट डिवाइस है। रंगों और तकनीक के आधार पर इसके कई प्रकार हैं:
A. CRT मॉनिटर (Cathode Ray Tube)
- बनावट: इसमें एक वैक्यूम ट्यूब होती है जिसके पीछे इलेक्ट्रॉन गन होती है। स्क्रीन के अंदरूनी हिस्से पर फास्फोरस की कोटिंग होती है।
- कार्यविधि: इलेक्ट्रॉन गन से निकली बीम जब फास्फोरस स्क्रीन पर गिरती है, तो पिक्सेल (Pixels) चमकते हैं।
- रास्टर स्कैन: इलेक्ट्रॉन बीम जब स्क्रीन पर ‘Z’ आकृति में घूमती है, तो इसे रास्टर स्कैन कहते हैं।
- रिफ्रेश रेट: स्क्रीन को बार-बार चमकाने की दर (Hz में मापी जाती है)। मानक दर 75Hz है।
B. LCD (Liquid Crystal Display)
इसमें दो कांच की परतों के बीच एक पारदर्शी द्रवीय पदार्थ (Liquid Crystal) होता है। यह हल्का और कम बिजली खपत करने वाला होता है।
C. प्लाज्मा मॉनिटर (Plasma Monitor)
कांच की दो शीट के बीच नियोन या जेनन गैस भरकर बनाया जाता है। विद्युतीकरण होने पर गैस प्लाज्मा बनकर चमकती है।
D. मॉनिटर के मुख्य तकनीकी लक्षण:
- रेजोल्यूशन (Resolution): स्क्रीन पर पिक्सेलों की कुल संख्या। जितना अधिक, उतना स्पष्ट चित्र।
- डॉट पिच (Dot Pitch): दो पिक्सेलों के बीच की दूरी।
- बिट मैपिंग: वह तकनीक जिससे स्क्रीन पर ग्राफिक्स और टेक्स्ट दोनों प्रदर्शित किए जा सकें।
भाग 3: प्रिंटर (Printers) – हार्ड कॉपी का विशेषज्ञ
प्रिंटर को उनकी छपाई की तकनीक के आधार पर दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
3.1 इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printer)
ये प्रिंटर टाइपराइटर के सिद्धांत पर कार्य करते हैं, जहाँ एक हैमर रिबन और कागज पर चोट करता है।
- डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (DMP): पिनों के मैट्रिक्स से बिंदु-बिंदु करके अक्षर छापता है। यह बहुत सस्ता और शोर करने वाला होता है।
- डेजी व्हील प्रिंटर: इसमें एक चक्र (Wheel) होता है जिस पर अक्षर उभरे होते हैं। यह केवल टेक्स्ट छाप सकता है।
- चेन प्रिंटर: इसमें धातु की एक चैन घूमती है जिस पर अक्षर होते हैं। यह एक ‘लाइन प्रिंटर’ है।
3.2 नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर (Non-Impact Printer)
ये कागज पर प्रहार नहीं करते, बल्कि रासायनिक, इंकजेट या लेजर तकनीक का उपयोग करते हैं।
- इंकजेट प्रिंटर: स्याही की बूंदों को नोजल के माध्यम से स्प्रे करके छपाई करता है। इसमें कार्ट्रिज का उपयोग होता है।
- लेजर प्रिंटर: यह सबसे तेज और उच्च गुणवत्ता वाला प्रिंटर है। यह ‘जेरोग्राफी’ (Xerography) तकनीक पर आधारित है। इसमें ‘टोनर’ (सूखी स्याही) का उपयोग होता है। यह 300 से 600 DPI (Dots Per Inch) पर छपाई करता है।
- थर्मल प्रिंटर: इसमें गर्म पिनों का उपयोग विशेष रूप से केमिकल कोटेड कागज पर छपाई के लिए किया जाता है (जैसे ATM रसीद)।
भाग 4: प्लॉटर (Plotters) – उच्च स्तरीय ग्राफ़िक्स
प्लॉटर का उपयोग मैप, ३-डी चित्र, आर्किटेक्चरल ड्राइंग और बड़े चार्ट प्रिंट करने के लिए होता है।
- Flat Bed Plotter: इसमें कागज स्थिर रहता है और पेन की भुजाएं (Arms) घूमती हैं।
- Drum Plotter: इसमें कागज एक ड्रम पर चढ़ा होता है जो आगे-पीछे खिसकता है और पेन ऊपर-नीचे चलता है।
भाग 5: साउंड कार्ड और स्पीकर
कम्प्यूटर से आवाज प्राप्त करने के लिए ‘साउंड कार्ड’ की आवश्यकता होती है, जो मदरबोर्ड के स्लॉट में लगा होता है। स्पीकर के माध्यम से हम डिजिटल सिग्नल को ध्वनि तरंगों के रूप में सुनते हैं। संगीतकारों के लिए MIDI (Musical Instrument Digital Interface) पोर्ट का उपयोग किया जाता है।
भाग 6: वीडियो मानक (Video Standards)
समय के साथ मॉनिटर की प्रदर्शन क्षमता बढ़ी है:
- CGA: 4 रंग, 320×200 पिक्सेल।
- VGA: 16-256 रंग, 640×480 पिक्सेल।
- SVGA (Super VGA): लाखों रंग, 1280×1024 पिक्सेल तक। इसे VESA मानकों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
भाग 7: निष्कर्ष
इनपुट और आउटपुट डिवाइसेज कम्प्यूटर प्रणाली के हाथ, पैर और आँखों की तरह हैं। तकनीक के विकास के साथ जहाँ इनपुट डिवाइसेज अधिक ‘वॉइस और टच’ आधारित हो रहे हैं, वहीं आउटपुट डिवाइसेज ‘हाई डेफिनिशन (HD)’ और ‘3D छपाई’ की ओर बढ़ रहे हैं। श्री पुनाराम साहू सर के मार्गदर्शन में तैयार यह जानकारी स्पष्ट करती है कि बिना कुशल I/O डिवाइसेज के, आधुनिक प्रोसेसिंग पावर का लाभ उठाना असंभव है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – गूगल रैंकिंग हेतु
1. इम्पैक्ट और नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर में क्या अंतर है?
इम्पैक्ट प्रिंटर कागज पर चोट करके छापते हैं और शोर करते हैं (जैसे डॉट मैट्रिक्स), जबकि नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर बिना शोर किए लेजर या इंक स्प्रे से छापते हैं (जैसे लेजर प्रिंटर)।
2. DPI क्या है और इसका महत्व क्या है?
DPI का अर्थ है ‘Dots Per Inch’। यह प्रिंटर की रेजोल्यूशन क्षमता बताता है। DPI जितना अधिक होगा, प्रिंट की क्वालिटी उतनी ही बेहतर होगी।
3. MICR तकनीक का उपयोग कहाँ होता है?
MICR (Magnetic Ink Character Recognition) का मुख्य उपयोग बैंकिंग क्षेत्र में चेक की वैधता और संख्या को तेजी से पढ़ने के लिए होता है।
4. क्या टच स्क्रीन इनपुट है या आउटपुट?
टच स्क्रीन एक हाइब्रिड डिवाइस है। यह जानकारी प्रदर्शित करता है (आउटपुट) और स्पर्श के माध्यम से निर्देश भी लेता है (इनपुट)।
5. ‘रास्टर’ (Raster) से क्या तात्पर्य है?
CRT मॉनिटर में इलेक्ट्रॉन बीम की स्क्रीन पर बाएँ से दाएँ और ऊपर से नीचे की गति को रास्टर कहते हैं, जिससे पूरी इमेज बनती है।
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